पुतिन ने संकेत दिया है कि रूस अपने कच्चे तेल और LNG की आपूर्ति भारत की ओर मोड़ सकता है। जानें कैसे यह कदम भारत की 40% तेल जरूरतों को पूरा करेगा और ऊर्जा संकट से बचाएगा।
By: Ajay Tiwari
Mar 26, 20266:11 PM
रूस. स्टार समाचार वेब
रूस और मध्य पूर्व (Middle East) के बीच बदलते समीकरण भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकते हैं। पुतिन का हालिया बयान कि रूस अपना तेल भारत की ओर मोड़ सकता है, भारत की अर्थव्यवस्था और तेल भंडार के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह है।
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 85% आयात करता है। वर्तमान में भारत के पास जो रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) है, वह केवल 25 दिनों की मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त है। ऐसे में मिडिल ईस्ट में तनाव भारत के लिए चिंता का विषय है क्योंकि हमारा 40% कच्चा तेल 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Hormuz Strait) से होकर आता है।
रूस ने स्पष्ट संकेत दिया है कि यदि पश्चिम एशिया में आपूर्ति बाधित होती है, तो वह अपने जहाजों का रुख भारत की ओर कर देगा। कतर द्वारा उत्पादन रोकने और मिडिल ईस्ट में अस्थिरता के बीच रूस एक भरोसेमंद विकल्प बनकर उभरा है। रूस पहले ही भारत को डिस्काउंट पर तेल दे रहा है। यदि आपूर्ति और बढ़ती है, तो भारत को वैश्विक बाजार की 'प्रीमियम कीमतों' से राहत मिल सकती है। भारत के प्रमुख LNG आपूर्तिकर्ता कतर में उत्पादन रुकने से गैस की किल्लत हो सकती थी, लेकिन रूस अब भारत की LNG जरूरतों को पूरा करने के लिए भी तैयार है।
रूस अब भारत की 40% तेल जरूरतों को पूरा करने की क्षमता रखता है। यह भारत को अपनी ऊर्जा टोकरी (Energy Basket) को विविध बनाने में मदद करेगा। इससे न केवल घरेलू स्तर पर पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर रह सकती हैं, बल्कि विदेशी मुद्रा भंडार पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।