सतना जिले में गेहूं उठाव धीमा होने से 6759 किसानों का 152 करोड़ रुपए भुगतान अटक गया है। खरीदी केंद्रों में हजारों मीट्रिक टन गेहूं पड़ा है, जिस पर प्रशासन ने परिवहनकर्ता को सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
जिले में गेहूं खरीदी के बाद अब भुगतान संकट गहराने लगा है। खरीदी केंद्रों से समय पर गेहूं का उठाव नहीं होने के कारण 6759 किसानों का करीब 152 करोड़ रुपए का भुगतान अटक गया है। हालत यह है कि पिछले सात दिनों से 57 हजार 739 मीट्रिक टन गेहूं खरीदी केंद्रों में परिवहन के इंतजार में पड़ा हुआ है।
भुगतान नहीं मिलने से किसानों की नाराजगी बढ़ रही है। कई किसान रोज खरीदी केंद्रों और बैंकों के चक्कर लगा रहे हैं। किसानों का कहना है कि गेहूं बेचने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि समय पर पैसा मिल जाएगा, जिससे वे कर्ज चुका सकें और खरीफ फसल की तैयारी कर सकें, लेकिन भुगतान अटकने से आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
57 हजार एमटी गेहूं का ही उठाव
दरअसल, जिले में इस बार 2.36 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन किया गया है। समिति स्तर पर 1.35 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा गेहूं खरीदा जा चुका है, लेकिन परिवहन व्यवस्था सुस्त पड़ गई। अधिकृत परिवहनकर्ता अब तक केवल 57 हजार मीट्रिक टन गेहूं का ही उठाव करा सका है। इसके कारण खरीदी केंद्रों में गेहूं का स्टॉक बढ़ता जा रहा है।
मांग 2 सौ की लगाए 100 ट्रक
प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक परिवहनकर्ता को रोज 175 से 200 ट्रक लगाने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन मौके पर सिर्फ करीब 100 ट्रक ही लगाए जा रहे हैं। ट्रकों की कमी के कारण गेहूं उठाव की रफ्तार आधी रह गई है। कई खरीदी केंद्रों में बोरियां खुले में रखी हुई हैं। मौसम खराब होने की आशंका ने प्रशासन की चिंता और बढ़ा दी है। बारिश या तेज आंधी आने पर खुले में रखा गेहूं भीगकर खराब हो सकता है। इससे शासन को बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। दूसरी ओर भुगतान नहीं मिलने से किसानों में आक्रोश बढ़ रहा है। प्रशासन को आशंका है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो विरोध-प्रदर्शन और कानून-व्यवस्था की स्थिति भी बन सकती है।
48 घंटे में बढ़ाओ स्पीड
मामले की गंभीरता को देखते हुए अपर कलेक्टर एवं अपर जिला दण्डाधिकारी शैलेन्द्र सिंह ने अनुबंधित परिवहनकर्ता विकास जायसवाल को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नोटिस में 24 से 48 घंटे के भीतर ट्रकों की संख्या बढ़ाकर तेज गति से उठाव सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही 20 मई को अपरान्ह 3 बजे कार्यालय में उपस्थित होकर जवाब देने को कहा गया है। प्रशासन ने साफ चेतावनी दी है कि यदि 48 घंटे में व्यवस्था नहीं सुधरी तो भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धाराओं के तहत गिरफ्तारी वारंट जारी कर सिविल जेल भेजने की कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा जुमार्ना और अनुबंध समाप्त करने की कार्रवाई भी अलग से की जाएगी।

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