मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में कोल्ड्रिफ सिरप से बच्चों की मौत के मामले में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने पीएम मोदी को पत्र लिखकर केंद्र और राज्य के स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली की जांच, सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में जांच और मिलावट में सजा का प्रावधान हटाने पर सवाल उठाए। बीजेपी ने इंडी गठबंधन शासित राज्य में दवा निर्माण पर पलटवार किया है।

हाइलाइट्स
भोपाल. स्टार समाचार वेब.
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में कोल्ड्रिफ सिरप पीने से कई बच्चों की दुखद मौत के मामले को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने इस पूरे मामले को अत्यंत गंभीर बताया और कई अहम मांगें कीं और केंद्र तथा राज्य सरकार पर गंभीर सवाल उठाए।
दिग्विजय सिंह ने मांग की है कि इस पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में कराई जाए। उन्होंने प्रधानमंत्री से मांग की कि केंद्र और राज्य के स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और उनकी भूमिका की गहन जांच की जाए। सिंह ने सवाल किया कि स्वास्थ्य से संबंधित महत्वपूर्ण कमेटियों की बैठकें क्यों नहीं हुईं, और क्या साल 2013 से लेकर अब तक ऐसी कोई बैठक आयोजित की गई है या नहीं?
मिलावट पर केंद्र सरकार को घेरा
पूर्व मुख्यमंत्री ने सिरप में मिलावट के मानक पर भी सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि सिरप में डाई एथिलीन ग्लाइकोल की मात्रा केवल 0.1 प्रतिशत होनी चाहिए थी, जबकि जांच में यह कई गुना अधिक पाई गई। उन्होंने केंद्र सरकार से पूछा कि दवा निर्माण की गुणवत्ता को लेकर पहले जांच क्यों नहीं की गई।
प्रावधान बदलने पर उठाया सवाल
दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने पिछले कुछ सालों में खाद्य और दवा मिलावट से जुड़े कानूनों में सजा के प्रावधान को हटाकर केवल जुर्माने का प्रावधान क्यों लागू किया। उन्होंने इसके पीछे 'फंडिंग' को कारण बताते हुए कहा कि साल 2023 में बीजेपी को फार्मा कंपनियों से 945 करोड़ रुपये का चंदा मिला है। उन्होंने यह भी पूछा कि सभी दवाइयों की फार्मास्युटिकल टेस्टिंग क्यों नहीं की जा रही है।
डिप्टी सीएम का इस्तीफा मांगा
बच्चों की मौत के मामले में उप मुख्यमंत्री (जिनके पास स्वास्थ्य विभाग भी हो सकता है) द्वारा जांच से पहले ही 'क्लीन चिट' दिए जाने पर दिग्विजय सिंह ने तीखी आपत्ति जताई। उन्होंने सवाल किया कि बिना जांच के क्लीन चिट कैसे दे दी गई और क्या ऐसे गैर-जिम्मेदार व्यक्ति को इस्तीफा नहीं दे देना चाहिए था। उन्होंने सीधे तौर पर स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे की मांग की।
भाजपा ने किया पलटवार
वहीं दिग्विजय सिंह के आरोपों पर बीजेपी ने पलटवार किया है। भाजपा मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने कहा कि दिग्विजय सिंह को इस बात का जवाब देना चाहिए कि जिस दवा कंपनी ने यह सिरप बनाया, वह 'इंडी गठबंधन' शासित राज्य में कैसे काम कर रही थी। अग्रवाल ने सवाल उठाया कि उस राज्य की सरकार ने कंपनी के खिलाफ पहले कार्रवाई क्यों नहीं की। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश की एसआईटी ने तो दवाई बनाने वाले आरोपी को गिरफ्तार किया, लेकिन इस पहलू पर दिग्विजय सिंह मौन क्यों हैं।

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