मध्य प्रदेश सरकार द्वारा कई बार पत्र लिखने के बावजूद एक भी शेर नहीं दिया। मध्यप्रदेश को 11 साल से लटकाए रखा। वहीं अब मध्यप्रदेश में पुनर्वासित अफ्रीकी चीते गुजरात के जंगलों की नई पहचान बनने जा रहे हैं। अफ्रीका से भारत लाए जाने के बाद यह पहला मौका होगा, जब चीतों की अंतरराज्यीय शिफ्टिंग की जाएगी।

अगस्त-सितंबर तक शिफ्टिंग की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद
सभी चीतों को पहले भारतीय वातावरण के अनुरूप तैयार किया
दूसरे राज्य में पुनर्वासित कर चीता प्रोजेक्ट का बढ़ा रहे दायरा
भोपाल। स्टार समाचार वेब
मध्य प्रदेश सरकार द्वारा कई बार पत्र लिखने के बावजूद एक भी शेर नहीं दिया। मध्यप्रदेश को 11 साल से लटकाए रखा। प्रदेश सरकार उन्हें बब्बर शेर भेजने के लिए पत्र लिखती है और बदले में वह एक नई शर्त लगाते रहे। कूनो-पालपुर सेंक्चुरी 1996 में बनाई गई थी। मध्यप्रदेश सरकार ने 2003 में सेंक्चुरी के लिए गुजरात से शेर भेजने के लिए पत्र लिखा था। यही नहीं, इसके लिए 24 गांवों के 1545 परिवारों को वहां से विस्थापित भी कर दिया गया। 2007 में केंद्र सरकार ने सख्ती दिखाई तो गुजरात सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पिटीशन दायर करते हुए कूनो सेंक्चुरी के लिए शेर देने से मना कर दिया। जबकि अभी भी कूनो सेंक्चुरी गुजरात के गिरि अभयारण्य से हर मामले में बेहतर है। वहीं अब मध्यप्रदेश में पुनर्वासित अफ्रीकी चीते गुजरात के जंगलों की नई पहचान बनने जा रहे हैं। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) और चीता प्रोजेक्ट स्टीयरिंग कमेटी ने कूनो नेशनल पार्क से दो नर और दो मादा चीतों को गुजरात के कच्छ स्थित बन्नी ग्रासलैंड में शिफ्ट करने की मंजूरी दे दी है। अफ्रीका से भारत लाए जाने के बाद यह पहला मौका होगा, जब चीतों की अंतरराज्यीय शिफ्टिंग की जाएगी।
नौरादेही से पहले कच्छ भेजेंगे
पहले कूनो और गांधीसागर के बाद चीतों को मध्य प्रदेश के ही नौरादेही (वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व) में बसाने की तैयारी थी। लेकिन, अब नौरादेही से पहले इन्हें कच्छ भेजा जा रहा है। कूनो नेशनल पार्क में नामीबिया, दक्षिण अफ्रीका और बोत्सवाना से लाए गए चीतों को पहले भारतीय वातावरण के अनुरूप तैयार किया गया।
एमपी में अभी 53 चीते
अब इन्हीं चीतों को दूसरे राज्य में पुनर्वासित कर चीता प्रोजेक्ट का दायरा बढ़ाया जा रहा है। विभागीय अफसरों का कहना है कि अगस्त-सितंबर तक शिफ्टिंग की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। मप्र में अभी 53 चीते हैं। इनमें से 50 कूनो तो 3 गांधीसागर में हैं। नौरादेही को चीतों के तीसरे घर के लिए पूरी तैयारी भी थी।
शिफ्टिंग विशेषज्ञों की निगरानी में होगी
मध्यप्रदेश के प्रधान मुख्य वन संरक्षक व राज्य वन बल प्रमुख शुभरंजन सेन के मुताबिक, कूनो नेशनल पार्क में चीतों ने भारतीय परिस्थितियों में खुद को बेहतर तरीके से ढाल लिया है। अब चीता प्रोजेक्ट के तहत गुजरात के कच्छ स्थित बन्नी ग्रासलैंड में अंतरराज्यीय शिफ्टिंग की तैयारी है। यह कदम देश में चीता लैंडस्केप को अलग-अलग राज्यों तक विस्तार देने की दिशा में महत्वपूर्ण होगा। चीतों की स्वास्थ्य स्थिति, मूवमेंट और व्यवहार की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। शिफ्टिंग पूरी तरह वैज्ञानिक मानकों और विशेषज्ञों की निगरानी में की जाएगी।
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