खंडवा जिले के जावर थाना क्षेत्र के एक मदरसे से पुलिस ने इमाम जुबेर अंसारी के कमरे से 12 लाख रुपये से अधिक के नकली नोट बरामद किए हैं। महाराष्ट्र की मालेगांव पुलिस ने जुबेर और उसके साथी नजीम को 10 लाख रुपये के नकली नोटों के साथ गिरफ्तार किया था। खंडवा पुलिस अब बड़े तस्करी नेटवर्क की जांच कर रही है।
भोपाल की पूर्व सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने कथावाचक अनिरुद्धाचार्य के लिव-इन संबंधों और पश्चिमी पहनावे पर दिए गए बयान का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि संस्कारों की कमी के कारण लड़कियां अर्धनग्न दिखती हैं और इससे दुराचार बढ़ता है। जानें उन्होंने और क्या कहा।
मालेगांव ब्लास्ट केस में बरी होने के बाद साध्वी प्रज्ञा ठाकुर से मिलने पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती पहुंचीं। जानें इस भावुक मुलाकात में उमा भारती ने क्या कहा और क्यों इसे 'भगवा को बदनाम करने की साजिश' बताया।
महाराष्ट्र के मालेगांव ब्लास्ट में आरोपों से बरी होने के बाद भोपाल की पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने इस मामले की जांच कर रहे अफसरों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रज्ञा ठाकुर ने मीडिया से चर्चा के दौरान कहा कि मुझे बुरी तरह टॉर्चर किया गया।
मालेगांव ब्लास्ट केस में गुरुवार को मुंबई की एक विशेष अदालत ने फैसला सुनाया। कोर्ट ने इस मामले में प्रज्ञा ठाकुर और कर्नल पुरोहित समेत सभी सात आरोपियों को बरी कर दिया। कोर्ट के इस फैसले पर विपक्ष के कई नेताओं ने आपत्ति जताई है।
अब इस मामले पर रिटायर्ड एटीएस अधिकारी महबूब मुजावर ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। मालेगांव ब्लास्ट के बाद उस समय के जांचकर्ता अधिकारी परमवीर सिंह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) चीफ मोहन भागवत को गिरफ्तार करने के आदेश दिए थे।
मालेगांव ब्लास्ट मामले में एनआईए कोर्ट ने साध्वी प्रज्ञा ठाकुर, कर्नल पुरोहित सहित सभी आरोपियों को बरी कर दिया। जानें 17 साल बाद आए इस फैसले के मायने, 'भगवा आतंकवाद' का विवाद और न्याय प्रणाली पर उठते सवाल।
01 अगस्त 2025 की बड़ी खबरें: मालेगांव ब्लास्ट केस में कोर्ट के फैसले, अमेरिका के टैरिफ पर भारत की प्रतिक्रिया, मोदी कैबिनेट के महत्वपूर्ण निर्णय और मध्य प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस द्वारा उठाए गए 'ड्रग्स-इंजेक्शन' के मुद्दे का पूरा विश्लेषण।
महाराष्ट्र के मालेगांव ब्लास्ट मामले में फैसला 17 साल बाद आया। जज एके लाहोटी ने कहा कि ये साबित नहीं हुआ कि जिस बाइक में ब्लास्ट हुआ वो साध्वी प्रज्ञा के नाम थी। ये भी साबित नहीं हो सका कि कर्नल प्रसाद पुरोहित ने बम बनाया।





















