सतना जिला अस्पताल की पार्किंग व्यवस्था फिर विवादों में है। नया ठेका जारी होने के बावजूद पुरानी टीम वसूली कर रही है। अनुबंध राशि जमा न होने और कार्यादेश बिना संचालन पर सवाल उठ रहे हैं।
सतना रेलवे स्टेशन के बाहर ऑटो चालकों की मनमानी और नो-पार्किंग जोन में खड़े वाहनों ने जाम की समस्या को स्थायी बना दिया है। ट्रेन आने के साथ ही यात्रियों को अंदर-बाहर निकलने में भारी परेशानी होती है। पार्किंग ठेका खत्म होने से व्यवस्थाएं ध्वस्त हैं और दोपहिया वाहन चोरी जैसी घटनाएं भी बढ़ रही हैं। यात्री और स्थानीय लोग रेलवे प्रशासन से सख्त कार्रवाई और नई पार्किंग व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।
सतना जंक्शन पर रेलवे को हर माह भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। पार्किंग ठेका सरेंडर होने से 5.5 लाख और कोच रेस्टोरेंट बंद होने से 2 लाख रुपए का राजस्व घटा है। ठेकेदारों की अरुचि, बार-बार फेल हो रहे टेंडर और यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था नदारद होने से स्टेशन की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सतना जिला अस्पताल के निरीक्षण में कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस ने पार्किंग ठेकेदार और आरकेएस कर्मियों को लगाई फटकार। नई 150 बिस्तरों की बिल्डिंग निर्माण में हो रही देरी और अव्यवस्था को लेकर सख्त निर्देश दिए।
सतना जंक्शन के ईस्ट साइड पार्किंग का ठेका सरेंडर होते ही सुरक्षा में चूक सामने आई है। CCTV कैमरे हटने के बाद चोरी की आशंका बढ़ गई है। पूर्व में 155 वाहन चोरी की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। अब वाहन पार्किंग यात्रियों की अपनी जिम्मेदारी पर होगी। जीआरपी और आरपीएफ की अनुपस्थिति ने यातायात व्यवस्था को भी प्रभावित किया।
सतना रेलवे स्टेशन की पार्किंग सुविधा ठेकेदार द्वारा घाटे के चलते सरेंडर कर दी गई है। अब यात्री अपने दो और चार पहिया वाहनों की सुरक्षा खुद करेंगे। रेलवे ने फिलहाल कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की है, जल्द नई निविदा प्रक्रिया शुरू होगी।


















