सतना में राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत खोवा मंडी के पास नया आयुष विंग बनकर तैयार हुआ। अस्पताल से दूरी के कारण मरीजों को आयुर्वेद और एलोपैथी उपचार के लिए अलग-अलग स्थानों पर जाना पड़ेगा।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
जिला अस्पताल के एक छोटे से कमरे में सिमटा आयुष विंग अब खुले परिसर में सांस लेगा। खोवा मंडी के पास इसकी नई बिल्डिंग बनकर तैयार हो गई है। विभाग को अपनी छत तो मिल गई, लेकिन इस निर्माण ने सरकार की उस मंशा पर सवाल खड़ा कर दिया है, जिसके तहत मरीजों को एक ही छत के नीचे एलोपैथी और आयुर्वेद चिकित्सा की सुविधा देने का सपना दिखाया गया था। जिला अस्पताल से दूर बनी बिल्डिंग में आयुष विंग शिफ्ट होने के बाद मरीजों को दोनों चिकित्सा सुविधाओं के लिए अलग-अलग जगह जाना पडेÞगा। हालांकि अभी इसमें नए उपकरणों को इंस्टॉलेशन किया जाना बाकी है। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत वर्ष 2021-22 में जिले में नए आयुष विंग के निर्माण की योजना बनाई गई थी। करीब 40-45 लाख रुपए की लागत से प्रस्तावित इस प्रोजेक्ट को जमीन की तलाश में लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा।
निर्माण की प्रक्रिया में एक बार ड्राइंग भी बदलनी पड़ी। अब भवन बनकर तैयार है, लेकिन इसके साथ ही यह सवाल भी उठ रहा है कि जब जिला अस्पताल परिसर में ही एलोपैथी और आयुर्वेद की सुविधाएं उपलब्ध कराने का लक्ष्य था, तो आयुष विंग को अस्पताल से दूर क्यों बनाया गया?
पंचकर्म से मिलेगा कई रोगों में उपचार का विकल्प
आयुष विंग में पंचकर्म सहित आयुर्वेदिक चिकित्सा सुविधाओं को विस्तार देने की योजना है। यहां गठिया, जोड़ों के दर्द, साइटिका, सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस, साइनस, माइग्रेन और कुछ दीर्घकालिक समस्याओं से पीड़ित मरीजों को उपचार की सुविधा मिल सकेगी। बीपी, डायबिटीज और लिवर संबंधी समस्याओं में भी चिकित्सकीय परामर्श के साथ उपयुक्त आयुष उपचार उपलब्ध कराने की तैयारी है।
सरकार का मकसद और जमीनी हकीकत अलग-अलग
राष्ट्रीय आयुष मिशन की परिकल्पना थी कि मरीजों को जिला अस्पताल में ही आधुनिक चिकित्सा के साथ आयुर्वेदिक उपचार का विकल्प भी मिले। इससे मरीजों को अलग-अलग स्थानों पर भटकना नहीं पड़ेगा। लेकिन खोवा मंडी के पास तैयार भवन इस उद्देश्य से दूरी बनाता नजर आ रहा है। अब सवाल सिर्फ भवन तैयार होने का नहीं, बल्कि इस बात का है कि क्या मरीजों को वास्तव में एकीकृत चिकित्सा सुविधा मिल पाएगी या उन्हें इलाज के लिए दो जगहों के चक्कर लगाने पड़ेंगे।
छह डॉक्टर, 15 कर्मचारी, अब संचालन का इंतजार
विभागीय योजना के मुताबिक, नए आयुष विंग में छह डॉक्टरों और 15 कर्मचारियों की व्यवस्था की जानी है। भवन तैयार होने के बाद अब डॉक्टरों की पदस्थापना, कर्मचारियों की तैनाती और नियमित संचालन अहम होगा। जब तक पर्याप्त स्टाफ और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं होतीं, तब तक नई बिल्डिंग का पूरा लाभ मरीजों तक पहुंचना मुश्किल रहेगा। हालांकि अभी प्रारंभिक व्यवस्था के तौर पर आयुष विंग में जिला आयुष अधिकारी डॉ. नरेन्द्र पटेल ने डॉ. मनोज कोरी की ड्यूटी लगाई है।
आयुष विंग जो कि अभी तक जिला अस्पताल में चलता था उसे अब खुद की नई बिल्डिंग खोवा मंडी के पास शिफ्ट कर दिया गया है। जिला अस्पताल की ओपीडी के समयानुसार ही आयुष विंग की टाइमिंग होगी।
डॉ. नरेन्द्र पटेल, जिला आयुष अधिकारी

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सतना में राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत खोवा मंडी के पास नया आयुष विंग बनकर तैयार हुआ। अस्पताल से दूरी के कारण मरीजों को आयुर्वेद और एलोपैथी उपचार के लिए अलग-अलग स्थानों पर जाना पड़ेगा।
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