सतना जिला अस्पताल की दोनों प्लेटलेट्स मशीनें एक सप्ताह से खराब हैं। भोपाल से आए इंजीनियर भी मशीन सुधारने में नाकाम रहे, अब दिल्ली से टेक्नीशियन आएंगे। इस तकनीकी गड़बड़ी का फायदा निजी अस्पताल उठा रहे हैं, जहाँ मरीजों से तय दर से ज्यादा वसूली हो रही है।

हाइलाइट्स
सतना, स्टार समाचार वेब
जिला अस्पताल में संचालित ब्लड बैंक की प्लेटलेट्स मशीन खराब होते ही निजी अस्पतालों की चांदी हो गई। जिला अस्पताल में भर्ती मरीज के परिजन प्लेटलेट्स खरीदने दर-दर भटकने को मजबूर हो रहे हैं। जिले के कई बड़े अस्पतालों में महंगी दर पर प्लेटलेट्स, प्लाजमा और पैकसेल की कालाबाजारी चालू हो गई है। जिला अस्पताल प्रबंधन द्वारा मंगलवार को भी एक मशीन चालू करने के लिए इंजीनियर को भोपाल से बुलाया था लेकिन बात नहीं बनी। बताया गया कि अब दिल्ली से ही टेक्नीशियन आयंगे वो ही प्लेटलेट्स मशीन को सुधार पाएंगे। उल्लेखनीय है कि जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में स्थापित प्लेटलेट्स सेपरेटर और सेंट्रीफूग रेफ्रिजरेटेड यूनिट बीते एक सप्ताह से खराब पड़ी हुई हैं, जिसके चलते मरीजों को समस्याओं का सामना करना पड रहा है।
एओबी के इंजीनियर को नहीं समझ आई मशीन
मंगलवार को अस्पताल के सभी इक्यूपमेंट सुधारने का ठेका लेने वाली एओबी कंपनी के इंजीनियर को प्लेटलेट्स सेपरेटर मशीन को सुधारने के लिए भोपाल से बुलाया गया था। उन्हें कहा गया था कि प्लेटलेट्स सेपरेटर या सेंट्रीफ्यूज रेफ्रिजरेटेड दोनों में से किसी एक मशीन को सुधार दें , ताकि मरीजों को कुछ राहत मिले। दोनों में से एक मशीन भी चालू हो जाएगी तो ब्लड से प्लेटलेट्स आदि बनना चालू हो जायेंगे। सुबह से लगे इंजीनियरों ने मशीन सुधारने की बड़ी कोशिशें की लेकिन असमर्थ रहे और चले गए। बताया गया कि इसके बाद जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में स्थापित प्लेटलेट्स मशीन के वेंडर रेमी से बात की गई जिस पर उन्होंने बुधवार को दिल्ली से टेक्नीशियन को भेजने के लिए कहा है।
लग रही है पेनाल्टी
प्लेटलेट्स मशीन के वेंडर को रोजाना पेनल्टी भी लगाई जा रही है। इसके बाद भी वो इंजीनियर उपलब्ध नहीं करा पा रही। बताया गया कि रोजाना पर इंस्ट्रूमेंट्स के हिसाब से 2000 रुपए की पेनल्टी लगाई जा रही है। यह पेनल्टी अवधि मशीन बंद होने के 36 घंटे बाद से शुरू कर दी गई थी।
रोजाना 30 यूनिट तक प्लेटलेट्स की डिमांड
जिला अस्पताल के ब्लड बैंक इंचार्ज दो. देवेंद्र सिंह ने बताया कि इस बरसाती मौसम में सबसे ज्यादा प्लेटलेट्स की डिमांड आ रही है। जिला अस्पताल और निजी अस्पताल को मिलकर रोजाना 30 यूनिट प्लेटलेट्स की मांग बनी हुई है। जिले में संक्रामक बीमारियों का ग्राफ बढ़ने के कारण वर्तमान में अकेले जिला अस्पताल में भर्ती 10 से 15 मरीजों को प्लेटलेट्स चढाने की सलाह दी जा रही है। उन्होंने बताया कि जिला अस्पताल में भर्ती मरीज को यह सब नि:शुल्क उपलब्ध होता है लेकिन निजी अस्पतालों में इसकी प्रोसेसिंग चार्ज लिए जाते हैं। सरकार की तरफ से इन सबकी दरें तय की गई हैं, जैसे प्लेटलेट्स का 300 रुपए, पैकसेल का 1050 रुपए शुल्क लिया जाता है। अगर किसी ब्लड ग्रुप का प्लेटलेट्स उपलब्ध नहीं है तो परिजन को ब्लड भी देना पड़ेगा जिससे की प्लेटलेट्स अलग किया जा सके। शहर के कई निजी अस्पताल में ब्लड देने के बाद परिजन को प्लेटलेट्स ही दिया जा रहा है जबकि ब्लड को रख लिया जाता है जो निजी अस्पतालों के काम आ जाता है।
सरकार की तरफ से ब्लड और ब्लड से संबंधित प्लेटलेट्स, प्लाजमा एवं पैकसेल के प्रोसेसिंग चार्जेस तय किये गए हैं। निजी अस्पतालों में तय दर से ज्यादा चार्ज लेने पर जांच कर कार्रवाई की जाएगी। सिकिल सेल, थैलीसीमिया और सीवियर एनिमिक आदि गंभीर बीमारियों के लिए सभी शासकीय अस्पतालों में ब्लड और प्लेटलेट्स आदि सभी नि:शुल्क हैं।
डॉ. एलके तिवारी, सीएमएचओ
जिला अस्पताल में बढ़ती डिमांड को देखते हुए मंगलवार को भोपाल के इंजीनियरों को प्लेटलेट्स से संबंधित मशीन को सुधारने के लिए बुलाया गया था लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ। बुधवार को दिल्ली से टेक्नीशियन आने की संभावना है।
डॉ. देवेंद्र सिंह, ब्लड बैंक इंचार्ज

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