सतना में गेहूं खरीदी में देरी से किसान परेशान हैं। एमएसपी घोषित होने के बावजूद मंडियों में कम दाम मिल रहे हैं, जिससे किसान नुकसान में उपज बेच रहे हैं और व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
यों तो एमएसपी का मतलब मिनिमम सपोर्ट प्राइज है जिसे किसान समर्थन मूल्य कहते है। इस बार सरकारी खरीदी होनी है यह तय हो चुका है लेकिन यहां उपार्जन केन्द्रों के निर्धारण में फिलहाल ‘देरी के लिए खेद’ की स्थिति बनी हुई है जिसके चलते किसान औने-पौने दामों में अपनी मेहनत बेचने मजबूर है। स्थिति यह है कि जिले में 27 प्रतिशत नुकसान के साथ किसान अपना गेहूं बेच रहा है। इस हिसाब से किसान और उनके पैरोकार एमएसपी को मेबी सपोर्ट प्राइज करार देने लगे हैं।
हद है? 18 सौ रुपए में बिका गेहूं
एक स्याह तस्वीर यह भी है कि समर्थन मूल्य में खरीदी की सुगबुगाहट के बीच किसान कृषि उपज मंडियों में अपनी मेहनत बेचने को मजबूर है। चालू माह के पांच दिनों के सौदा और भाव की बात करें तो सतना और नागौद मंडी में 27 प्रतिशत के नुकसान में किसान गेहंू बेचने को मजबूर है। इन दोनो मंडियों को मिलाकर देखा जाय तो 1 हजार 8 सौ 72 रुपए सबसे कम और 2 हजार 4 सौ 42 रुपए अधिकतम दाम के साथ गेहूं बिका है। जबकि गेहूं का समर्थन मूल्य 2 हजार 5 सौ 85 रुपए है। इन दिनों में सतना मंडी में 895.027 मीट्रिक टन और नागौद मंडी में 554.37 मीट्रिक टन गेहूं की आवक दर्ज की गई।
स्लॉट खाक बुक करेंगे, 9 दिन शेष
सतना और मैहर जिला के लिए 15 अप्रैल से गेहूं समर्थन मूल्य में खरीदने की घोषणा की गई है। इधर, मुख्यमंत्री ने 10 अप्रैल से स्लॉट बुक करने की घोषणा कर दी है। लेकिन यहां के दोनों जिलों में अब तक एक भी उपार्जन केन्द्र नहीं बनाए जा सके हैं। जिसके चलते 50 हजार से भी गेहूं किसानों का इंतजार बढ़ रहा है। यानि कि खरीदी की शुरूआत 9 दिन में शुरू हो जाएगी लेकिन अभी भी मंथन ही जारी है।
वीडियो कान्फ्रेसिंग में केन्द्र निर्धारण के निर्देश
इधर, वीडियो कान्फ्रेसिंग में गेहूं उपार्जन को लेकर मची गहमागहमी के बीच जोरदार चर्चा हुई। शाम 5 बजे से हुई इस वीसी में आपूर्ति अधिकारी, डीएम सिविल सप्लाइज, डीएम डब्ल्यूएलसी सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे है। वीसी के दौरान खरीदी के लिए केन्द्रों के निर्धारण को समय पर करने और एसओपी पर ध्यान देने की बात कही गई। माना जा रहा है भोपाल से मिले निर्देशों के बाद सतना और मैहर के उपार्जन केन्द्रों का निर्धारण एक दो दिन में हो जाएगा।
सरकार एमएसपी घोषित करती है लेकिन मंडी में इसका फायदा नहीं मिलता है। मजबूरी है कि कम दाम में ही उपज बेचनी पड़ रही है।
राज बहादुर सिंह, किसान, नागौद
खरीदी केन्द्रों का निर्धारण प्रक्रिया में है। यहां पर किसानों का एमएसपी का पूरा लाभ मिलेगा। सभी पंजीकृत किसानों की उपज खरीदी जाएगी।
सम्यक जैन, जिला आपूर्ति अधिकारी
सरकार की एमएसपी का मतलब भले ही मिनिमम सपोर्ट प्राइज हो लेकिन यह किसानों के लिए मेबी सपोर्ट प्राइज है। यह सरकार का सांत्वना पुरस्कार नहीं है। किसान भाइयों को लुटता देख भी सरकार कागज ही गीला कर रही है।
सुभाष पांडेय, किसान मजदूर महासंघ


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