नागौद के रौंड तेंदूपत्ता फड़ के बंद होने से 67 मजदूरों की आजीविका प्रभावित हुई है। वन विभाग पर शिकायत दबाने और सीएम हेल्पलाइन में भ्रामक जानकारी देकर मामले की लीपापोती करने के आरोप लगे हैं।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
सतना जिले के नागौद विकासखंड अंतर्गत सिंहपुर वन परिक्षेत्र के रौंड तेंदूपत्ता फड़ को लेकर विवाद गहरा गया है। वन विभाग के स्थानीय अमले और ठेकेदार की कथित मनमानी के कारण यह फड़ पिछले कई दिनों से बंद पड़ा है। इसके चलते इस सीजन में फड़ पर काम करने वाले करीब 67 आदिवासी और ग्रामीण मजदूरों के सामने अचानक आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। दूसरी ओर, इस मामले को दबाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर लीपापोती के आरोप भी सामने आ रहे हैं। शिकायतकर्ता संजय शुक्ला का आरोप है कि वन विभाग के अधिकारियों ने सीएम हेल्पलाइन में दर्ज शिकायत को जबरन बंद कराने के उद्देश्य से अपने जांच प्रतिवेदन में भ्रामक और तथ्यहीन जानकारियां प्रस्तुत की हैं, जो जमीनी हकीकत से पूरी तरह परे हैं।
लाखों गड्डियों का उठाव, फिर भी काम ठप
प्राथमिक लघु वनोपज सहकारी समिति शिवराजपुर के अंतर्गत रौंड फड़ संचालित होता है। इस वर्ष (सीजन 2026-27) फड़ मुंशी अमिता बाई पांडेय के माध्यम से क्षेत्र के संग्रहकर्ताओं से लगभग 1 लाख 25 हजार गड्डी तेंदूपत्ता का संग्रहण कराया गया था। आरोप है कि संग्रहण कार्य पूरा होने के बाद शुरूआत में ठेकेदार द्वारा पत्तों का उठाव (परिदान) करने से साफ मना कर दिया गया। जब संग्रहकर्ताओं और मजदूरों ने इसका विरोध किया और मामले की शिकायतें कीं, तो दबाव में आकर विभाग ने पत्तों का उठाव तो करवा लिया, लेकिन फड़ को दोबारा सुचारू रूप से चालू नहीं किया। इसके बाद से ही मजदूर काम से वंचित हैं।
क्या थी सीएम हेल्पलाइन की शिकायत?
शिकायतकर्ता संजय शुक्ला ने हेल्पलाइन में दर्ज शिकायत में कहा था कि वन विभाग के अधिकारियों की लापरवाही के कारण तेंदूपत्ते की समय पर गिनती नहीं की जा रही है। इससे गरीब संग्रहकतार्ओं और मजदूरों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने इस पूरे तंत्र की निष्पक्ष जांच और मजदूरों के भुगतान को लेकर शीघ्र निराकरण की मांग की थी।
कागजों पर 'दो दिन' का निलंबन हकीकत में हफ्तों से ताला
शिकायत के बाद वन विभाग ने जो आधिकारिक जवाब और निराकरण प्रतिवेदन प्रस्तुत किया है, वह विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। विभाग की ओर से कहा गया है कि चालू सीजन में रौंड फड़ से खराब और गुणवत्ताहीन तेंदूपत्ता आने की शिकायत समिति के पालक अधिकारी और क्रेता प्रतिनिधि ने की थी। इस शिकायत के आधार पर जिला वनोपज यूनियन सतना के प्रबंध संचालक ने जांच के निर्देश दिए।उप वन मंडल अधिकारी ने 21 मई 2026 को फड़ का औचक निरीक्षण किया और कमियां पाए जाने पर फड़ को आगामी आदेश तक मात्र दो दिन के लिए बंद रखने की कार्रवाई की थी।
जांच की मांग पर अड़े ग्रामीण
विभाग के इस दावे को शिकायतकर्ता और स्थानीय मजदूरों ने पूरी तरह झूठा करार दिया है। संजय शुक्ला का कहना है कि फड़ दो दिन नहीं बल्कि कई दिनों से लगातार बंद है और आज भी वहां सन्नाटा पसरा हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी केवल अपनी कमियों को छिपाने और शिकायत को 'स्पेशल क्लोज' (विशेष श्रेणी में बंद) कराने के लिए कागजी खेल खेल रहे हैं।


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