सतना और मैहर के शहरी क्षेत्रों में खराब हवा और पानी के कारण टीबी के मामलों में तेजी आई है। 2026 के शुरुआती तीन महीनों में 938 केस सामने आए, जबकि कुल मरीजों का आंकड़ा 2000 पार पहुंचा।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
ग्रामीण क्षेत्रों के मुकाबले शहरी क्षेत्र के लोगों की प्रतिरोधक क्षमता कम हो रही है। जिसका का कारण शहर का हवा और पानी है। इन दोनों के चलते फेफड़े में इंफेक्शन देखा जा रहा है। जो लोगों को टीबी की चपेट में ला रहा है। आंकड़ों पर गौर करें तो शहरी क्षेत्र में सतना और मैहर में 2 हजार से अधिक मरीज टीबी से ग्रसित पाए गए हैं। वर्ष 2026 में तीन माह के दौरान सतना मैहर जिले में 938 मामले क्षय रोग से सम्बंधित सामने आए हैं। चिकित्सकों की मानें तो 40 फीसदी लोगों के शरीर में टीबी के कीटाणु पाए जाते हैं। जिन लोगों की प्रतिरोधक क्षमता कम होती है उन्हें यह जल्दी शिकार बनाता है। चिंता का विषय यह है कि इन दिनों शहरी क्षेत्र में टीबी के पेसेंट अधिकाशत: मिल रहे हैं। यह बैक्टीरिया खांसने, छींकने के दौरान एक से दूसरे के शरीर में भी प्रवेश कर जाते हैं। हालांकि टीबी अब जानलेवा बीमारी नहीं है, इस बीमारी का इलाज जिला अस्पतालों में संभव है।
279 पंचायतों ने किया टीबी मुक्त होने का दावा
राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम अन्तर्गत जिले की 279 ग्राम पंचायतों ने टीबी मुक्त होने का दावा पेश किया है। दावे के सत्यापन के लिए कमेटी बनाई गई है जिसमें जिला अस्पताल व मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक शामिल हैं। पंचायतों द्वारा टीबी मुक्त होने के लिए क्लेम किया है। इनमें अमरपाटन की 44, मैहर की 49, देवराजनगर की 24, उचेहरा की 16, नागौद की 31, कोठी की 49, मझगवां की 17 एवं रामपुर बाघेलान की 49 ग्राम पंचायतें शामिल हैं।
12 माह में टीबी के 4604 नए केस
जिले में टीबी रोगियों की संख्या में लगातार इजाफा देखने को मिल रहा है। आंकड़े चिंताजनक हो गए हैं। हर माह 50 से अधिक मरीज वहीं हर दिन 6 मरीज टीबी रोगी मिल रहे हैं। विभाग की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 में जनवरी से दिसम्बर के बीच सतना- मैहर जिले में 4604 टीबी के पेसेंट खोजे गए। इनमें से सरकारी स्वास्थ्य संस्थाओं में 3289 मरीज खोजे गए जबकि निजी संस्थाओं में 1315 मरीज मिले। चिंता की बात यह है कि गांवों के मुकाबले शहरी क्षेत्र में टीबी के रोगी सर्वाधिक मिल रहे हैं। नए मरीज मिलने के मामले में सबसे खराब पोजीशन सतना शहरी क्षेत्र की है। जहां साल भर में 1979 क्षय रोगी मिले। इनमें 988 रोगी जिला अस्पताल में स्क्रीनिंग के दौरान खोजे गए जबकि 991 मरीज निजी अस्पतालों में चिन्हित हुए। वहीं मैहर शहरी क्षेत्र में 693 क्षय रोगी मिले हैं।
ये सही है कि शहरी क्षेत्र में क्षय रोगी ज्यादा मिल रहे हैं। जिला अस्पताल कि ओपीडी में रोजाना 60 से 70 मरीज फेफड़े की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं जिसमे से 6 से 7 मरीजों में टीबी की पुष्टि भी हो रही है। घनी और स्लम बस्तियों में टीबी जैसी बीमारी फैलने का खतरा ज्यादा होता है। शहर में वायु प्रदुषण के चलते लोगों के फेफड़े कमजोर हो रहे हैं जबकि फैक्ट्री और धुआं में कार्य करने वाले लोगों में टीबी के चांस बढ़ जाते हैं। जिला अस्पताल में आने वाले संदिग्धों की पहले स्क्रीनिंग की जाती है पुष्टि होने पर इलाज शुरू किया जाता है।
डॉ. मनोज सिंह तोमर, क्षय रोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल
किस ब्लाक में कितने रोगी
कुल: 4604


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