मध्य प्रदेश के इंदौर में फर्जी डी.एड.-बी.एड. डिग्री के आधार पर 20 साल से नौकरी कर रहे 51 शिक्षकों पर होगी FIR। वेतन की होगी वसूली, जानिए पूरा मामला।

इंदौर। स्टार समाचार वेब
मध्य प्रदेश के इंदौर जिले में शिक्षा जगत से जुड़ा एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। फर्जी डी.एड. (D.Ed) और बी.एड. (B.Ed) की डिग्री व अंकसूचियों के आधार पर पिछले लगभग 20 वर्षों से सरकारी स्कूलों में नौकरी कर रहे 51 शिक्षकों पर अब कानूनी शिकंजा कसने लगा है। जिला शिक्षा विभाग ने इन सभी शिक्षकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, इन शिक्षकों से अब तक मिले वेतन की वसूली की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
यह पूरा मामला इंदौर जिले के सांवेर विकासखंड का है, जहां वर्ष 2006-07 के दौरान संविदा शाला शिक्षकों की भर्ती की गई थी। उस समय शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के कार्यकाल में यह नियुक्ति प्रक्रिया हुई थी। हाल ही में हुई जांच में यह खुलासा हुआ कि इस भर्ती प्रक्रिया में चयनित हुए 51 शिक्षकों के शैक्षणिक दस्तावेज फर्जी पाए गए हैं। इसके अलावा, 23 अन्य संदिग्ध शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच अभी भी जारी है, जबकि लोकायुक्त ने इस मामले में कुल 74 शिक्षकों का पूरा रिकॉर्ड तलब किया है।
इस फर्जीवाड़े की सुगबुगाहट साल 2021 में मिली एक शिकायत के बाद शुरू हुई थी। इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय ने नियुक्तियों के समय प्रस्तुत डी.एड. और बी.एड. अंकसूचियों का सत्यापन कराना शुरू किया।
माध्यमिक शिक्षा मंडल से सत्यापन: जून 2022 से अप्रैल 2023 के बीच माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) से जो जानकारी सामने आई, उसने चौंका दिया। कई अंकसूचियां बोर्ड द्वारा जारी ही नहीं की गई थीं, तो कुछ मामलों में एक ही रोल नंबर पर दूसरे परीक्षार्थी का नाम दर्ज मिला।
प्राचार्यों की समिति की रिपोर्ट: खुलासे के बाद चार प्राचार्यों की एक विशेष समिति का गठन किया गया, जिसने मई 2024 में अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपी।
एसटीएफ की जांच: भोपाल की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने भी इस मामले की गहन जांच की और संबंधित डिग्रियों को फर्जी घोषित किया। जांच के दायरे में उत्कृष्ट उमावि सांवेर, कन्या उमावि सांवेर, उमावि चंद्रावतीगंज, उमावि डकाच्या, उमावि मांगल्या, उमावि धरमपुरी और उमावि अजनोद संकुल शामिल रहे।
सितंबर 2024 में ही समिति की रिपोर्ट आने के बाद संबंधित संकुल प्राचार्यों को इन शिक्षकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के स्पष्ट निर्देश दे दिए गए थे। हालांकि, तत्कालीन अधिकारियों की उदासीनता और लापरवाही के चलते समय पर एफआईआर दर्ज नहीं की गई। इस बीच आरोपी शिक्षक सरकारी सेवा में बने रहे और हर महीने वेतन उठाते रहे। अब वर्तमान जिला शिक्षा अधिकारी शौर्य मल्होत्रा ने सख्ती दिखाते हुए संकुल प्राचार्यों और खंड शिक्षा अधिकारियों (BEO) को तत्काल प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं।
जांच में यह बात सामने आई है कि पकड़े गए सभी 51 शिक्षकों के पास डी.एड. की फर्जी डिग्री है, जिनमें से करीब 20 शिक्षकों ने बी.एड. की डिग्री भी संलग्न की हुई है। इन शिक्षकों ने अपनी डिग्रियां माध्यमिक शिक्षा मंडल, मध्य प्रदेश के अलावा उज्जैन, देवास और इंदौर के जिला शिक्षण इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन (DIET) सेंटरों से बनवाने का दावा किया था।
वर्तमान में इनमें से अधिकांश शिक्षक प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं और कई शिक्षक प्रमोशन भी पा चुके हैं। इन शिक्षकों की वर्तमान मासिक सैलरी 50 हजार से 1 लाख रुपए के बीच है। शिक्षा विभाग अब इनकी पूरी सेवा अवधि के दौरान आहरित किए गए कुल वेतन की गणना कर रहा है। शुरुआती अनुमानों के मुताबिक, सरकार द्वारा की जाने वाली इस रिकवरी की कुल राशि लगभग 100 करोड़ रुपए तक पहुंच सकती है।
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