सतना कृषि उपज मंडी में भीषण गर्मी के बीच किसान और हम्माल पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। करोड़ों का मंडी शुल्क वसूलने के बावजूद वाटर कूलर बंद हैं, जिससे किसानों में भारी नाराजगी है।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
कृषि उपज मंडी में अव्यवस्था का आलम यह है कि यहां ‘पाषाण काल’ जैसी व्यवस्था चल रही है। नौतपा की आहट के बीच जब आसमान से आग बरस रही है और पारा 44 डिग्री के पार पहुंच चुका है तब मंडी में अपनी फसल बेचने आ रहे हजारों किसानों को दो घूंट ठंडे पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। मंडी प्रशासन हर साल किसानों से करोड़ों रुपये का मंडी शुल्क (सेस) वसूलता है लेकिन बुनियादी सुविधाओं के नाम पर अन्नदाताओं को सिर्फ छलावा मिल रहा है।
लाखों की मशीनें जंग खा रहीं, मेंटेनेंस का बजट कहां गया?: मंडी प्रांगण में किसानों और हम्मालों (मजदूरों) की सुविधा के लिए टीनशेड और मुख्य प्रशासनिक भवन के पास लाखों रुपये की लागत से वाटर कूलर लगाए गए थे। नियम के मुताबिक गर्मी शुरू होने से पहले मार्च महीने में ही इनकी सर्विसिंग और फिल्टर की सफाई हो जानी चाहिए थी। लेकिन मंडी प्रबंधन की लापरवाही के चलते एक भी वाटर कूलर चालू हालत में नहीं है। इन मशीनों में जंग लग चुका है और इनके बिजली-पानी के कनेक्शन तक कटे हुए हैं। सवाल यह उठता है कि हर साल मेंटेनेंस के नाम पर आने वाला बजट कहां ठिकाने लगा दिया गया?
खौलता है पानी, बाजार से खरीद रहे पाउच
पिछले दिनों जब पानी की किल्लत को लेकर किसान यूनियन ने मंडी परिसर में डेरा डाला और काम बंद कराकर धरना दिया, तो अफसरों ने इसका एक बेहद ‘अनोखा’ तोड़ निकाला। वाटर कूलर ठीक कराने के बजाय, विरोध को दबाने के लिए आनन-फानन में कुछ मटके इन मटकों का पानी उबलने लगता है। दोपहर 12 बजे के बाद यह पानी पीने लायक नहीं रहता। मजबूरन दूर-दराज के गांवों से ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर आए गरीब किसानों और दिन-रात पसीना बहाने वाले हम्मालों को अपनी जेब काटकर बाजार से 20 रुपये की ठंडे पानी की बोतलें और पाउच खरीदने पड़ रहे हैं।
मांग पूरी नहीं हुई तो ठप होगी मंडी
किसानों ने मंडी प्रशासन के इस ‘मटका फार्मूले’ को किसानों के आत्मसम्मान के साथ खिलवाड़ बताया है। किसानों ने दो टूक लहजे में जिला प्रशासन और मंडी सचिव को अल्टीमेटम दे दिया है। मटके रखवाकर पल्ला झाड़ना अधिकारियों की संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है। हम प्रशासन को मोहलत दे रहे हैं। यदि इस समय सीमा के भीतर बंद पड़े सभी वाटर कूलरों को युद्धस्तर पर ठीक करवाकर चालू नहीं किया गया, तो किसानमंडी के मुख्य द्वारों पर अनिश्चितकालीन तालाबंदी करेगी। इसके बाद यदि नीलामी प्रभावित होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी मंडी प्रशासन की होगी।


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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में आज यानी मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में जनहित से जुड़े कई अहम फैसलों को मंजूरी दी गई है। मुख्यमंत्री ने कैबिनेट बैठक में सभी मंत्रियों से कहा कि वे विधानसभा सत्र के लिए पूरी तैयारी रखें। हर सवाल का तथ्यात्मक जवाब दें, ताकि जनता तक यह संदेश जाए कि सरकार उनके हित में लगातार काम कर रही है।
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