देश में बढ़ती महंगाई का असर अब मध्यप्रदेश में साफ दिखने लगा है। महंगाई ने आम जनजीवन को बुरी तरह से प्रभावित करना शुरू कर दिया है। संकट की सीधी गाज रसोई के बजट पर गिरी है, जिससे हरी सब्जियों की आवक में भारी कमी आ गई है और उनके दाम आसमान छूने लगे हैं।

मानसून के आगमन में देरी और भीषण गर्मी का असर
हरी सब्जियों के उत्पादन और आवक में भारी गिरावट
भोपाल सहित पूरे मप्र में सब्जियों के दाम आसमान पर

भोपाल। स्टार समाचार वेब
देश में बढ़ती महंगाई का असर अब मध्यप्रदेश में साफ दिखने लगा है। महंगाई ने आम जनजीवन को बुरी तरह से प्रभावित करना शुरू कर दिया है। संकट की सीधी गाज रसोई के बजट पर गिरी है, जिससे हरी सब्जियों की आवक में भारी कमी आ गई है और उनके दाम आसमान छूने लगे हैं। मंडियों में गिलकी, लौकी, टमाटर, पालक और बैंगन जैसी रोजमर्रा की सब्जियों की आवक बहुत कम हो गई है, जिसके चलते बाजार में कीमतों का ग्राफ लगातार ऊपर की ओर भाग रहा है। सब्जियों के बढ़ते दामों के चलते अब लोगों में दाल की डिमांड बढ़ गई है। दरअसल, राजधानी भोपाल में भीषण गर्मी, मानसून में देरी और पड़ोसी राज्यों से सप्लाई बाधित होने के कारण सब्जियों के दाम तेजी से बढ़ गए हैं। रिटेल बाजार में टमाटर 60 से 80 रुपए प्रति किलो तक बिक रहा है, जबकि गिलकी, लौकी और पालक जैसी हरी सब्जियां भी 40 से 60 रुपए किलो तक पहुंच गई हैं।

थाली से टमाटर गायब
इधर, मप्र की सबसे बड़ी चोइथराम मंडी के सब्जी व्यापारियों के अनुसार, सब्जियों की महंगाई का सबसे गहरा असर टमाटर पर देखने को मिल रहा है, जिसकी कीमतें अचानक बहुत ज्यादा बढ़ गई हैं। रिटेल बाजारों में टमाटर की कीमतें 60 रुपए प्रति किलोग्राम के स्तर को छू चुकी हैं, जिससे मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों की थाली से टमाटर पूरी तरह गायब होने की कगार पर पहुंच गया है।
बना रहेगा भाव में उतार-चढ़ाव
टमाटर के साथ-साथ बाजार में गिलकी 60 रुपए, लौकी 40 से 50 रुपए, पालक 40 से 50 रुपए और बैंगन भी 60 रुपए प्रति किलोग्राम की दर से बिक रहे हैं। कृषि और बाजार के जानकारों का स्पष्ट कहना है कि मौसम के मिजाज में चल रही इस अनिश्चितता के कारण आने वाले कुछ दिनों तक सब्जियों के दामों में यह उतार-चढ़ाव इसी तरह बना रहेगा।
पड़ोसी राज्यों से सप्लाई ठप
आपूर्ति श्रृंखला में आई बाधा का मुख्य कारण पड़ोसी राज्यों से होने वाली सप्लाई का अचानक ठप पड़ना और खेतों में खड़ी फसलों का बड़े पैमाने पर नष्ट होना माना जा रहा है। आमतौर पर ग्रीष्मकाल के इस विशेष सीजन में मध्यप्रदेश के मालवा निमाड़ सहित अन्य प्रमुख हिस्सों में राजस्थान से भारी मात्रा में सब्जियां आती हैं, लेकिन इस साल भीषण तपिश के कारण कई इलाकों में सब्जियों की फसलें अपने निर्धारित समय से एक सप्ताह पहले ही पूरी तरह सूखकर समाप्त हो गई हैं। इसका सीधा परिणाम यह हुआ कि राजस्थान से प्रदेश की बड़ी मंडियों में आने वाले मालवाहक वाहनों के पहिए पूरी तरह थम गए हैं।
मानसून की लेटलतीफी से फसल चौपट
राजस्थान की तरफ से सप्लाई पूरी तरह बंद होने के बाद मध्यप्रदेश की थोक मंडियां अब पूरी तरह से महाराष्ट्र की फसलों के भरोसे टिक गई हैं। मौजूदा समय में प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर सहित कई अन्य बड़े शहरों में महाराष्ट्र के कन्नड़, चालीसगांव, संभाजी नगर और कलवन जैसे क्षेत्रों से सब्जियां मंगवाई जा रही हैं, मगर वहां के जमीनी हालात भी बेहद चिंताजनक बने हुए हैं। महाराष्ट्र में पड़ रही रिकॉर्ड तोड़ गर्मी ने सब्जियों के पौधों को झुलसा कर रख दिया है, जिसके कारण वहां भी कुल उत्पादन अपने न्यूनतम स्तर पर आ चुका है।
मांग के मुकाबले आवक आधी
सब्जियों की आवक का यह अभूतपूर्व संकट इंदौर की चोइथराम मंडी में पूरी तरह साफ देखा जा सकता है। सामान्य दिनों में जहां इंदौर की इस प्रमुख मंडी में रोजाना सौ से दो सौ गाड़ियां सब्जियों की खपत होती थी, वहीं इन दिनों महज बीस से पच्चीस गाड़ियां ही मंडी के अंदर पहुंच पा रही हैं। इस सीमित आवक और बाजार में लगातार बनी हुई भारी मांग के समीकरण ने कीमतों में यह भयंकर उछाल पैदा किया है।

देश में बढ़ती महंगाई का असर अब मध्यप्रदेश में साफ दिखने लगा है। महंगाई ने आम जनजीवन को बुरी तरह से प्रभावित करना शुरू कर दिया है। संकट की सीधी गाज रसोई के बजट पर गिरी है, जिससे हरी सब्जियों की आवक में भारी कमी आ गई है और उनके दाम आसमान छूने लगे हैं।
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