मिडिल ईस्ट युद्ध के कारण पैदा हुए ऊर्जा संकट को देखते हुए केंद्र सरकार ने केरोसिन वितरण के नियमों में 60 दिनों की छूट दी है। अब चुनिंदा पेट्रोल पंपों पर भी मिलेगा मिट्टी का तेल।
By: Ajay Tiwari
Mar 30, 202612:04 PM
नई दिल्ली | स्टार समाचार वेब
पश्चिम एशिया (Middle East) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और इजराइल-ईरान संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल मची हुई है। इस युद्ध की तपिश अब भारतीय रसोई तक पहुँचने लगी है, जिसके कारण देश में पेट्रोल, डीजल और विशेषकर एलपीजी (LPG) की आपूर्ति प्रभावित हुई है। इस आसन्न ऊर्जा संकट से निपटने और आम जनता को राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा और रणनीतिक कदम उठाया है।
पेट्रोलियम मंत्रालय ने पेट्रोलियम सुरक्षा और लाइसेंसिंग नियम, 2002 के कुछ कड़े प्रावधानों में 60 दिनों की अस्थायी ढील देने की घोषणा की है। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य घरों तक केरोसिन (मिट्टी के तेल) की आपूर्ति को सुगम बनाना है ताकि गैस की कमी के दौरान लोग स्टोव पर खाना बना सकें।
सरकार के नए नोटिफिकेशन के अनुसार, अब केरोसिन की उपलब्धता केवल राशन दुकानों (PDS) तक सीमित नहीं रहेगी। देश की प्रमुख सरकारी तेल कंपनियां— इंडियन ऑयल (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL)—अब अपने चुनिंदा पेट्रोल पंपों के माध्यम से भी केरोसिन की बिक्री करेंगी। प्रत्येक जिले में कम से कम दो पेट्रोल पंपों का चयन इस विशेष वितरण के लिए किया जाएगा। चिन्हित पेट्रोल पंपों को अधिकतम 5,000 लीटर तक केरोसिन स्टोर करने की अनुमति दी गई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह तेल केवल घरेलू उपयोग (खाना पकाने और रोशनी) के लिए ही दिया जाएगा। इसका व्यावसायिक उपयोग पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा।
सप्लाई चेन को तेज करने और अंतिम उपभोक्ता तक बिना किसी बाधा के तेल पहुँचाने के लिए सरकार ने निम्नलिखित छूट दी है:
लाइसेंसिंग से मुक्ति: केरोसिन बांटने वाले एजेंटों और डीलरों को अब नए सिरे से जटिल लाइसेंस लेने की आवश्यकता नहीं होगी।
परिवहन में आसानी: टैंकरों से तेल उतारने और लोड करने के नियमों को सरल बनाया गया है।
स्टोरेज नियम: पेट्रोल पंप परिसरों में केरोसिन भंडारण के लिए सुरक्षा मानकों में अस्थायी रियायत दी गई है।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है। मिडिल ईस्ट, जो भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं का बड़ा केंद्र है, वहां युद्ध के कारण सप्लाई लाइन प्रभावित हुई है। घरेलू गैस (LPG) की कमी को देखते हुए केरोसिन को एक बैकअप ईंधन के रूप में पेश किया जा रहा है। हालांकि, सरकार ने हाल ही में कमर्शियल LPG की आपूर्ति में 70% तक सुधार किया है, लेकिन घरेलू उपभोक्ताओं के लिए केरोसिन एक सुरक्षा कवच का काम करेगा।
गौरतलब है कि 2015 के बाद उज्ज्वला योजना और सौभाग्य योजना के बाद भारत ने केरोसिन मुक्त होने की दिशा में कदम बढ़ाए थे। दिल्ली, हरियाणा और चंडीगढ़ जैसे राज्य पहले ही खुद को केरोसिन मुक्त घोषित कर चुके हैं। लेकिन वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों ने सरकार को इस पारंपरिक ईंधन की ओर अस्थायी रूप से लौटने पर मजबूर किया है।