विंध्य के छह जिलों में पीडीएस व्यवस्था सुस्त, 17 दिनों में केवल 24-32% राशन वितरण। गोदाम से आपूर्ति के बावजूद हितग्राही वंचित, व्यवस्थागत खामियों और लापरवाही पर उठे गंभीर सवाल।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
सतना जिले के एक ब्लाक में हुए करोड़ों के राशन घोटाला के बाद भी पीडीएस की चाल में सुधार नहीं आया है। अकेले सतना के ही नहीं विंध्य क्षेत्र के छह जिलों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत खाद्यान्न वितरण अपेक्षाकृत धीमा बना हुआ है, जबकि आपूर्ति तंत्र में कोई बड़ी बाधा नहीं दिख रही। इसके बाद भी हर तीन में से दो हितग्राहियों तक राशन नहीं पहुंच सका। विड़बना यह है कि अधिकारी इसे रुटीन वर्क मान रहे हैं।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, विंध्य के छह जिलों में मार्च माह के 17 दिनों में केवल 24 से 32 प्रतिशत पात्र हितग्राहियों को ही राशन वितरित किया जा सका है। जिलेवार स्थिति पर नजर डालें तो सतना और रीवा में लगभग 32 प्रतिशत, सीधी और सिंगरौली में करीब 27 प्रतिशत, मैहर में 26 प्रतिशत और मऊगंज सबसे पीछे है, जहां अब तक केवल 24 प्रतिशत हितग्राहियों को राशन मिल पाया है।
यह तब है जब अधिकांश जिलों में गोदामों से 75 से 80 प्रतिशत तक राशन डिस्पैच हो चुका है और उचित मूल्य दुकानों (एफपीएस) तक भी पर्याप्त मात्रा में अनाज पहुंच जा चुका है। गौरतलब है कि सतना जिले के उचेहरा ब्लाक की दो समितियों ने कई करोड़ का राशन घोटाला कर चुकी हैं जिस पर एक्शन भी हो चुका है लेकिन अब तक गरीबों को उनके हक का राशन नहीं मिल पाया है।
12 दिन में 70 फीसदी की चुनौती
पीडीएस व्यवस्था में घुन की तरह लगी व्यवस्थागत नीतियों ने कारण हर माह कमोवेश यही स्थिति रहती है। अब जब विंध्य के छह जिलों में गरीब की ािाली तक पहुंचाने का प्रतिशत 17 दिन बीत जाने के बाद 24-32 फीसदी है तब बचे हुए 10 दिनों में 70 फीसदी का वितरण चुनौती से कम नहीं है।
हर महीने का यही रोना
अधिकारियों के अनुसार, वितरण में सुस्ती के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिनमें ई-पॉस मशीनों पर बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण में दिक्कतें, उचित मूल्य दुकानों का सीमित समय, और महीने के शुरूआती दिनों में हितग्राहियों की अपेक्षाकृत कम उपस्थिति शामिल हैं। यह चाल पिछले महीनों में भी रही। जब वितरण आमतौर पर महीने के दूसरे पखवाड़े में तेज होता है। हालांकि, वर्तमान रफ्तार को देखते हुए आशंका है कि यदि सुधार नहीं हुआ, तो बड़ी संख्या में हितग्राही समय पर अपने हक का राशन प्राप्त नहीं कर पाएंगे।
बड़ा सवाल
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब डिस्पैच 80 फीसदी और दुकानों तक 75 फीसदी तक पहुंच गया है तो फिर उपभोक्ताओं तक 24-32 फीसदी ही क्यों अटका हुआ है।

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