मार्च 2026 के राशन वितरण से पहले विंध्य के छह जिलों में गेहूं-चावल का उठाव बेहद धीमा है। डिस्पैच और दुकानों तक वास्तविक पहुंच के आंकड़े चिंता बढ़ा रहे हैं।
By: Yogesh Patel
Feb 25, 20263:55 PM
हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
मार्च 2026 के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत आवंटित गेहूं-चावल का उठाव विंध्य अंचल के छह जिलों में बेहद धीमी रफ्तार से चल रहा है। 17 फरवरी तक की प्रगति रिपोर्ट के अनुसार इन जिलों में औसतन 1 से 3 प्रतिशत तक ही डिस्पैच हुआ है, जबकि उचित मूल्य दुकानों (एफपीएस) तक वास्तविक प्राप्ति 0 से 1 प्रतिशत के बीच सिमटी हुई है। इससे मार्च माह में हितग्राहियों को समय पर राशन वितरण को लेकर आशंकाएं बढ़ गई हैं।
मार्च 2026 के राशन वितरण से पहले विंध्य के छह जिलों-सतना, रीवा, सीधी, सिंगरौली, मैहर और मऊगंज-में उठाव की रफ्तार बेहद धीमी है। 17 फरवरी तक की प्रगति में सामने आया है कि इन जिलों में गेहूं-चावल का औसत डिस्पैच सिर्फ 1 से 3फीसदी तक हुआ है। हैरानी की बात यह है कि उचित मूल्य दुकानों (एफपीएस) तक वास्तविक पहुंच 0 से 1 फीसदी के बीच ही सिमटी हुई है।
रीवा-सतना में भी रफ्तार कम
रीवा जिले को मार्च के लिए 5,185 मीट्रिक टन गेहूं और 1,443 मीट्रिक टन चावल आवंटित हुआ है। इसके मुकाबले डिस्पैच करीब 3फीसदी हुआ, लेकिन दुकानों तक पहुंच लगभग शून्य रही। सतना में 4,475 मीट्रिक टन गेहूं और 1,173 मीट्रिक टन चावल आवंटित है। यहां औसत डिस्पैच 3फीसदी और एफपीएस प्राप्ति 1फीसदी दर्ज की गई। नए जिले मैहर में भी हाल बेहतर नहीं। यहां 2,426 मीट्रिक टन गेहूं और 684 मीट्रिक टन चावल का आवंटन हुआ है। यहां डिस्पैच करीब 2फीसदी तक पहुंचा है, लेकिन दुकानों में प्राप्ति 1 फीसदी से ज्यादा नहीं है।
सीधी, मऊगंज और सिंगरौली की स्थिति चिंताजनक
सीधी में 3,424 मीट्रिक टन गेहूं और 2,071 मीट्रिक टन चावल के मुकाबले डिस्पैच सिर्फ 1फीसदी है। मऊगंज में 2,119 मीट्रिक टन गेहूं और 589 मीट्रिक टन चावल के बावजूद दुकानों तक अभी तक अनाज पहुंचना शुरू नहीं हुआ। सिंगरौली में 3,450 मीट्रिक टन गेहूं और 2,127 मीट्रिक टन चावल आवंटित है, लेकिन एफपीएस स्तर पर प्राप्ति शून्य है। यानी गोदाम से निकलने के बाद सप्लाई चेन थमी हुई नजर आ रही है।
राज्य औसत से भी पीछे
राज्य औसत 4 फीसदी डिस्पैच के मुकाबले विंध्य के ये जिले पीछे हैं। डिस्पैच और एफपीएस प्राप्ति के बीच बड़ा अंतर संकेत दे रहा है कि परिवहन, लोडिंग-अनलोडिंग या आॅनलाइन एंट्री में देरी हो रही है। आपूर्ति विभाग का कहना है कि यह शुरूआती आंकड़े हैं और जल्द रफ्तार बढ़ेगी। लेकिन सवाल यह है कि यदि फरवरी के मध्य तक यही स्थिति रही तो मार्च में हितग्राहियों को समय पर राशन कैसे मिलेगा?