मध्यप्रदेश सरकार ने 20 अप्रैल अक्षय तृतीया पर होने वाले बाल विवाहों को रोकने के लिए कलेक्टरों को उड़न दस्ते और कंट्रोल रूम बनाने के निर्देश दिए हैं। जानें हेल्पलाइन नंबर्स और पूरी कार्ययोजना।

भोपाल। स्टार समाचार वेब
मध्यप्रदेश में बाल विवाह की कुप्रथा को जड़ से मिटाने के लिए राज्य सरकार ने 'मिशन मोड' में काम शुरू कर दिया है। 20 अप्रैल 2026 को आने वाली अक्षय तृतीया के मद्देनजर, प्रशासन ने कमर कस ली है। महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव जी.वी. रश्मि ने प्रदेश के सभी कलेक्टरों को सख्त निर्देश जारी किए हैं कि इस बार अक्षय तृतीया पर एक भी बाल विवाह नहीं होना चाहिए।
सरकार ने हर जिले में जिला स्तरीय कंट्रोल रूम स्थापित करने और उड़न दस्ते (Flying Squads) बनाने के निर्देश दिए हैं। ये दस्ते विशेष रूप से उन क्षेत्रों में सक्रिय रहेंगे जहाँ सामूहिक विवाह सम्मेलनों का आयोजन किया जा रहा है।
सक्षम दल का गठन: हर गांव और वार्ड में एक विशेष सूचना दल बनाया जाएगा। इसमें शिक्षक, एएनएम (ANM), आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, स्व-सहायता समूह की महिलाएं और पंचायत प्रतिनिधि शामिल होंगे।
सपथ और संकल्प: अक्षय तृतीया के दिन पंचायत और वार्ड स्तर पर सरपंच, सचिव और पार्षद बाल विवाह न होने देने की सार्वजनिक शपथ लेंगे।
किशोरियों की मैपिंग: आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ता 18 वर्ष से कम उम्र की किशोरियों की सूची तैयार कर उनके परिवारों की विशेष काउंसलिंग करेंगी।
सरकार इस अभियान को केवल प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि इसे एक जन आंदोलन बनाने की तैयारी है:
स्कूल-कॉलेज: विद्यार्थियों को बाल विवाह के शारीरिक, मानसिक और कानूनी दुष्परिणामों के बारे में शिक्षित किया जाएगा।
रैलियां: बच्चों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा जागरूकता रैलियां निकाली जाएंगी।
प्रचार-प्रसार: सोशल मीडिया, व्हाट्सएप ग्रुप, वॉल पेंटिंग (दीवार लेखन) और स्थानीय मीडिया के जरिए "सही उम्र में विवाह" का संदेश घर-घर पहुँचाया जाएगा।
यदि आपको कहीं भी बाल विवाह की सूचना मिलती है, तो आप तुरंत इन माध्यमों का उपयोग कर सकते हैं:
CM हेल्पलाइन: 181
चाइल्ड हेल्पलाइन: 1098
इमरजेंसी नंबर: 112
ऑनलाइन पोर्टल: बाल विवाह मुक्त भारत पोर्टल
NFHS-5 के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में बाल विवाह के मामलों में कमी जरूर आई है, लेकिन लक्ष्य 'शून्य' (Zero) का है। किशोरियों का सशक्तिकरण तभी संभव है जब उन्हें सही उम्र में शिक्षा और स्वास्थ्य का अधिकार मिले।
सचिव ने कहा- जी.वी. रश्मि

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