मध्यप्रदेश के सीहोर जिले में पंडित प्रदीप मिश्रा के कुबेरेश्वर धाम के आयोजनों में फैली अव्यवस्थाएं अब श्रद्धालुओं की जिंदगी पर भारी पड़ने लगी हैं। मंगलवार सुबह सीवन नदी तट से 11 किलोमीटर लंबी कांवड़ यात्रा शुरू तो हुई, लेकिन प्रशासन और आयोजकों की बदइंतजमी ने एक बार फिर आपातकालीन सेवाओं का दम घोंट दिया।
सावन के चौथे और अंतिम सोमवार पर देशभर के प्रसिद्ध ज्योतिलिंर्गों और प्रमुख शिव मंदिरों में आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा। भस्म आरती से लेकर देर रात से ही उज्जैन के महाकालेश्वर, काशी विश्वनाथ, ओंकारेश्वर और बाबा बैद्यनाथ धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ लगी रही।
उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर परिसर में आज नागचंद्रेश्वर मंदिर के पास अचानक भगदड़ जैसे हालात बन गए। परिसर में करंट फैलने की अफवाह के बाद श्रद्धालुओं में डर का माहौल बन गया। इसके बाद भारी भीड़ में लोग इधर-उधर भागने लगे और एक-दूसरे को धक्का देने लगे। घटना के वीडियो भी सामने आए हैं।
भगवान शिव के प्रिय श्रावण मास के दूसरे सोमवार पर देशभर के शिवालयों में आस्था और भक्ति का अद्भुत जनसैलाब उमड़ पड़ा। रिमझिम और तेज बारिश के बावजूद शिवभक्तों के उत्साह में कोई कमी नहीं आई। इस बार सावन सोमवार के साथ प्रदोष व्रत का विशेष संयोग बनने से शिव आराधना का महत्व और बढ़ गया।
श्रावण मास के पहले सोमवार पर पूरा देश शिवभक्ति के अलौकिक रंग में रंगा नजर आ रहा है। ब्रह्ममुहूर्त से ही काशी, प्रयागराज, और झारखंड के देवघर समेत देशभर के शिवालयों और ज्योतिर्लिंगों में श्रद्धालुओं और कांवड़ियों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। हर-हर महादेव और बम-बम भोले के गगनभेदी जयकारों से मंदिर प्रांगण गुंजायमान हो उठे।
गुरु और शिष्य का संबंध केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि आत्मा का परमात्मा से मिलन कराने वाला एक पवित्र मार्ग है। आषाढ़ मास की पूर्णिमा यानी गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर पूरे मध्य प्रदेश में भक्ति, श्रद्धा और अटूट आस्था का ऐसा अनुपम संगम देखने को मिला, जिसने संपूर्ण वातावरण को दिव्य और भक्तिमय बना दिया।
ओडिशा के तटीय शहर पुरी में गुरुवार से शुरू हो रही वार्षिक रथ यात्रा की तैयारी पूरी हो चुकी हैं। भगवान जगन्नाथ और उनके भाई-बहनों के तीन शानदार रथ कड़ी सुरक्षा के बीच ग्रैंड रोड पर निकलने को तैयार हैं। सुरक्षा व्यवस्था के लिए केंद्रीय सशस्त्र बलों की 15 कंपनियों समेत लगभग 14,000 जवानों को तैनात किया गया है।
बाबा बर्फानी की अमरनाथ की 57 दिवसीय यात्रा शुरू हो चुकी है। पूरी कश्मीर घाटी हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयकारों से गूंज रही है। इसके साथ ही श्रद्धालुओं ने पिछले सारे रिकॉर्ड भी तोड़ दिए हैं। दरअसल, अमरनाथ यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह बरकरार है।
आज वट सावित्री अमावस्या और शनि जयंती का विशेष संयोग बना, जिससे प्रदेशभर में सुबह से ही धार्मिक माहौल रहा। इस दुर्लभ अवसर पर मंदिरों और पूजा स्थलों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। सुहागिन महिलाओं ने जहां पति की दीघार्यु के लिए वट वृक्ष की पूजा की। वहीं भक्तों ने शनिदेव की आराधना कर कष्टों से मुक्ति की कामना की।
बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में अब सुविधाओं के विस्तार के साथ ही सिंहस्थ-2028 की व्यापक तैयारियां राज्य सरकार ने शुरू कर दी है। मंदिर प्रबंधन लोगों की सुविधा और दर्शन व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कई बड़े बदलाव करने जा रहा है।






















