मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर (IPEC) के प्रथम चरण का भूमि-पूजन किया। 2360 करोड़ की लागत वाले इस प्रोजेक्ट से पीथमपुर और इंदौर के बीच कनेक्टिविटी और उद्योगों को मिलेगी नई गति।

इंदौर. स्टार समाचार वेब
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को इंदौर में बहुप्रतीक्षित इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर (IPEC) के प्रथम चरण का भूमि-पूजन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कॉरिडोर केवल एक सड़क मार्ग नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश को देश का अग्रणी 'निवेश गंतव्य' बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। यह परियोजना राज्य में उद्योग, शहरी विकास और विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर को एक साथ जोड़ने की सरकार की दूरगामी रणनीति का हिस्सा है।

यह कॉरिडोर इंदौर एयरपोर्ट के पास स्थित सुपर कॉरिडोर को सीधे पीथमपुर औद्योगिक निवेश क्षेत्र से जोड़ेगा। इस कनेक्टिविटी से न केवल बड़ी औद्योगिक इकाइयों को लाभ होगा, बल्कि लॉजिस्टिक्स और परिवहन की लागत में भी कमी आएगी। यह मार्ग इंदौर और पीथमपुर के बीच एक ऐसी औद्योगिक धुरी (Industrial Axis) तैयार करेगा, जिससे स्थानीय उत्पादों की वैश्विक बाजार तक पहुंच आसान हो जाएगी।
मुख्यमंत्री के अनुसार, इस प्रोजेक्ट से पीथमपुर के टेक्सटाइल, ऑटोमोबाइल और मैन्युफैक्चरिंग हब को एकीकृत कनेक्टिविटी मिलेगी। उत्पादन और वितरण तंत्र मजबूत होने से 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बढ़ावा मिलेगा। इससे न केवल प्रदेश में भारी निवेश आएगा, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के हजारों नए अवसर सृजित होंगे।

भूमि-पूजन कार्यक्रम के दौरान एक अप्रत्याशित घटना भी घटी। मुख्यमंत्री के कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने से कुछ ही समय पहले आयोजन स्थल का मुख्य स्वागत द्वार अचानक धराशायी हो गया। गेट गिरते ही वहां मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई, हालांकि किसी के हताहत होने की सूचना नहीं मिली। प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाते हुए तत्काल क्रेन बुलाकर द्वार को पुनः व्यवस्थित कराया।
कुल लंबाई: सुपर कॉरिडोर से पीथमपुर तक लगभग 20.28 किलोमीटर लंबा मार्ग।
बजट और क्षेत्रफल: इस प्रोजेक्ट के लिए 2360 करोड़ रुपये की लागत तय की गई है, जो 1316 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित होगा।
चौड़ाई और विस्तार: भविष्य की जरूरतों को देखते हुए 75 मीटर चौड़ी मुख्य सड़क और उसके दोनों ओर बफर जोन का प्रावधान किया गया है।
हाइवे कनेक्टिविटी: यह कॉरिडोर NH-47 (इंदौर-अहमदाबाद) और NH-52 (आगरा-मुंबई) के बीच एक सेतु का काम करेगा, जिससे भारी वाहनों को शहर के भीतर आए बिना सीधा रास्ता मिलेगा।

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