सतना के सुरांगी गांव में मासूम सुप्रांशी की मौत के बाद प्रशासन हरकत में आया। संयुक्त टीम ने तीन कुपोषित बच्चों की पहचान की, एक को रेफर किया, दो परिवारों ने भर्ती से इंकार किया।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
जिले के मझगवां विकासखंड के सुरांगी गांव में 4 माह की मासूम सुप्रांशी की कुपोषण से मौत ने प्रशासन को नींद से जगा दिया है। आखिरकार शुक्रवार सुबह स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग का अमला हरकत में आया। सुबह 7 बजे संयुक्त टीम ने मझगवां के सुरांगी, कामता और चित्रकूट क्षेत्रों में घर-घर दस्तक देकर बच्चों की जांच शुरू की, जहां तीन मासूम कुपोषित मिले। इनमें से एक गंभीर मासूम को जिला अस्पताल रेफर किया गया जबकि अन्य परिजनों ने बच्चे को एनआरसी भेजने से इंकार कर दिया। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या सिस्टम को हर बार किसी मासूम की मौत के बाद ही जागना पड़ेगा?आखिरकार इन्हे जागरूक करने वाला मैदानी अमला कहां गायब है? सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब बच्चे इस हालत में पहुंच चुके थे, तब तक जिम्मेदार अमला क्या कर रहा था? आंगनबाड़ी, स्वास्थ्य कार्यकर्ता और विभागीय निगरानी व्यवस्था आखिर किस काम की, यदि मासूम बच्चों का वजन गिरता रहे और प्रशासन को खबर तक न हो? फिलहाल प्रशासन सक्रिय दिख रहा है लेकिन जनता पूछ रही है, अगर सुप्रांशी जिंदा होती, तो क्या यह दौड़भाग तब भी होती?
पांच घंटे बाद रीवा मेडिकल कॉलेज रेफर
चिकित्सकों के मुताबिक शुक्रवार को जिला अस्पताल में रेफर होकर आई कुपोषित बच्ची मोहनी प्रजापति को पीडियाट्रिक आईसीयू में भर्ती किया गया। बच्चे को बुखार था और बच्चा कमजोर था। चिकित्सकों द्वारा प्राथमिक इलाज शुरू किया गया। चिकित्सकों के एनालिसिस में पता चला कि बच्ची को डिफॉरमेटी था यानि बच्ची एक कान से जन्मजात विकृत थी। चिकित्सकों ने कहा कि हो सकता है बच्ची के शरीर में अन्य विकृतियां भी हों जिसकी जांच के लिए रीवा मेडिकल कॉलेज रेफर किया जा रहा है। इसके अलावा वहां बच्चों के लिए एक अलग से यूनिट है जिसमें बच्चों की जांच और उपचार बेहतर तरीके से की जाती है। जिला अस्पताल के पीकू वार्ड में वर्तमान में सभी बेड भरे हुए हैं। एक बेड पर दो-दो बच्चों का उपचार जारी है।
सुरांगी, कामता और चित्रकूट क्षेत्रों में दस्तक
जानकारी के मुताबिक शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग और महिला बाल विकास विभाग की संयुक्त टीम ने सुबह 7 बजे सुरांगी, कामता और चित्रकूट क्षेत्रों में घर-घर दस्तक देकर कई घरों में पहुंचकर बच्चों का वजन, स्वास्थ्य स्थिति और पोषण स्तर की जांच की। अधिकारियों ने परिजनों को कुपोषण के खतरे और बचाव के उपाय समझाए, लेकिन जमीनी हकीकत यह रही कि समझाइश के बावजूद दो परिवार अपने बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) भेजने को तैयार नहीं हुए। यह स्थिति प्रशासनिक व्यवस्था के साथ-साथ जनजागरूकता पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। इस संयुक्त टीम में बीएमओ डॉ. रूपेश सोनी, सीएचओ पुष्पेंद्र गुप्ता, सेक्टर सुपरवाइजर के.सी. सिंह, एमपीडब्ल्यू अनिल त्रिपाठी, एएनएम विद्या चक्रवर्ती, महिला एवं बाल विकास विभाग की सुपरवाइजर करुणा पांडेय तथा आंगनबाड़ी कार्यकर्ता शामिल रहीं।
मौत के बाद जारी होता है नोटिस का खेल
