सतना में वन विभाग की रेस्क्यू टीम को प्रतिदिन मिलने वाली कई कॉल फर्जी साबित हो रही हैं। अधिकारियों ने चेताया कि झूठी सूचनाएं वास्तविक आपात स्थितियों में राहत कार्य में देरी और जोखिम बढ़ा सकती हैं।

हाईलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
वन विभाग की रेस्क्यू टीम जिस समय किसी की जान बचाने निकलती है उसी समय कुछ लोग उसे झूठी सूचनाओं में उलझा रहे हैं। कुछ दिनों से सामने आए मामलों ने दिखाया कि फर्जी कॉल अब सिर्फ शरारत नहीं बल्कि ऐसी लापरवाही बन गई है जो किसी वास्तविक रेस्क्यू में देरी और बड़े हादसे की वजह भी बन सकती है।
बारिश के मौसम में सांप और अन्य वन्यजीवों के आबादी वाले क्षेत्रों में निकलने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। ऐसे समय में सतना वन मंडल की रेस्क्यू टीम 24 घंटे अलर्ट रहती है। किसी भी सूचना पर बिना देर किए टीम मौके के लिए रवाना हो जाती है क्योंकि यह पहले से तय नहीं किया जा सकता कि सूचना कितनी गंभीर है। लेकिन अब टीम के सामने नई चुनौती फर्जी कॉल बनकर उभरी है। कुछ दिनों से टीम को जो रेस्क्यू कॉल प्राप्त हुईं। इनमें से दो तिहाई कॉल ऐसी निकल रहीं हैं जिनमें मौके पर पहुंचने के बाद कोई रेस्क्यू करने की स्थिति ही नहीं थी। यानी टीम का यह समय गलत सूचनाओं में खर्च हो गया। हर कॉल को गंभीरता से लेना पड़ता है। रेस्क्यू टीम के सदस्य बताते हैं कि उनके लिए हर कॉल संभावित आपात स्थिति होती है। कई बार जहरीले सांप घरों में घुस जाते हैं और लोगों की जान खतरे में पड़ सकती है। इसलिए सूचना मिलते ही टीम बिना सत्यापन का इंतजार किए मौके पर रवाना होती है। इसी जिम्मेदारी का फायदा उठाकर कुछ लोग मजाक या शरारत के लिए झूठी सूचनाएं दे रहे हैं।
औसतन 20 कॉल रोजाना
वन विभाग के अनुसार रेस्क्यू टीम को प्रतिदिन औसतन 20 कॉल प्राप्त होती हैं। अधिकांश मामलों में टीम सफलतापूर्वक सांप या अन्य वन्यजीवों का सुरक्षित रेस्क्यू करती है, लेकिन लगातार बढ़ती फर्जी कॉल अब टीम की कार्यक्षमता पर असर डाल रही हैं। एक झूठी सूचना पर टीम के पहुंचने तक वाहन, ईंधन, उपकरण और प्रशिक्षित कर्मचारियों का समय खर्च होता है।
पहला मामला : विषखोपड़ा निकला ही नहीं
नई बस्ती क्षेत्र से सूचना मिली कि एक विषखोपड़ा घर के भीतर घुस गया है। सूचना मिलते ही रेस्क्यू टीम आवश्यक उपकरणों के साथ मौके पर पहुंची। टीम ने पूरे परिसर की तलाशी ली लेकिन न विषखोपड़ा मिला और न ही सूचना देने वाला व्यक्ति। आसपास पूछताछ के बाद भी शिकायतकर्ता का पता नहीं चला और टीम को खाली हाथ लौटना पड़ा।
दूसरा मामला : फोन पर घुमाता रहा कॉलर
दूसरी घटना शेरगंज मोहल्ले की है। यहां एक व्यक्ति ने घर में सांप होने की सूचना दी। टीम मौके पर पहुंची तो फोन करने वाला व्यक्ति बार-बार अलग-अलग स्थान बताता रहा। काफी देर तक टीम इधर-उधर भटकती रही, लेकिन न सांप मिला और न ही सही स्थान की जानकारी। अंतत: यह सूचना भी फर्जी साबित हुई।
असली खतरा कहीं और..
सबसे गंभीर बात यह है कि यदि टीम किसी फर्जी कॉल में उलझी हो और उसी समय जिले के किसी अन्य हिस्से से वास्तविक रेस्क्यू की सूचना आ जाए तो वहां पहुंचने में देरी हो सकती है। ऐसी स्थिति में किसी व्यक्ति की जान भी जोखिम में पड़ सकती है। यही वजह है कि वन विभाग लोगों से केवल वास्तविक स्थिति में ही रेस्क्यू टीम को सूचना देने की अपील कर रहा है।
वन्यजीव दिखे तो घबराएं नहीं
अधिकारियों ने नागरिकों से कहा है कि यदि घर या आसपास सांप अथवा अन्य वन्यजीव दिखाई दे तो घबराएं नहीं, उसे छेड़ने का प्रयास न करें और सही पता व सही जानकारी के साथ रेस्क्यू टीम को सूचना दें। मजाक या झूठी सूचना देकर सरकारी सेवा का दुरुपयोग न करें, क्योंकि एक फर्जी कॉल किसी दूसरे जरूरतमंद तक मदद पहुंचने में देरी का कारण बन सकती है।


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