मध्यप्रदेश कांग्रेस में एक बार फिर कलह सामने आई है। हालांकि यह पहली बार नहीं है। इससे पहले भी पार्टी नेताओं के बीच गुटबाजी और खींचतान उजागर हो चुकी है। लेकिन इसके बाद भी नेतृत्व सबक नहीं ले रहा है।

कांग्रेस में बयानबाजी और गुटबाजी हमेशा रही हावी
दतिया उपचुनाव के समय अलग-अलग पॉवर सेंटर
भोपाल। स्टार समाचार वेब
मध्यप्रदेश कांग्रेस में एक बार फिर कलह सामने आई है। हालांकि यह पहली बार नहीं है। इससे पहले भी पार्टी नेताओं के बीच गुटबाजी और खींचतान उजागर हो चुकी है। लेकिन इसके बाद भी नेतृत्व सबक नहीं ले रहा है। यहां सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि अब मध्य प्रदेश के दतिया में विधानसभा उपचुनाव होने जा रहा है। जब कांग्रेस को एक होकर मैदान में उतरना चाहिए, तब भी पार्टी अलग-अलग पॉवर सेंटर में बंटी दिख रही है। दरअसल, अभी हाल ही में कांग्रेस में एकजुटता की कमी एक बार फिर उज्जैन में वीर भारत न्यास को जमीन देने के आरोपों पर खुलकर सामने आई थी। प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह के बीच बयानबाजी और उसके बाद कांग्रेस के भीतर ही खिलाफत ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। वहीं दावा किया जा रहा है कि वर्तमान में कांग्रेस में आल इज वेल वाली स्थिति नजर नहीं आ रही है। यानी सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। हाल ही में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के बीच हुई बंद कमरे में लंबी बातचीत से नई सियासी चिंगारी भड़कती दिख रही है।
प्रदेश में दिग्गी-नाथ का प्रभाव बरकरार
दो दशक से सत्ता से बाहर चल रही मध्यप्रदेश कांग्रेस आज भी खींचतान से बाहर नहीं निकल पाई है। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के रूप में कांग्रेस ने नई पीढ़ी को नेतृत्व सौंपा है, लेकिन प्रदेश की राजनीति में दिग्विजय सिंह और कमलनाथ जैसे वरिष्ठ नेताओं का प्रभाव अभी भी बरकरार है।
बंद कमरे में दो घंटे की चर्चा नहीं हो रही हजम
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार का अचानक दिग्विजय सिंह के निवास पहुंचना और दोनों नेताओं के बीच दो घंटे तक बंद कमरे में चर्चा होना कई सवाल खडे कर रहा है। चूंकि यह भी जगजाहिर रहा है कि दिग्विजय और सिंघार के रिश्ते हमेशा सहज नहीं रहे हैं। 2018 में कांग्रेस सरकार बनने के बाद सिंघार ने दिग्विजय पर सरकार में हस्तक्षेप और पर्दे के पीछे से फैसले लेने जैसे आरोप लगाए थे। उस समय दोनों नेताओं के बीच खुलकर बयानबाजी भी हुई थी।
जीतू-दिग्विजय विवाद के बाद हलचल
यह मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और दिग्विजय के बयानों को लेकर पार्टी असहज स्थिति में नजर आई थी। पटवारी ने उज्जैन में सरकारी जमीन आवंटन को लेकर सरकार पर 500 करोड़ की जमीन एक रुपए में देने का आरोप लगाया था। इसके बाद दिग्विजय ने सार्वजनिक रूप से कहा कि संबंधित जमीन सरकारी ट्रस्ट की है और उसे निजी संस्था को नहीं दिया गया।
कांग्रेस नेतृत्व के सामने तालमेल की चुनौती
कांग्रेस हाईकमान ने प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष जैसे दोनों अहम पद नई पीढ़ी के नेताओं को सौंपे हैं। जीतू पटवारी और उमंग सिंघार को राहुल गांधी की टीम का करीबी माना जाता है। वहीं दिग्विजय सिंह लंबे समय तक प्रदेश कांग्रेस की राजनीति के सबसे प्रभावशाली नेताओं में रहे हैं। कमलनाथ की प्रदेश में सक्रियता पहले की तुलना में काफी कम हुई है। उनका अधिकांश समय अब छिंदवाड़ा तक सीमित रहता है। इसके विपरीत दिग्विजय सिंह लगातार प्रदेशभर में सक्रिय हैं। ऐसे में नई और पुरानी पीढ़ी के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखना कांग्रेस नेतृत्व के सामने बड़ी चुनौती माना जा रहा है।


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