सतना के शासकीय मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने महंगे उपकरणों के बिना 80 रुपये के फोलिस कैथेटर से 68 बच्चों की आहार नली में फंसे सिक्के निकालकर चिकित्सा क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की। भोपाल में हुए राष्ट्रीय शिशु रोग सम्मेलन में इस शोध को प्रथम पुरस्कार मिला।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
भोपाल में हुई शिशु रोग विशेषज्ञों की वार्षिक सम्मेलन के सतना जिले में हुई बच्चों की शोध को पहला पुरुस्कार दिया गया है। जिले से शासकीय मेडिकल कॉलेज के पीडियाट्रिक डा. प्रभात सिंह एवं डा. संजीव प्रजापति को पुरस्कार के साथ सम्मान से भी नवाजा गया। बताया गया कि शिशु रोग विशेषज्ञों का वार्षिक सम्मेलन भोपाल में 12 से 14 दिसम्बर तक आयोजित किया गया था। इसमें देश भर से आए 700 शिशु रोग विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया था। सतना के जिला अस्पताल और यस हास्पिटल में की गई इस रिसर्च को कांफ्रेंस में डा. प्रभात सिंह बघेल द्वारा प्रस्तुत किया गया और सतना की इस शोध को पहला स्थान मिला।
पहले रेफर करना पड़ता था हायर सेंटर
डा. प्रभात सिंह ने बताया कि करीब ढाई वर्ष पहले जब उन्होंने सतना मेडिकल कॉलेज ज्वाइन किया था तब बच्चों की आहार नली में सिक्के फंसने वाले केस आते थे, विभाग में पीडियाट्रिक एंडोस्कोप एवं गैसट्रो विभाग न होने के कारण बच्चों को हायर सेंटर रेफर करना पड़ता था। चूंकि सिक्का निकालने के लिए प्रयोग की जाने वाली एंडोस्कोपी की कीमत लगभग 15 लाख के आसपास आती है। बच्चों के आहार नली में सिक्का फंसने के कारण बच्चों को काफी दर्द, उल्टी जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं। बिना मशीन के ऐसी परिस्थितियों का सामना करना बड़ा मुश्किल हो जाता है। उन्होंने बताया कि ऐसी परिस्थितियों को देखते हुए शिशु रोग विशेषज्ञ डा. संजीव प्रजापति से चर्चा की गई और वार्ड में आसानी से मिलने वाले फोलिस कै थेटर के जरिए सिक्का निकलने की कोशिश शुरू की गई जो कि काफी सफल रही।
स्वास्थ्य संस्थाओं में दी जाएगी जानकारी
डा. प्रभात सिंह ने बताया कि जिला अस्पताल एवं निजी अस्पतालों में इस कैथेटर के जरिए 68 बच्चों के आहार नली में फंसे सिक्कों को अब तक निकाला जा चुका है। इस रिसर्च को दूसरे देश के डाक्टरों को भी बताने के लिए इस विषय पर शोध किया गया। शोध पत्र बनाकर भोपाल में हुई शिशु रोग विशेषज्ञ कांफ्रेंस में पेश किया गया जिसमें देश के जाने-माने डाक्टरों द्वारा सतना में हुए इस शोध को सराहा गया और पहले प्रथम पुरस्कार से नवाजा गया। डा. सिंह ने बताया कि अब इस शोध को जिले की छोटी-छोटी स्वास्थ्य संस्थाओं में भी बताया जाएगा ताकि आसानी से बच्चों के आहार नली में फंसे सिक्के एवं अन्य चीजों को आसानी से बाहर निकाला जा सके।

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