जानकारी के अनुसार कुपोषण की मौतों का आंकलन करें तो एक माह में ही दो कुपोषित बच्चों की मौत हो गई, वहीं इलाज के नाम पर रीवा मेडिकल कॉलेज रेफर किया जा रहा है। 22अपै्रल को सुरांगी गांव की चार माह की मासूम सुप्रांशी की मौत एवं हाल ही में महतैन ग्राम की 11 माह 20 दिन की भारती मवासी की मौत एवं अक्टूबर 2025 में जैतवारा मरवा गांव के चार माह के हुसैन रजा की मौत ने कई सवाल खड़े किए हैं। कार्रवाई के नाम पर सिर्फ मैदानी अमले को नोटिस जारी की जाती है। अपना पल्ला बचाने के लिए बच्चों की मौत को सामान्य मौत बताया जाता है।
बच्चों के परिजनों ने भर्ती कराने से किया इंकार
कार्रवाई के दौरान तीन गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों की पहचान की गई। इनमे चित्रकूट क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 7 की मुकेश-सावित्री प्रजापति की 5 माह की पुत्री मोहिनी प्रजापति जिसका वजन महज 2 किलो 327 ग्राम पाया गया, जिसे हालत गंभीर होने पर पहले मझगवां एनआरसी और फिर जिला अस्पताल सतना रेफर किया गया। वहीं निजमा-राजेंद्र मवासी का 1 वर्षीय पुत्र प्रांशु जिसका वजन 6.9 किग्रा एवं हरिजन बस्ती कामता चित्रकूट निवासी उमा-सरोज वर्मा का 2 वर्षीय बेटे सूर्यांश को अति कुपोषित श्रेणी में चिन्हित किया गया। लेकिन इन दोनों बच्चों के परिजनों ने भर्ती कराने से इंकार कर दिया।
हमें डर लगता है...
मझगवां क्षेत्र में आज भी ऐसे कई गांव हैं जहां सैकड़ों की तादाद में कुपोषित बच्चे जी रहे हैं लेकिन मैदानी अमला शून्य है। न तो इन मासूमों के परिजनों को जागरुक किया जा रहा है और न ही इन्हें सुविधाएं मुहैया कराई जा रहीं हैं। इसी का नतीजा है कि शुक्रवार को दो कुपोषित बच्चों के परिजनों ने पोषण पुर्नवास केन्द्र में भर्ती होने से इंकार कर दिया। परिजनों ने कहा कि हमें डर लगता है हम 14 दिन तक पोषण पुर्नवास केन्द्र में नहीं रह सकते। हमें अपने हाल में जीने दीजिए।
चित्रकूट सेक्टर सुपरवाइजर के बताए अनुसार शुक्रवार की सुबह घर-घर दस्तक दी गई जिसमें तीन बच्चे कुपोषित मिले, बच्ची को उचित इलाज के लिए जिला अस्पताल रेफर किया गया। अन्य कुपोषित बच्चों के परिजनों ने एनआरसी में भर्ती होने से मना कर दिया।
डॉ. रुपेश सोनी, मझगवां बीएमओ
बच्चे में जन्मजात विकृति मिली है, बच्चे का एक कान नहीं है, शरीर में अन्य कोई विकृति न हो इसकी जांच के लिए रीवा मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है। वहां बच्चों के लिए अलग से यूनिट तैयार की गई है जिसमें बच्चों की बारीकी से जांच और उपचार किया जाता है।
डॉ. संजीव प्रजापति, पीकू वार्ड प्रभारी
लक्षित गांवों में आरबीएसके की टीम नियमित रूप से स्वास्थ्य परीक्षण करेगी
कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस की अध्यक्षता में शुक्रवार को जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में पूरे जिले विशेषकर मझगवां क्षेत्र में बच्चों के पोषण प्रबंधन के लिए माइक्रो प्लान और एसओपी बनाकर स्वास्थ्य और महिला बाल विकास विभाग के अमले को कार्य करने के निर्देश दिये गये हंै। इस मौके पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनोज शुक्ला, डीआईओ डॉ.सुचित्रा अग्रवाल, सभी बीएमओ, बीपीएम, जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला विकास राजीव सिंह सहित सभी महिला बाल विकास विभाग के परियोजना अधिकारी उपस्थित रहे।
