मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में कैंपा फंड के 2050 करोड़ रुपये के प्लान को मंजूरी दी गई। इसके साथ ही नगरीय निकायों में खरीदी भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई, ईओडब्ल्यू के लिए फंड, नर्मदा घाटी विकास योजनाओं और दिसंबर में होने वाले चिंतन शिविर के विस्तृत फैसले जानें।

भोपाल। स्टार समाचार वेब
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई महत्वपूर्ण कैबिनेट बैठक में प्रदेश के विकास, प्रशासनिक कसावट और नीतिगत मामलों को लेकर कई बड़े फैसले लिए गए। बैठक में नगरीय निकायों में खरीदी के दौरान सामने आए भ्रष्टाचार के मामलों पर कड़ा रुख अपनाते हुए सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए। इसके अलावा, राज्य के विभिन्न विभागों के लिए हजारों करोड़ रुपये के बजट प्रावधानों और योजनाओं को हरी झंडी दिखाई गई, जिससे प्रदेश के बुनियादी ढांचे और जन कल्याणकारी योजनाओं को नई गति मिलेगी।

कैबिनेट बैठक में पर्यावरण, वन और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े कैंपा फंड के 2050 करोड़ रुपये के प्लान को औपचारिक रूप से मंजूरी प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त, नर्मदा घाटी विकास विभाग के अंतर्गत वर्ष 2019-20 से चल रही चार महत्वपूर्ण योजनाओं को निरंतर जारी रखने का निर्णय लिया गया। इन योजनाओं के तहत छिंदवाड़ा, मुरैना, सिवनी और सागर जिलों में कुल 3378 करोड़ रुपये की लागत वाली परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है, जिससे इन क्षेत्रों में सिंचाई और जल प्रबंधन को मजबूती मिलेगी।
एमएसएमई मंत्री चैतन्य काश्यप ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि बैठक में नगरीय विकास विभाग के तहत खरीदी में हुए कथित भ्रष्टाचार का मुद्दा प्रमुखता से उठा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही या कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जानकारी दी गई कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से गड़बड़ियों का पता लगाकर महज छह महीने के भीतर अब तक 201 प्रकरणों में 392 अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक एवं कानूनी कार्रवाई की जा चुकी है। इसके अलावा, भ्रष्टाचार और आर्थिक अपराधों पर लगाम कसने के लिए ईओडब्ल्यू (EOW) के कार्यों हेतु 345 करोड़ रुपये के बजट की स्वीकृति दी गई है।
सामाजिक और शैक्षणिक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में भी सरकार ने अहम कदम उठाए हैं। सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन विभाग की सात प्रमुख योजनाओं के संचालन के लिए 351 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। वहीं, प्रशासनिक व्यवस्था को सुगम बनाने के उद्देश्य से नवगठित जिलों—निवाड़ी, मऊगंज, पांढुर्णा और मैहर में नए जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालयों की स्थापना और आवश्यक पदों के सृजन को मंजूरी दी गई है।
शासन की कार्यप्रणाली की समीक्षा और आगामी रणनीतिक दिशा तय करने के लिए 21 और 22 दिसंबर को मंत्रियों के एक विशेष 'चिंतन शिविर' के आयोजन की तैयारी की जा रही है। इस शिविर में वर्तमान सरकार के तीन साल के कार्यकाल के कामकाज का मूल्यांकन किया जाएगा और आगामी वर्ष की कार्ययोजना का खाका तैयार किया जाएगा। बैठक में कृषि, सहकारिता, उद्यानिकी और मत्स्य विभागों द्वारा 'किसान कल्याण वर्ष' के तहत प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की गई, जबकि कम बारिश वाले 12 जिलों से विशेष रिपोर्ट तलब की गई है।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि दीपावली के अवसर पर सभी मंत्री अपने प्रभार वाले जिलों में माटी कला और स्थानीय दीयों के उपयोग को बढ़ावा देंगे। इसके साथ ही, प्रदेश में एक नवंबर से तीन दिवसीय मध्य प्रदेश स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया जाएगा। वहीं, 31 अक्टूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती और 15 नवंबर को भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर भव्य आयोजनों की रूपरेखा पर भी चर्चा हुई। बैठक में यह भी साझा किया गया कि सेवा संकल्प अभियान के तहत 1,345 शिविरों में 17 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए, जबकि ट्रांसमिशन लॉस को घटाकर 2.6% करने पर पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी को सम्मानित किया गया।
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