सतना में अचानक बारिश से 3 लाख एमटी से अधिक गेहूं खुले में भीग गया। प्रशासनिक लापरवाही उजागर हुई, वहीं आंधी-तूफान से बिजली व्यवस्था भी ठप पड़ी और आधा शहर अंधेरे में डूबा रहा।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
अचानक मौसम में आए परिवर्तन ने सरकारी इंतजामों को घुटने में ला दिया। जिम्मेदार तिरपाल के निर्देश हांकते रहे और इधर, 3 लाख मीट्रिक टन से भी अधिक का गेहूं खुले आसमान के नीचे तर हो गया। इस बात की खबर लगने के बाद भी जिम्मेदार केवल लेटर की ही बात करते रहे। कुल मिलाकर जिस गति से यहां गेहूं उपार्जन किया जा रहा है। उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिम्मेदारों को अपने कागजी घोडेÞ दौड़ाने के अलावा फील्ड की समस्या नहीं देखनी है। 29 अप्रैल तक 9 हजार 3 सौ 29 किसानों से 3 लाख 54 हजार 42 मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी की जा सकी है।
मैहर डीएसओ को फटकार
खुले आसमान के नीचे रखे गेहूं को लेकर मैहर कलेक्टर ने डीएसओ पर नाराजगी जाहिर की। असल में उन्हें अमरपाटन के ओबरा समिति की शिकायत मिली थी। इस शिकायत में कहा गया था कि वहां तिरपाल नहीं है। इस पर कलेक्टर मैहर बिदिशा मुखर्जी ने डीएसओ राजीव पांडेय को तत्काल तिरपाल की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। यह व्यवस्था हुई या नहीं इसके लिए डीएसओ मैहर से संपर्क किया गया लेकिन उनका फोन नहीं उठ सका जिससे यह जानकारी नहीं लग सकी।
आंधी-तूफान में थमी बिजली: आधा शहर अंधेरे में, सिस्टम फिर बेनकाब
गुरुवार शाम आई तेज आंधी और बारिश ने शहर की बिजली व्यवस्था की कमजोरियों को एक बार फिर उजागर कर दिया। गर्मी के बढ़ते लोड से पहले ही लड़खड़ा रही सप्लाई पर मौसम की मार ने ऐसा ब्रेक लगाया कि आधे शहर में ब्लैकआउट जैसे हालात बन गए। संभाग के 11 नग 33 केवी फीडर एक साथ ठप पड़ गए, जिससे बड़े हिस्से में अंधेरा छा गया। बिजली विभाग के एफओसी में करीब 1200 शिकायतें दर्ज हुईं। आंधी के दौरान 20 से अधिक स्थानों पर डीओ उड़ने की शिकायतें सामने आईं, जबकि कई इलाकों में पेड़ गिरने से तार टूट गए। हालात को देखते हुए एहतियातन कई 11 केवी फीडर भी बंद करने पड़े, जिससे सप्लाई बहाल करने में और देर हुई। बिजली कंपनी की 6 मेंटेनेंस टीमें अलर्ट मोड पर लगाई गईं, लेकिन सवाल यही है कि हर बार मौसम के आगे व्यवस्था क्यों बेबस नजर आती है? गर्मी में बढ़ते लोड और मानसून से पहले की चेतावनियों के बावजूद इंफ्रास्ट्रक्चर की मजबूती पर काम क्यों नहीं दिखता?
उमस ने बढ़ाई परेशानी 2.8 मिमी वर्षा 78 प्रति. नमी
एक दिन पहले तक जहां तेज धूप और लू जैसे हालात थे। वहीं गुरुवार को बादल, हल्की बारिश और ठंडी हवाओं ने तापमान में बड़ी गिरावट ला दी। शाम को तेज हवा के साथ बारिश का दौर शुरू हुआ जिससे मौसम और भी सुहाना हो गया। गुरूवार को अधिकतम तापमान 42.9 डिग्री से सीधे 33.5 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया यानी करीब 9 डिग्री की कमी दर्ज की गई। न्यूनतम तापमान में भी गिरावट आई और यह 28.2 डिग्री से घटकर 23.1 डिग्री सेल्सियस हो गया। दिनभर आसमान में बादल छाए रहे, जिससे धूप का असर कम रहा। इसका सीधा फायदा लोगों को मिला और दोपहर की तपिश काफी हद तक कम हो गई।
राहत के साथ उमस
बारिश ने राहत के साथ उमस ने थोड़ी परेशानी जरूर बढ़ाई। हवा में नमी का स्तर 34/16 प्रतिशत से बढ़कर 78/39 प्रतिशत हो गया, जिससे चिपचिपाहट महसूस हुई।


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भोपाल रेल मंडल के यात्रियों के लिए सबसे अहम बदलाव बिना टिकट और नियमों के उल्लंघन से जुड़े किए गए हैं। अब बिना टिकट यात्रा करते पकड़े जाने पर न्यूनतम अतिरिक्त शुल्क 250 रुपए से बढ़ाकर 500 रुपए कर दिया गया है। अनियमित यात्रा या गलत टिकट पर यात्रा करने पर भी यही नियम लागू होंगे।
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर मध्य प्रदेश में जगह-जगह सामूहिक योग किए गए। जबलपुर के गैरिसन ग्राउंड में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने योग किया।
इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड कॉरिडोर का भूमि-पूजन, 5657 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात, पीएम आवास योजना और कृषि क्षेत्र में मध्यप्रदेश की उपलब्धियों पर विस्तृत रिपोर्ट।
सीधी के खैरा गांव में जमीन विवाद को लेकर दो पक्षों के बीच हिंसक झड़प हुई। घटना में एक ही परिवार के पांच लोग घायल हुए, जबकि मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
सिंगरौली की अमलोरी कोल माइंस में डंपर 100 फीट गहरी खाई में गिरने से ऑपरेटर की मौत हो गई। हादसे ने खदानों में श्रमिक सुरक्षा और कार्यस्थल प्रबंधन को लेकर गंभीर चिंताएं बढ़ा दी हैं।
केन-बेतवा लिंक परियोजना से विस्थापित परिवार पुनर्वास स्थलों पर मूलभूत सुविधाओं के अभाव में तिरपाल और झोपड़ियों में रहने को मजबूर हैं। मुआवजा मिलने के बावजूद स्थायी पुनर्स्थापन और बुनियादी व्यवस्थाओं का इंतजार जारी है।
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रीवा में प्रवर्तन निदेशालय ने चार प्रमुख संविदाकारों के घर और कार्यालयों पर छापेमार कार्रवाई की। वित्तीय अनियमितताओं, टेंडर भुगतान और कथित घोटालों से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
सतना के धवारी स्थित इनक्यूबेशन सेंटर में बिना मीटर सीधे ट्रांसफॉर्मर से बिजली उपयोग का मामला सामने आया। बिजली विभाग की जांच में अवैध कनेक्शन पकड़े गए, जिससे निगरानी और जवाबदेही पर सवाल खड़े हुए।
चित्रकूट में 36.84 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे कामदगिरी परिक्रमा मार्ग की गुणवत्ता जांच में खामियां मिलीं। कलेक्टर और प्राधिकरण अध्यक्ष ने मौके पर निरीक्षण कर निर्माण एजेंसी से जवाब तलब किया।