RSS ने शताब्दी वर्ष में सांगठनिक बदलाव करते हुए मध्य प्रदेश के तीन प्रांतों को खत्म कर 9 नए संभाग बनाने का फैसला लिया है। जानें पूरे प्रदेश का नया स्ट्रक्चर और किसे मिलेगी कमान।

भोपाल/इंदौर। स्टार समाचार वेब
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) अपने शताब्दी वर्ष के अवसर पर संगठन के ढांचे में क्रांतिकारी बदलाव करने जा रहा है। संघ ने मध्य प्रदेश में वर्षों से चली आ रही 'प्रांत' व्यवस्था (मालवा, मध्यभारत और महाकौशल) को समाप्त करने का निर्णय लिया है। अब पूरे प्रदेश की कमान एक 'प्रदेश प्रचारक' के हाथ में होगी, जबकि मैदानी स्तर पर कार्य संचालन के लिए 9 नए संभाग बनाए जाएंगे।
प्रतिनिधि सभा की बैठक में लिए गए इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य संगठन को अधिक चुस्त-दुरुस्त और युवाओं के अनुकूल बनाना है। संघ का मानना है कि इस बदलाव से जिला स्तर के कार्यकर्ताओं का सीधा संपर्क शीर्ष नेतृत्व से होगा, जिससे निर्णय लेने की प्रक्रिया में तेजी आएगी। शताब्दी वर्ष को “युवा शक्ति और सांगठनिक विस्तार” के संकल्प के साथ जोड़ा जा रहा है।
नई व्यवस्था के तहत प्रदेश में 9 प्रमुख शहरों को संभागीय केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा:
इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, उज्जैन, जबलपुर, रीवा, सागर, खंडवा और नर्मदापुरम। इन केंद्रों से न केवल संबंधित जिलों की मॉनिटरिंग होगी, बल्कि 30-30 पदाधिकारियों की एक मजबूत कार्यकारी टीम भी तैनात की जाएगी।
एक प्रदेश प्रचारक: अभी तक मध्य प्रदेश तीन अलग-अलग प्रांतों (राजमोहन-मालवा, विमल गुप्ता-मध्यभारत, ब्रजकांत चतुर्वेदी-महाकौशल) में बंटा था। अब पूरे राज्य के लिए केवल एक मुख्य प्रचारक होगा।
विभाग से संभाग की ओर: वर्तमान 'विभाग प्रचारकों' की भूमिका अब 'संभागीय प्रचारक' के रूप में परिवर्तित हो जाएगी।
वरिष्ठों को नई भूमिका: जिन प्रांत प्रचारकों की जगह बदलेगी, उन्हें अखिल भारतीय स्तर पर या संघ के अनुषांगिक संगठनों (जैसे विद्या भारती, विश्व हिंदू परिषद आदि) में महत्वपूर्ण दायित्व सौंपे जा सकते हैं।

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