सीडीपीओ, बीसीएम, बीपीएम को कारण बताओ नोटिस
पोषण पुनर्वास केन्द्र (एनआरसी) में सम्पूर्ण जिले की एनआरसी बेड की आक्युपेंसी 83 प्रतिशत पाये जाने पर कलेक्टर ने नाराजगी व्यक्त की। मझगवां एनआरसी में 82 प्रतिशत और कोठी एनआरसी में 70 प्रतिशत बेड आक्युपेंसी पर कलेक्टर ने मझगवां (चित्रकूट) और कोठी के सीडीपीओ, बीसीएम, बीपीएम को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिये। उन्होंने जिला कार्यक्रम अधिकारी को इन एनआरसी के लिए स्वास्थ्य विभाग की तर्ज पर महिला बाल विकास के अधिकारी को नोडल बनाने के निर्देश दिये। होम बेस्ड न्यू बार्न केयर में गत वर्ष 23396 जन्म पर 18506 एचबीएनसी बिजिट अर्थात 79 प्रतिशत होम केयर पाये जाने पर कलेक्टर ने अप्रसन्नता व्यक्त की।
वार्डों में आशाओं की होगी नियुक्ति
जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में निर्णय लिया गया कि जिले के नगरीय क्षेत्रों के नगर परिषद के वार्डो में आशा नियुक्ति का प्रस्ताव भेजा जाये। चित्रकूट नगर पंचायत क्षेत्र में दूर-दूर के ग्रामीण एरिया शामिल हैं। नगर पंचायत के इन दूरस्थ गांव के वार्डो में आशा नियुक्ति का प्रस्ताव भेजा जाये।

रीवा के संजय गांधी अस्पताल में युवक-युवती के शव फ्रीजर की बजाय स्ट्रेचर पर पड़े रहे। दुर्गंध फैलने पर परिजन भड़क उठे। मर्चुरी प्रबंधन और अस्पताल व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हुए।
रीवा-मऊगंज की बिगड़ी स्वास्थ्य सेवाओं पर भोपाल सख्त हुआ है। 26 अप्रैल को एसीएस और 27 अप्रैल को हेल्थ कमिश्नर औचक निरीक्षण करेंगे। विभाग में दवा खरीदी जांच को लेकर खलबली है।
रीवा संभाग में शिक्षा विभाग की 787 पेंशन और वेतन निर्धारण फाइलें लंबित हैं। 111 प्रकरण बिना कारण निरस्त किए गए। कर्मचारियों को महीनों से भुगतान और पेंशन के लिए भटकना पड़ रहा है।
पन्ना के मक्केपाला गांव में कुएं में तेंदुआ और बछड़ा साथ फंसे मिले। वन विभाग ने अनोखा रेस्क्यू कर दोनों को सुरक्षित निकाला। बछड़े और तेंदुए का शांत व्यवहार चर्चा में रहा।
सतना जिले में नरवाई जलाने से भीषण आग लगी। बरदहा गांव में कई घर जल गए, मवेशियों की मौत हुई। सभापुर में 1500 पेड़ जले, बिकरा में दमकल वाहन भी आग में घिरा।
प्रदेश में निगम-मंडल नियुक्तियां शुरू होते ही सतना में राजनीतिक हलचल तेज है। अब चित्रकूट विकास प्राधिकरण और विंध्य विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष पदों पर दावेदारों की नजरें टिक गई हैं।
प्रयागराज जंक्शन यार्ड रीमॉडलिंग के कारण 17 ट्रेनों के मार्ग बदले गए हैं। कई गाड़ियां प्रयागराज नहीं जाएंगी। समर सीजन में यात्रियों को टिकट, रूट और समय की परेशानी बढ़ेगी।
सतना-मैहर जिले के 41 गांव मलेरिया जोखिम क्षेत्र में चिन्हित हुए हैं। दवा छिड़काव के लिए भोपाल प्रस्ताव भेजा गया है। मंजूरी मिलते ही अभियान शुरू होगा, अब तक 2026 में 11 केस मिले।
सतना के टिकरिया गांव में खेलते समय 6 वर्षीय अमन रावत सरिया पर गिरकर गंभीर घायल हो गया। जिला अस्पताल में मेडिकल कॉलेज टीम ने तत्काल ऑपरेशन कर मासूम की जान बचाई, हालत स्थिर है।
सतना के सुरांगी गांव में मासूम सुप्रांशी की मौत के बाद प्रशासन हरकत में आया। संयुक्त टीम ने तीन कुपोषित बच्चों की पहचान की, एक को रेफर किया, दो परिवारों ने भर्ती से इंकार किया।

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