अगर मेडिकल कॉलेज राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के नियमों का पालन नहीं कर रहा है, तो अब मुश्किल बढ़ जाएगी। आयोग ने ऐसे 70 मेडिकल कॉलेजों और संस्थानों की पहचान की है, जिन्होंने अब तक अनिवार्य सीसीटीवी कैमरे और निगरानी प्रणाली से जुड़े नियम पूरे नहीं किए हैं।

ग्वालियर, श्योपुर, रतलाम में भी समाने आई अधूरी व्यवस्था
25 स्थानों पर कैमरे लगाना था अनिवार्य पर कॉलेज नहीं माने
भोपाल। स्टार समाचार वेब
अगर मेडिकल कॉलेज राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के नियमों का पालन नहीं कर रहा है, तो अब मुश्किल बढ़ जाएगी। आयोग ने ऐसे 70 मेडिकल कॉलेजों और संस्थानों की पहचान की है, जिन्होंने अब तक अनिवार्य सीसीटीवी कैमरे और निगरानी प्रणाली से जुड़े नियम पूरे नहीं किए हैं। एनएमसी ने नोटिस जारी कर सभी संस्थानों को तुरंत नियमों का पालन करने का निर्देश दिया है। एनएमसी ने कहा कि कालेजों को कई बार निर्देश दिए जा चुके हैं, लेकिन फिर भी नियमों का पालन नहीं किया गया है। दअसल एनएमसी ने पढ़ाई की गुणवत्ता और अस्पताल प्रबंधन की निगरानी के लिए देश भर के सभी मेडिकल कॉलेजों को अपने कमांड एंड कट्रोल सेंटर से जोड़ा है। इसके लिए तय हुआ था कि सभी मेडिकल कॉलेज निर्धारित स्थानों पर सीसीटीवी कैमरा लगाकर आयोग को उसकी लाइव फीड उपलब्ध कराएंगे।
इन कॉलेजों ने नहीं माना आदेश
एनएमसी ने देशभर के उन 70 मेडिकल कॉलेजों की सूची जारी की है, जिन्होंने अभी तक यह आदेश लागू नहीं किया। इस सूची में मध्यप्रदेश के पांच मेडिकल कॉलेज हैं, इसमें गजराराजा मेडिकल कॉलेज ग्वालियर, श्याम शाह मेडिकल कॉलेज रीवा, डॉ. लक्ष्मीनारायण पांडेय शासकीय मेडिकल कॉलेज रतलाम, शासकीय मेडिकल कॉलेज शहडोल और शासकीय मेडिकल कॉलेज श्योपुर शामिल हैं।
कैमरे लगाना अनिवार्य
एनएमसी के यूजीएमएसआर-2023 और पीजीएमएसआर-2023 संशोधन के अनुसार हर मेडिकल कॉलेज के परिसर में 25 निर्धारित जगहों पर सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य है। एनवीआर लगाकर 30 दिन तक का वीडियो रिकार्ड सुरक्षित रखना जरूरी है। लाइव फीड एनएमसी के कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से जोड़ना है।
2022 से पत्राचार
एनएमसी का कहना है कि इसका मकसद एमबीएस की पढ़ाई, परीक्षा और अस्पताल में मरीजों की सुरक्षा में पारदर्शिता लाना है। इसके लिए एनएमसी वर्ष 2022 से लगातार पत्राचार कर रहा है।
इनका कहना है
ऐसे सभी कॉलेजों को तत्काल सिस्टम लगाने के निर्देश दिए हैं। नियमों का पालन नहीं करने पर कार्रवाई की जा सकती है। तकनीकी मदद के लिए कॉलेज मेल कर सकते हैं। यह सूचना सभी राज्यों के चिकित्सा शिक्षा सचिवों और संचालकों को भी भेजी गई है।
- डॉ. राघव लांगर, सचिव, एनएमसी

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