सतना और मैहर जिलों में आयुष्मान भारत योजना के तहत 70 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के हजारों बुजुर्ग अब भी मुफ्त इलाज से वंचित हैं। धीमी प्रगति, तकनीकी बाधाएं और प्रशासनिक लापरवाही के कारण योजना का लाभ जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच पा रहा है, जिससे स्वास्थ्य सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
जिस उम्र में सहारे की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, उसी उम्र के लोग सिस्टम की सबसे लंबी उपेक्षा झेल रहे हैं। आयुष्मान भारत योजना के तहत 70 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में सतना और मैहर जिले की रफ्तार न सिर्फ़ धीमी है, बल्कि चिंताजनक भी है। सतना जिले में 77,442 पात्र वरिष्ठ नागरिकों के मुकाबले अब तक सिर्फ़ 29,389 आयुष्मान कार्ड ही बन पाए हैं। यानी 62 प्रतिशत से ज्यादा बुजुर्ग आज भी इलाज के सरकारी सुरक्षा कवच से बाहर हैं। यह आंकड़ा महज प्रतिशत नहीं, बल्कि हजारों परिवारों की असुरक्षा की कहानी कहता है। विकासखंडवार हालात और भी सवाल खड़े करते हैं। नागौद 46.77 प्रतिशत के साथ सबसे आगे है, लेकिन नगर निगम क्षेत्र में स्थिति सबसे खराब है, यहां सिर्फ़ 27.91 प्रतिशत कार्ड ही बन सके हैं। उचेहरा 29.18 प्रतिशत, सोहावल कोठी 38.85 प्रतिशत और रामपुर बघेलान 41.91 प्रतिशत के साथ अभी भी भी लक्ष्य से कोसों दूर हैं।
अन्य श्रेणियों में भी आधा-अधूरा काम
धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष योजना में 83,354 के लक्ष्य के विरुद्ध 41,542 कार्ड बने हैं जिसकी उपलब्धि मात्र 49.84 प्रतिशत ही मिली। भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल श्रेणी में 52.88 प्रतिशत उपलब्धि दर्ज की गई। यहां 72 हजार 363 के लक्ष्य के मुकाबले 38 हजार 267 कार्ड बनाकर 52.88 प्रतिशत उपलब्धि हासिल की गई। नगर परिषदों में भी असमानता देखने को मिली है जानकारी के अनुसार नगर परिषद नागौद 77.52 प्रतिशत पर अव्वल नंबर पर है जबकि चित्रकूट नगर परिषद सिर्फ़ 34.87 प्रतिशत प्रगति दर्ज हुई।
मैहर भी पीछे, महज 39.06 प्रतिशत प्रगति दर्ज
मैहर जिले में भी हालात बेहतर नहीं हैं। मैहर में 70 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में 38,688 के लक्ष्य के मुकाबले केवल 15,113 कार्ड बने हैं। यहां महज 39.06 प्रतिशत प्रगति दर्ज हुई है। इसी प्रकार अमरपाटन में 32.81 प्रतिशत और रामनगर में 33.75 प्रतिशत की प्रगति रही जो कि बेहद कमजोर है, जबकि मैहर ब्लॉक 45.34 प्रतिशत के साथ थोड़ा बेहतर है। धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष योजना में जिले ने 16,409 के लक्ष्य के विरुद्ध 11,544 कार्ड बनाकर 70.35 प्रतिशत उपलब्धि दर्ज की है। भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल श्रेणी में जिले ने 60,869 के लक्ष्य में से 37,273 कार्ड बनाकर 61.23 प्रतिशत उपलब्धि हासिल की है। सवाल अब भी कायम है। योजना कागजों में है, बजट मौजूद है, निर्देश जारी हैं तो फिर इलाज का हक बुजुर्गों तक पहुंच क्यों नहीं पा रहा? अब प्रशासन के सामने सिर्फ़ लक्ष्य पूरा करने की नहीं, बल्कि विश्वास लौटाने की भी चुनौती है।
कई ब्लाकों में कार्यरत आशाओं की आईडी डिएक्टिव हो गई है। 31 दिसंबर तक कई आइडियों को एक्टिवेट कराया गया है, लेकिन बंद आईडी अब दोबारा नहीं शुरू होंगी। एक ही आईडी से मल्टीपल कार्य करने के निर्देश हैं, लेकिन तकनीकी समस्या के कारण यह भी नहीं हो रहा है। प्रयाश है कि जल्द लक्ष्य को पूरा किया जाए।
डॉ. मनोज शुक्ला, सीएमएचओ


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