सुप्रीम कोर्ट एनसीईआरटी क्लास 8 की टेक्स्ट बुक के चैप्टर न्यायपालिका में भ्रष्टाचार को लेकर लिए गए स्वत: संज्ञान की सुनवाई जारी है। सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जे बागची और जस्टिस पंचोली की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है। सीजेआई की नाराजगी जताने के बाद एनसीईआरटी ने किताब वापस ले ली है।
By: Arvind Mishra
Feb 26, 202611:50 AM
नई दिल्ली। स्टार समाचार वेब
एनसीईआरटी की आठवीं कक्षा की किताब के विवादित अंश को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रूख अपनाया है। किताब में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार वाले अंश को लेकर उपजे विवाद पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ में सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि इस मामले में एनसीईआरटी का माफी मांगना पर्याप्त नहीं है। ऐसी किताब बच्चों तक जाने देना गलत होगा। न्यायपालिका की गरिमा को बनाए रखना जरूरी है। शिक्षा सचिव और एनसीईआरटी को नोटिस जारी करते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि जब तक कोर्ट संतुष्ट नहीं हो जाता, सुनवाई जारी रहेगी। दरअसल, आज यानी गुरुवार को भी सुप्रीम कोर्ट में एनसीईआरटी क्लास 8 की टेक्स्ट बुक के चैप्टर न्यायपालिका में भ्रष्टाचार को लेकर लिए गए स्वत: संज्ञान की सुनवाई की। सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जे बागची और जस्टिस पंचोली की बेंच इस मामले की सुनवाई की। कोर्ट में सुनवाई के दौरान, केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा- सबसे पहले, हम बिना शर्त माफी मांगते हैं। स्कूल एजुकेशन के सेक्रेटरी यहां हैं। इस पर सीजेआई ने कहा- उनके नोटिस में माफी का एक भी शब्द नहीं है। किसी ने मुझे भेजा था। जिस तरह से इस डायरेक्टर ने इसे बढ़ाने की कोशिश की है। मैंने सेक्रेटरी जनरल से पूछा कि क्या ऐसा पब्लिकेशन सच में हुआ था। बहुत जिम्मेदार अखबार ने छापा था, फिर भी इसमें गहरी साजिश है।
बाजार से वापस ले रहे 32 किताबें
सॉलिसिटर जनरल ने कहा- जिम्मेदार लोगों को आगे ऐसे काम में नहीं लाया जाएगा। 32 किताबें मार्केट में आईं, उन्हें वापस लिया जा रहा है। एक टीम पूरे चैप्टर को फिर से देखेगी। पेंडेंसी के बारे में एक और हिस्सा है, टाइटल है जस्टिस डिले इज जस्टिस डिनाइड...हम यह नहीं सिखा सकते कि जस्टिस डिनाइड (न्याय नहीं मिला) है।
आज ज्यूडिशियरी खून से लथपथ
सीजेआई ने इस पर कहा-आपने तो बहुत हल्के में छोड़ दिया। उनके (जिम्मेदार) धनुष से बाण निकला और आज ज्यूडिशियरी खून से लथपथ है। किताब मार्केट में अवेलेबल है, मुझे भी सोर्स से एक कॉपी मिली है। चीफ जस्टिस ने कहा कि केवल माफी मांगना और किताब से आपत्तिजनक अंशों को हटाना पर्याप्त नहीं है। एनसीईआरटी के निदेशक को कारण बताना होगा। ये सोच-समझकर उठाया गया कदम है। अदालत ने सवाल किया कि इस मामले को अवमानना क्यों न माना जाए। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने आनलाइन प्रतियों को भी तत्काल हटाने के निर्देश दिए।
यह भी पढ़िए...