उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन ने कहा है कि पश्चिम एशिया का युद्ध दिखाता है कि केवल मजबूत सेना ही सुरक्षा दे सकती है। उन्होंने दक्षिण कोरिया को दुश्मन देश घोषित कर परमाणु ताकत बढ़ाने का संकल्प लिया।

उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन ने देश के परमाणु कार्यक्रम को लेकर एक बार फिर कड़ा रुख अपनाया है। सुप्रीम पीपल्स असेंबली (संसद) में दिए गए एक महत्वपूर्ण संबोधन में किम ने कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात, खासकर ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले, यह साबित करते हैं कि उत्तर कोरिया का परमाणु शक्ति बनने का रास्ता बिल्कुल सही था।

किम जोंग उन के अनुसार, मिडल ईस्ट में जारी युद्ध यह सबक देता है कि आज की दुनिया में केवल "अजेय सैन्य शक्ति" ही किसी देश की सुरक्षा की गारंटी दे सकती है। उन्होंने कहा कि दुश्मनों की बातों में न आकर अपनी परमाणु क्षमता को सुरक्षित रखना ही देश के अस्तित्व के लिए जरूरी था। किम ने स्पष्ट किया कि 2019 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ बातचीत विफल होने के बाद, हथियारों के भंडार को बढ़ाना उनका सबसे सटीक रणनीतिक कदम था।
अपने भाषण में किम ने दक्षिण कोरिया के प्रति नीति में बड़े बदलाव के संकेत दिए। उन्होंने पड़ोसी देश को 'सबसे बड़ा दुश्मन' करार देते हुए कहा कि अब उसे पूरी तरह नजरअंदाज किया जाएगा। किम ने चेतावनी दी कि यदि दक्षिण कोरिया ने उत्तर कोरिया के हितों को नुकसान पहुँचाने की रत्ती भर भी कोशिश की, तो उसे "कड़ी सजा" भुगतनी होगी।
व्हाइट हाउस में ट्रंप की वापसी के संकेतों और बातचीत की संभावनाओं पर किम ने अपनी शर्त साफ कर दी है। उत्तर कोरिया का मानना है कि भविष्य में कोई भी चर्चा तभी संभव है, जब अमेरिका आधिकारिक तौर पर उसे एक 'परमाणु संपन्न राष्ट्र' के रूप में मान्यता दे। किम ने सद्दाम हुसैन और मुअम्मर गद्दाफी का उदाहरण देते हुए दोहराया कि परमाणु हथियार न होने की वजह से ही उन शासकों का अंत बुरा हुआ।
किम ने केवल हथियारों पर ही नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था पर भी जोर दिया। उनका दावा है कि परमाणु छतरी की वजह से देश अब बाहरी खतरों से सुरक्षित है, जिससे उत्तर कोरिया अपने संसाधनों का उपयोग आर्थिक विकास और आधुनिक मिसाइलों (जैसे Hwasong-17 ICBM) के निर्माण में कर पा रहा है। उन्होंने साफ कहा कि उत्तर कोरिया अब अमेरिका के खिलाफ वैश्विक मोर्चे पर अधिक सक्रिय भूमिका निभाएगा।

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