मैहर के नादन शासकीय महाविद्यालय तक पक्की सड़क नहीं होने से बारिश में पहुंचना मुश्किल हो गया है। 120 सीटों वाले कॉलेज में अब तक केवल दो प्रवेश हुए, जिससे करोड़ों की परियोजना पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
अक्टूबर 2023 में मैहर को प्रदेश का 55वां नया जिला बनाया गया। उम्मीद जगी थी कि नया जिला बनने के बाद विकास कार्यों को रफ्तार मिलेगी और शिक्षा सहित बुनियादी सुविधाएं मजबूत होगी लेकिन नादन गांव स्थित शा. महाविद्यालय का पहुुंच मार्ग इन दावों की हकीकत बंया कर रहा है।
सरकार ने करीब 5.34 करोड़ रुपए की लागत से महाविद्यालय तो बना दिया लेकिन पक्की सड़क बनाना भूल गए। बारिश शुरू होते ही कॉलेज तक जाने वाला तकरीबन 3 किमी लम्बा कच्चा रास्ता कीचड़ और दलदल में तब्दील हो जाता है। इसे देखकर नव प्रवेषित छात्र नादन महाविद्यालय तक पहुंचने से कतरा जाते हैं।
चालू शैक्षणिक सत्र में अभी तक केवल दो छात्रों ने एडमिशन लिया है। जबकि महाविद्यालय में सीटों की संख्या 120 है। हालांकि प्रवेश न होने व छात्रों की समस्याआें को देखते हुए कॉलेज प्रबंधन ने उच्च अधिकारियों एवं प्रशासनिक अधिकारियों को अवगत कराया है।
दिसम्बर में हैंडओवर हुई थी बिल्डिंग
नादन महाविद्यालय की स्थापना 2017 में हुई थी। आर्ट संकाय से संचालित इस महाविद्यालय को नादन हायर सेकेंडरी स्कूल की चुनिंदा कक्षाओं में संचलित किया गया था। दिसम्बर 2025 में नादन महाविद्यालय की नई बिल्डिंग 5.34 करोड़ की लागत से बन कर हैंडओवर हुई। बताया गया कि पिछले साल 8 विद्यार्थियों ने एडमिशन लिया था जिसमें से कुछ विद्यार्थी पहुंच मार्ग ठीक न होने की वजह से कहीं भी दूसरी जगह एडमिशन ले लिए। बताया जाता है कि छात्रों के साथ-साथ प्राध्यापकों को भी कीचड़ और गडढों से भरा दलदल रास्ता तय करना पड़ता है। कई बार हालात ऐसे बन जाते हैं कि उन्हें जूते-चप्पल हाथ में लेकर आना- जाना पड़ता है।
स्टाफ भी नियमित नहीं
महाविद्यालय में 6 प्राध्यापक हैं जिनमें 3 महिला प्राध्यापक भी शामिल हैं, इनमें केवल एक नियमित स्टाफ है। महाविद्यालय में पढ़ने वाले छात्रों के साथ-साथ ग्रामीणों को भी काफी परेशानी झेलनी पड़ती है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते पक्की सड़क नहीं बनाई गई तो करोड़ों रुपये की यह परियोजना ‘सफेद हाथी’ बनकर रह जाएगी और क्षेत्र के युवाओं का भविष्य प्रभावित होगा।
कॉलेज तक का पहुंच मार्ग कच्चा है जिसकी वजह से बारिश में यह मार्ग दलदल में तब्दील हो जाता है। जिसके चलते छात्र यहां एडमिशन लेने से कतराते हैं। हालांकि मैहर कलेक्टर एवं स्थानीय विधायक ने रोड निर्मित करवाने के संबंध में पत्राचार किया है।
वाचस्पति त्रिपाठी, प्रभारी प्राचार्य, नादन महाविद्यालय

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मैहर के नादन शासकीय महाविद्यालय तक पक्की सड़क नहीं होने से बारिश में पहुंचना मुश्किल हो गया है। 120 सीटों वाले कॉलेज में अब तक केवल दो प्रवेश हुए, जिससे करोड़ों की परियोजना पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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