सतना में गर्मी ने 32 साल पुराने तापमान रिकॉर्ड की याद ताजा कर दी है। अधिकतम तापमान 45.1 डिग्री पहुंचा, रातों की गर्मी ने भी लोगों की परेशानी बढ़ा दी। अस्पतालों में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
इस बार गर्मी ने 32 साल पुराने रिकॉर्ड को तोड़ने में आमादा है। दिन में सूरज आग उगल रहा है, तो रात में भी गर्म हवा लोगों का चैन छीन रही है। मंगलवार को सतना का अधिकतम तापमान 45.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जो कि 32 साल पुराने रिकॉर्ड से महज 2.5 डिग्री सेल्सियस कम है जबकि न्यूनतम तापमान 30.2 डिग्री तक पहुंच गया। लगातार बढ़ती गर्मी के बीच अब 31 मई 1994 का 47.6 डिग्री सेल्सियस वाला रिकॉर्ड फिर चर्चा में आ गया है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार मंगलवार का अधिकतम तापमान में सोमवार की अपेक्षा 0.3 डिसे ही बढ़ा लेकिन न्यूनतम तापमान में 2.4 डिसे इजाफा हो गया। रात के तापमान में बड़ा उछाल से बेचैनी बढ़ा दी।
कूलर भी फेल, एसी का लोड बढ़ा & गर्मी का असर इतना ज्यादा है कि कूलर भी बेअसर होने लगे हैं। दिन में कूलर से ठंडी हवा के बजाय गर्म झोंके महसूस हो रहे हैं। इलेक्ट्रॉनिक दुकानदारों के मुताबिक पिछले एक सप्ताह में एसी, कूलर और पंखों की बिक्री अचानक बढ़ी है। बिजली विभाग पर भी दबाव बढ़ने लगा है। कई इलाकों में लो-वोल्टेज और ट्रिपिंग की शिकायतें सामने आई हैं। शाम होते ही बिजली की मांग बढ़ने से कटौती की स्थिति बन रही है।
रात में भी नहीं मिल रही राहत
इस बार सबसे ज्यादा परेशानी रात की गर्मी दे रही है। आमतौर पर शाम के बाद तापमान में गिरावट आने लगती है, लेकिन इस बार रात 10-11 बजे तक भी गर्म हवा चलती रही। घरों की दीवारें और छतें दिनभर की गर्मी सोखकर देर रात तक तपिश छोड़ती रहीं। कई मोहल्लों में लोग देर रात तक घरों के बाहर बैठे नजर आए। कुछ परिवार छतों पर सोने पहुंचे, लेकिन वहां भी गर्म हवा से राहत नहीं मिली। ग्रामीण इलाकों में बिजली कटौती ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
1994 का रिकॉर्ड फिर याद आया
सतना के मौसम इतिहास में 31 मई 1994 का दिन सबसे ज्यादा गर्म दिनों में दर्ज है। उस दिन अधिकतम तापमान 47.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया था। अब 32 साल बाद फिर वही हालात बनते दिख रहे हैं। मौसम जानकारों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों तक पश्चिम और उत्तर-पश्चिम से गर्म हवाएं चलती रहीं, तो तापमान और बढ़ सकता है। मई के आखिरी सप्ताह में लू का असर और तेज होने की आशंका है।
कम नमी ने बढ़ाई झुलसाने वाली गर्मी
मंगलवार को आर्द्रता (आरएच) 27/12 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि सोमवार को यह 28/13 प्रतिशत थी। हवा में नमी कम होने के कारण वातावरण पूरी तरह सूखा बना हुआ है। यही वजह है कि धूप और हवाएं दोनों शरीर को झुलसा रही हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक कम नमी के कारण शरीर का पानी तेजी से सूखता है। इससे डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।
अस्पतालों में बढ़ने लगे मरीज
जिला अस्पताल और निजी क्लीनिकों में गर्मी से जुड़ी बीमारियों के मरीज बढ़ने लगे हैं। उल्टी, दस्त, सिरदर्द, बुखार और कमजोरी की शिकायत लेकर लोग अस्पताल पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों ने बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।
दोपहर में थमी शहर की रफ्तार
भीषण गर्मी का असर शहर की दिनचर्या पर साफ दिखाई दिया। दोपहर 12 बजे के बाद बाजारों और सड़कों पर आवाजाही कम हो गई। बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और प्रमुख चौराहों पर सामान्य दिनों की तुलना में कम भीड़ दिखी। जरूरी काम से बाहर निकलने वाले लोग सिर और चेहरा कपड़े से ढंककर चलते नजर आए। ठंडे पेय, गन्ने का रस, नींबू पानी और आइसक्रीम की दुकानों पर जरूर भीड़ रही।
अगले कुछ दिन और भारी
मौसम विभाग के अनुसार फिलहाल गर्मी से राहत के आसार कम हैं। यदि मौसम में अचानक बदलाव नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में तापमान और बढ़ सकता है। ऐसे में 1994 का रिकॉर्ड फिर खतरे में पड़ता दिखाई दे रहा है।


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