रीवा के श्याम शाह मेडिकल कॉलेज में सीनियर रेसीडेंट पदों के विभागवार स्थानांतरण को लेकर विवाद गहरा गया है। मरीजों की जरूरत वाले विभागों से पद हटाने और चहेतों को लाभ पहुंचाने के आरोपों ने नई बहस छेड़ दी है।

हाइलाइट्स:
रीवा, स्टार समाचार वेब
श्याम शाह मेडिकल कॉलेज में सीनियर रेसीडेंट के पदों का खेल चल रहा। जिस विभाग में सबसे अधिक मरीज पहुंच रही। जहां लंबी लाइनें हैं, वहीं पर आरएस के पद गायब हो रहे। इन पदों पर चहेतों को लाया जा रहा। इन पदों का भी सौदा हो रहा। सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के कई विभागों के एसआर पदों को भी खाली करने की तैयारी चल रही है। इन पदों को भी स्थानांतरित करने का प्रस्ताव भोपाल भेजा गया है। आपको बता दें कि मेडिकल की पढ़ाई में एमबीबीएस के बाद एक साल सरकारी अस्पताल या फिर ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा देना अनिवार्य है। इसी तरह पीजी के बाद भी एक साल सेवाएं देना अनिवार्य है। पहले ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा देने की बाध्यता था। अब थोड़ी सरकार ने इसमें रियायत दे दी है। अब जिस कॉलेज से पीजी छात्र करते हैं। वहीं से सीनियर रेसीडेंट के पद पर काम करने का इन्हें प्राथमिकता के साथ मौका दिया जाता है। पहले उसी कॉलेज से पढ़ने वालों को पदस्थ किया जाता है। यदि सीट बचती है तो बाहरी छात्रों को मौका देते हैं। श्याम शाह मेडिकल कॉलेज में सीनियर रेसीडेंट के पदों का ही अब सौदा होने लगा है। इन पदों को मेडिकल कॉलेज प्रबंधन अपने हिसाब से इधर से उधर कर फायदा उठा रहे हैं। अपने चहेतों को रीवा मेडिकल कॉलेज में लाने के लिए सीटों का सौदा तक कर रहे हैं। कई विभागों के सीनियर रेसीडेंसी के पद गायब हो गए हैं। अब इनकी नजर सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के सीनियर रेसीडेंसी के पदों पर गड़ गई है। उन्हें भी शासन से स्वीकृति के बाद दूसरे विभागों में स्थानांतरित करने की कोशिशें शुरू हो गई हैं।
किस-किस विभाग में घटाई और बढ़ाई गई सीट
सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के चार विभागों से पद स्थानांतरित करने की तैयारी
पॉवर का कर रहे दुरुपयोग
अभी तक सिर्फ एमबीबीएस प्रवेश परीक्षा में ही धांधलियां हुर्इं। अब नया मामला सीनियर रेसीडेंट के स्थानांतरण का भी सामने आ रहा है। श्याम शाह मेडिकल कॉलेज में सीनियर रेसीडेंट को चहेतों के लिए इधर से उधर किया जा रहा है। एसआर के पदों पर नियुक्ति के लिए वेकंसी निकाली जाती है। आवेदन मांगा जाता है। इसके लिए स्थानीय कॉलेज के अलावा बाहरी कॉलेज में पढ़ने वाले पीजी के छात्र आवेदन करते हैं। ऐसे में जिनका नंबर नहीं लग पाता। वह प्रबंधन से सीधे सांठगांठ कर पदों का इंतजाम कराने में सफल हो जाते हैं।
वर्ष 2017 में आया था आदेश, तब से बदल रहे विभाग
मेडिकल काउंसिल आॅफ इंडिया ने वर्ष 2017 में एक सर्कलर जारी किया था। इसें डीन को जेआर, एसआर की सीट घटाने और बढ़ाने का पॉवर दे दिया था। डीन स्वेच्छानुसार सीट घटा और बढ़ा सकते हैं। इसी का अब डीन फायदा उठा रहे हैं। अब इसी के हिसाब से एसआर और जेआर की सीटों को स्थानांतरित कर भरा जा रहा है। जिसकी जैसी सांठगांठ होती है, वैसे ही पदों को इधर उधर कर भर दिया जाता है। रीवा मेडिकल कॉलेज में कई एसआर के पदों पर सालों से डॉक्टर बने हुए हैं।

रीवा के संजय गांधी अस्पताल में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट महीनों से प्रभावित होने के बावजूद ठेकेदार को भुगतान की तैयारी के आरोप लगे हैं। ड्रेनेज पाइप क्षतिग्रस्त होने के बाद भी बिल पास कराने की कोशिशों पर सवाल खड़े हुए हैं।
मानसून और संभावित बाढ़ को देखते हुए रीवा संभाग के कमिश्नर ने बाणसागर बांध के डूब प्रभावित क्षेत्रों को 15 जून तक खाली कराने के निर्देश दिए। सभी जिलों को कंट्रोल रूम, राहत शिविर और आपदा प्रबंधन तैयारियां पूरी करने को कहा गया।
ग्रीष्मकालीन भीड़ को देखते हुए रेलवे ने रीवा-चर्लपल्ली समर स्पेशल ट्रेन चलाने का निर्णय लिया है। यह ट्रेन चार फेरों तक रानी कमलापति स्टेशन के रास्ते चलेगी, जिससे यात्रियों को अतिरिक्त यात्रा सुविधा मिलेगी।
रीवा के श्याम शाह मेडिकल कॉलेज में सीनियर रेसीडेंट पदों के विभागवार स्थानांतरण को लेकर विवाद गहरा गया है। मरीजों की जरूरत वाले विभागों से पद हटाने और चहेतों को लाभ पहुंचाने के आरोपों ने नई बहस छेड़ दी है।
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पन्ना-खजुराहो रेल परियोजना में पहले 54,578 पेड़ों की कटाई के बाद अब नए एलाइनमेंट से 50 हजार और पेड़ों पर खतरा मंडरा रहा है। दूरी, लागत और पर्यावरणीय नुकसान को लेकर रेलवे की योजना सवालों के घेरे में है।
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