साल 2025 मध्य प्रदेश की राजनीति के लिए केवल फैसले वाला साबित नहीं हुआ, बल्कि मंत्रियों और नेताओं के बयान विकास से ज्यादा सुर्खियों में रहे। यह वह दौर था, जब एक-एक टिप्पणी और एक-एक शब्द ने मध्य प्रदेश की छवि से लेकर सामाजिक माहौल तक को झकझोर कर रख दिया

विशेष: स्टार समाचार वेब
साल 2025 मध्य प्रदेश की राजनीति के लिए केवल फैसले वाला साबित नहीं हुआ, बल्कि मंत्रियों और नेताओं के बयान विकास से ज्यादा सुर्खियों में रहे। यह वह दौर था, जब एक-एक टिप्पणी और एक-एक शब्द ने मध्य प्रदेश की छवि से लेकर सामाजिक माहौल तक को झकझोर कर रख दिया।
साल का सबसे बड़ा और संवेदनशील राजनीतिक विवाद मप्र के मंत्री विजय शाह के बयान से शुरू हुआ। एक सार्वजनिक कार्यक्रम में मंत्री ने सेना की कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर ऐसी टिप्पणी की, जिसे देशभर में असम्मानजनक और अपमानजनक कहा गया। कर्नल सोफिया को आतंकियों की बहन जैसा उनका बयान राजनीति की भाषा से कहीं ज्यादा एक संवेदनशील संस्था को चोट पहुंचाने वाला था। पूरे राष्ट्र को शर्मसार कर देने वाला था। मामला यहीं नहीं रुका। हाईकोर्ट ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लिया और एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तब शाह ने सफाई दी और माफी मांगी। तब सुप्रीम कोर्ट ने तुच्छ मानसिकता जैसी गंभीर टिप्पणी करते हुए शाह को जमकर फटकार लगाई थी। ये शायद पहला ऐसा मौका था, जब किसी मंत्री की टिप्पणी पर सुप्रीम कोर्ट को सीधे टिप्पणी करनी पड़ी।
जून 2025 में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने एक मंच से महिलाओं के पहनावे पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि उन्हें, छोटी या पश्चिमी ड्रेस में लड़कियां अच्छी नहीं लगतीं और भारतीय संस्कृति में महिलाओं को गॉडेस की तरह देखा जाना चाहिए। वहीं हाल ही में जब इंदौर में ऑस्ट्रेलियन महिला क्रिकेटरों के साथ छेड़छाड़ की घटना सामने आई थी। तब भी विजयवर्गीय अपने विवादित बयान को लेकर चर्चा में थे। यही नहीं, 25 सितंबर को उन्होंने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की संयुक्त रैली पर टिप्पणी करते हुए कहा था, हम पुरानी संस्कृति के लोग हैं, पुराने जमाने में लोग अपनी बहनों के गांव का पानी तक नहीं पीते थे, लेकिन आज के हमारे प्रतिपक्ष नेता ऐसे हैं कि अपनी बहन का चौराहे पर चुंबन कर लेते हैं। उन्होंने इसे संस्कारों का अभाव माना और कहा था कि ये विदेश के संस्कार हैं।
मार्च 2025 में पंचायत मंत्र प्रह्लाद सिंह पटेल का बयान सुर्खियों में रहा। उन्होंने कहा था लोगों को भीख मांगने की आदत। उनका यह बयान कई लोगों की समस्याओं और योजनाओं की मांग पर टिप्पणी था। विकास, योजनाओं या सरकारी मदद मांगने वाले गरीब, ग्रामीणों और लोगों की स्थिति बेहद संवेदनशील होती है। पटेल के इस बयान पर जमकर विवाद हुआ। उनका ये बयान राजनीतिक रूप से बड़ी परेशानी की वजह बना। विपक्ष के साथ ही सामाजिक, जनहित समूहों ने इसे जनता का अपमान बताया। प्रदर्शन किए गए। कुछ ने उनके माफी मांगने से लेकर इस्तीफा तक देने की मांग की। वहीं पार्टी के ज्यादातर नेता उनके इस बयान से दूरी बनाते नजर आए।
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कभी बागी और बंदूकों के लिए कुख्यात चंबल का बीहड़ आज एक नए और अधिक खूंखार 'रेत माफिया' की गिरफ्त में है। राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य की कोख उजाड़कर फल-फूल रहा यह अवैध धंधा अब महज चोरी नहीं, बल्कि एक संगठित खूनी खेल बन चुका है।
साक्षात्कार ... राजनीति अक्सर उन रास्तों से होकर गुजरती है जिसकी कल्पना व्यक्ति ने स्वयं नहीं की होती। कुछ ऐसा ही सफर पृथ्वीपुर विधायक नितेंद्र सिंह राठौर का रहा।
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