Pitru Paksha 2026 Start Date: पितृ पक्ष की शुरुआत 26 या 27 सितंबर कब से है? जानिए पूर्णिमा और प्रतिपदा श्राद्ध का अंतर, नियम और संपूर्ण 16 दिनों की तिथियां।
दुर्गा पूजा, दीपावली, छठ और पितृपक्ष पर यात्रियों की भीड़ से निपटने के लिए रेलवे ने स्पेशल ट्रेनों का ऐलान किया है। पुणे, मुंबई और गया के लिए चलने वाली इन ट्रेनों का इटारसी और भोपाल मंडल में ठहराव रहेगा।
पितृपक्ष से पहले गया जाने वाली ट्रेनों में कन्फर्म सीटों की मारामारी बढ़ी। रेलवे ने विंध्य यात्रियों की सुविधा के लिए सतना होकर जबलपुर और रानी कमलापति से गया तक स्पेशल ट्रेनें घोषित की हैं।
20 नवंबर 2025, गुरुवार को मार्गशीर्ष (अगहन) अमावस्या है। जानें इस शुभ और महत्वपूर्ण दिन का विस्तृत पंचांग, तिथि, नक्षत्र, योग, करण और पितृ तर्पण का शुभ समय।
7 सितंबर 2025 का विस्तृत पंचांग। जानें रविवार, भाद्रपद शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि, शुभ और अशुभ मुहूर्त, राहुकाल, नक्षत्र और चंद्र ग्रहण का समय। पितृपक्ष और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी।
साल 2025 का आखिरी चंद्र ग्रहण 7 सितंबर की रात को लगने जा रहा है। यह एक पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा, जो भारत में भी दिखाई देगा। ग्रहण और उसके सूतक काल के दौरान कई नियमों का पालन करना होता है। इस लेख में, हम सूतक काल के समय, अवधि और उससे जुड़े धार्मिक नियमों के बारे में विस्तार से जानेंगे।
पितृ पक्ष, जिसे श्राद्ध पक्ष भी कहते हैं, वह 16 दिवसीय अवधि है जब हम अपने दिवंगत पूर्वजों को याद करते हैं। इस दौरान श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करके पितरों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की जाती है।
पितृपक्ष में गया जाकर पिंडदान करने वाले यात्रियों की सुविधा के लिए रेलवे ने सतना के रास्ते तीन-तीन ट्रिप में स्पेशल ट्रेनें चलाने का फैसला किया है। रानी कमलापति-गया, जबलपुर-गया और सोगरिया-गया स्पेशल ट्रेनें 6 से 21 सितंबर तक निर्धारित तिथियों पर चलाई जाएंगी। इससे यात्रियों को भीड़भाड़ के बीच कन्फर्म सीट मिल सकेगी।
हिंदू धर्म में तेरहवीं (मृत्युभोज) एक पवित्र कर्म है, पर ज्योतिषियों के अनुसार कुछ लोगों को इससे बचना चाहिए। जानें क्यों गर्भवती महिलाएं, तपस्वी और बीमार व्यक्ति मृत्युभोज में शामिल न हों। इसका पालन पितरों की शांति और अपनी पवित्रता के लिए क्यों जरूरी है, जानें।





















