मध्यप्रदेश सरकार ने स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार की इस पहल से लाखों शिक्षकों को लाभ मिलेगा। दरअसल, अब स्कूल शिक्षा विभाग में काम कर रहे संविदा शिक्षकों को सरकारी भर्तियों में 50 फीसदी आरक्षण मिलेगा।
देशभर में महिला सशक्तीकरण का मॉडल बन चुके मध्यप्रदेश में एक बार फिर सरकार ऐतिहासिक निर्णय लेने जा रही है। दरअसल, नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक भले ही लोकसभा में गिर गया, पर देशभर में महिला सशक्तीकरण की दिशा में ठोस प्रयास शुरू हो गए हैं।
मध्य प्रदेश विधानसभा का विशेष सत्र सोमवार को प्रस्तावित है। सदन में पहली बार संसद से पारित नहीं होने वाले बिल पर चर्चा होगी। इस विशेष सत्र में नारी शक्ति वंदन बिल को लेकर विस्तृत चर्चा होगी। वहीं, कांग्रेस 2023 में पारित महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का सदन में संकल्प पत्र लाने की तैयारी में है।
लोकसभा में महिला सशक्तिकरण से जुड़े संविधान (131वां संशोधन) विधेयक के पारित न होने के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। जहां एक ओर दिल्ली में कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी ने पत्रकारवार्ता कर केंद्र सरकार पर हमला बोला। वहीं दूसरी ओर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस मुद्दे पर कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए इसे महिलाओं के अधिकारों के साथ अन्याय बताया है।
लोकसभा में महिला आरक्षण बिल से जुड़े संविधान संशोधन बिल गिरने के बाद भाजपा और एनडीए ने कांग्रेस और विपक्षी इंडिया ब्लॉक के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। अब कांग्रेस की ओर से प्रियंका गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार और भाजपा के दावों पर पलटवार किया है।
संसद के विशेष सत्र के दूसरे दिन लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान पक्ष और विपक्ष में तीखी नोकझोंक हुई। राहुल गांधी के भाषण ने सदन का माहौल गरमाया।
पीएम मोदी ने महिला आरक्षण बिल को 'अपराध का प्रायश्चित' बताया। जानें लोकसभा की 850 सीटों के प्रस्ताव और 2029 के लागू होने की पूरी जानकारी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट मीटिंग में नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। इस प्रस्ताव के तहत लोकसभा की सीटें मौजूदा 543 से बढ़ाकर 816 की जाएंगी, जिनमें 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
मध्य प्रदेश में ओबीसी (OBC) आरक्षण को 14% से बढ़ाकर 27% करने का मामला एक बार फिर गरमा गया है। सोमवार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इस संवेदनशील विषय पर एक अहम आदेश जारी किया।
सुप्रीम कोर्ट ने ओबीसी क्रीमी लेयर पर बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा कि माता-पिता की केवल सैलरी के आधार पर आरक्षण नहीं छीना जा सकता। पदों और सामाजिक स्थिति को देखना भी अनिवार्य






















