मध्य प्रदेश सरकार द्वारा कई बार पत्र लिखने के बावजूद एक भी शेर नहीं दिया। मध्यप्रदेश को 11 साल से लटकाए रखा। वहीं अब मध्यप्रदेश में पुनर्वासित अफ्रीकी चीते गुजरात के जंगलों की नई पहचान बनने जा रहे हैं। अफ्रीका से भारत लाए जाने के बाद यह पहला मौका होगा, जब चीतों की अंतरराज्यीय शिफ्टिंग की जाएगी।
मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में नामीबियाई मादा चीता ज्वला के चार शावकों की मौत हो गई है। शावकों के शव आधे खाए हुए मिले हैं, जिससे शिकारियों के हमले की आशंका जताई जा रही है।
सीएम डॉ. मोहन यादव ने सोमवार की सुबह कूनो नेशनल पार्क में बोत्सवाना से लाए गए 9 चीतों में से सीसीड़ी- 2 और सीसीड़ी-3 नाम के 2 मादा चीतों को खुले जंगल में आजाद किया।इस नजारे को देखकर मौके पर मौजूद सभी लोग आनंदित हो उठे, इस दौरान प्रभारी मंत्री राकेश शुक्ला, रामनिवास रावत, गुड्डी बाई आदिवासी और जिला अध्यक्ष शशांक भूषण के अलावा तमाम जनप्रतिनिधि और प्रशासन-पुलिस के अधिकारी मौजूद रहे।
बोत्सवाना से आज यानी शनिवार को विशेष विमान के जरिए चीते ग्वालियर एयरबेस पहुंचे। यहां से तीन वायुसेना के हेलीकॉप्टर के माध्यम से उन्हें कूनो के लिए रवाना किया गया। बोत्सवाना से पहले 8 चीते (6 मादा, 2 नर) आने थे, जबकि अब 9 चीते (6 मादा, 3 नर) भारत लाएग गए हैं।
कूनो नेशनल पार्क में बोत्सवाना से 8 नए चीते आ रहे हैं। शनिवार सुबह सीएम मोहन यादव इन चीतों को बाड़े में रिलीज करेंगे।
मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में उत्सव की लहर दौड़ गई है, क्योंकि दक्षिण अफ्रीका से आई चीता गामिनी दूसरी बार मां बनी है। मादा चीता ने तीन नए शावकों को जन्म दिया है। दक्षिण अफ्रीका से चीतों के आगमन के तीन वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में कूनो में एक नया अध्याय जुड़ गया है। यह खुशी भरा आगमन भारतीय धरती पर चीतों के नौवें सफल प्रसव का प्रतीक है।
चीता पुनर्वास परियोजना के तहत तीसरे चरण में आठ चीते बोत्सवाना से लाए जा रहे हैं। इन्हें 28 फरवरी को कूनो नेशनल पार्क के बाड़े में मुक्त करने की तैयारी है। इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु के साथ बोत्सवाना के राष्ट्राध्यक्ष डुमा बोका भी मौजूद रह सकते हैं। कार्यक्रम केंद्रीय वन मंत्री भूपेंद्र यादव की मौजूदगी में होगा।



















