सतना जिले में गेहूं खरीदी से पहले बड़ी लापरवाही सामने आई, 77 उपार्जन केंद्रों में से सिर्फ 28 ऑनलाइन हैं, जिससे किसानों को स्लॉट बुकिंग में परेशानी और फसल खराब होने का खतरा बढ़ गया

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
यह वर्ष किसान कल्याण का है। ऐसा सरकार गला फाड़ कर कह रही है। बावजूद इसके बाद भी अन्नदाता चिंतित है। इधर, जिम्मेदार बड़े कार्यक्रमों में व्यस्त हैं। जिसके चलते गेहूं खरीदी जैसे मामले में जबरदस्त सुस्ती छाई हुई। सतना में तो कागजों में उपार्जन केन्द्र बना दिए गए जबकि ऑनलाइन नहीं किए गए जिसके चलते स्लॉट बुक नहीं हो पर रहे। इसमें भी सर्वर हांफ रहा है। कुल मिलाकर चिंता बड़ी है लेकिन जिम्मेदार एक-दो दिन पर बात टाल रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक जिले में दो दिन बाद गेहूं की खरीदी शुरू हो जाएगी। इसके बाद भी उपार्जन केन्द्रों को ऑनलाइन करने में जिम्मेदार सुस्त हैं जबकि कागजों में चार दिन पहले की केन्द्रों का निर्धारण कर लिया गया था। ऑनलाइन न होने के कारण किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए स्लॉट की बुकिंग करने में परेशानी हो रही है। नागौद ब्लाक के सौ क्विंटल से अधिक के किसान डीपी उपाध्याय बताते हैं कि उपज खलिहान में पड़ी है इसमें बारिश और हवा के कारण दीमक लगने लगी है। परेशानी यह है कि स्लॉट बुक नहीं हो पा रहा है। 9 अप्रैल से इसके लिए प्रयास कर रहा हूं लेकिन 15 से लेकर 21 अप्रैल तक के सभी स्लॉट बुक दिखा रहा है जिस कारण फसल खराब होने की आशंका है। ऐसे में उपज का सही दाम नहीं मिलेगा।
कहां कितने ऑनलाइन
ई-उपार्जन पोर्टल के मुताबिक जिले के नागौद में 20 में से एक, रघुराजनगर तहसील में 6 में से एक भी नहीं, उचेहरा तहसील में 10 में दो, रामपुर बाघेलान तहसील में 19 में से 9, मझगवां तहसील में 5 में से 3, कोटर तहसील में 6 की 6, बिरसिंहपुर में 6 में से 5, कोठी में 5 में से 2 खरीदी केन्द्र आॅनलाइन किए गए हैं।
49 केन्द्र अधर में
15 अप्रैल से जिले में गेहूं खरीदी शुरू होनी है। ऐसे में कागजों में 77 केन्द्र बनाए गए हैं इनमें से 28 केन्द्रों को ई-उपार्जन पोर्टल पर ऑनलाइन किया गया है। बाकी के 49 केन्द्रों को लेकर हीला-हवाली की जा रही है। शेष केन्द्रों को लेकर विभाग का तर्क है कि एक दो दिन में सभी काम पूरा कर लिया जाएगा।
सौ क्विंटल तक के किसान
अभी जो स्थिति है उसमें जो भी उपार्जन केन्द्र ऑनलाइन दिख रहे हैं उनमें 1000 क्विंटल की लिमिट तय की गई है। इसके अलावा फिलहाल जो स्लॉट बुक भी हुए हैं उन्हें 100 क्विंटल से अधिक की उपज बेचने की मनाही है। ऐसे में समझा जा सकता है कि खरीदी को लेकर सरकार का चिंतन किस ओर है जबकि वह गला फाड़ कर इस वर्ष को किसान कल्याण को समर्पित कर चुकी है।
आप की बात सही है। समस्या आई थी जिस कारण पोर्टल में नहीं दिख रहे होंगे। यह तकनीकी समस्या है इसे दूर किया जा रहा है। समय रहते ठीक कर लिया जाएगा। किसी भी किसान को कोई समस्या नहीं होगी।
सम्यक जैन, जिला आपूर्ति अधिकारी


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