सतना और मैहर में होने वाली गिद्ध गणना में इस बार हिमालयी, यूरेशियन और काला गिद्ध नजर नहीं आएंगे। गर्मी बढ़ने के साथ प्रवासी प्रजातियां लौट चुकी हैं, जबकि स्थानीय गिद्धों की आबादी और प्रजनन पर विशेष फोकस रहेगा।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
जंगलों और पहाड़ियों में होने वाली गिद्ध गणना इस बार कई मायनों में खास रहने वाली है। कुछ प्रजाति के गिद्ध इस बार गणना में दिखाई नहीं देंगे। वन विभाग और पक्षी विशेषज्ञों के अनुसार मई की गर्मी बढ़ने के साथ ये पक्षी वापस अपने मूल क्षेत्रों की ओर लौट चुके हैं। जानकारी के मुताबिक इस बार की गणना में हिमालयी ग्रिफॉन, यूरेशियन ग्रिफॉन और सिनेरियस गिद्ध यानी काला गिद्ध के दिखाई देने की संभावना लगभग नहीं है। पिछली शीतकालीन गणना में इन तीनों प्रजातियों की संख्या दर्ज की गई थी। विशेषज्ञ बताते हैं कि सतना और मैहर वनमंडल की चट्टानी पहाड़ियां, गहरी घाटियां, कम मानवीय हस्तक्षेप और पर्याप्त भोजन इन गिद्धों को आकर्षित करते हैं। ठंड के मौसम में यहां तापमान अपेक्षाकृत अनुकूल रहता है, जिससे हिमालय और मध्य एशिया से आने वाले गिद्ध कई महीनों तक यहां डेरा डालते हैं। मवेशियों के प्राकृतिक शव, जंगलों का खुला भूभाग और सुरक्षित ऊंची चट्टानें इनके लिए आदर्श वातावरण तैयार करती हैं। यही वजह है कि हर साल नवंबर से फरवरी के बीच क्षेत्र में गिद्धों की संख्या अचानक बढ़ जाती है।
तब गर्मी में 1026 गिद्ध मिले थे
गिद्ध संरक्षण के प्रयासों के बीच सतना जिले से उत्साहजनक आंकड़े सामने आए हैं। सामान्य वनमण्डल सतना की गर्मी के दिनों में की गई थी। 29 अप्रैल 2025 की गणना की रिपोर्ट के अनुसार जिले में कुल 1026 गिद्ध दर्ज किए गए, जिनमें 921 वयस्क और 105 अवयस्क शामिल हैं। जिले में 121 घोंसले भी चिन्हित किए गए हैं।
स्थायी निवासी मिले थे ज्यादा
सतना जिले में गिद्धों की विविध प्रजातियां पाई गईं। सबसे अधिक संख्या इंडियन/लॉन्ग बिल्ड (देशी) गिद्ध की दर्ज की गई। अलग-अलग स्थलों पर इस प्रजाति की 640, 109 और 68 की संख्या सामने आई, जो जिले में इसकी मजबूत उपस्थिति है। सफेद या इजिप्शियन गिद्ध की 24 और 84 की प्रविष्टियां दर्ज हुईं, जबकि सफेद पीठ (व्हाइट बैक्ड) गिद्ध की 35, 12 और 3 की संख्या सामने आई। इसके अलावा यूरेशियन ग्रिफन के 41 और काला (सिनेरियस) गिद्ध का 1 दर्ज किया गया।
स्थानीय प्रजातियों पर फोकस
वन विभाग के अनुसार मई में होने वाली गणना का उद्देश्य मुख्य रूप से स्थानीय और प्रजनन करने वाली प्रजातियों की स्थिति समझना है। गर्मी के मौसम में गिद्ध अपने स्थायी घोंसलों और आवासों के आसपास ज्यादा सक्रिय रहते हैं। इससे उनकी वास्तविक आबादी और प्रजनन की स्थिति का बेहतर आकलन हो पाता है। इस बार गणना में भारतीय लंबी चोंच वाले गिद्ध, सफेद पीठ वाले गिद्ध और मिस्री गिद्धों पर विशेष नजर रहेगी। क्षेत्र लंबे समय से इन प्रजातियों का महत्वपूर्ण आश्रय स्थल माना जाता है।
फरवरी में हो चुकी गणना
शीतकाल में फरवरी में 20 से 22 के बीच हुई गणना में अकेले सतना वनमंडल क्षेत्र में 900 से अधिक गिद्ध दिखाई दिए थे, जबकि मैहर वनमंडल में संख्या 200 से ज्यादा रही। इसमें प्रवासी गिद्ध भी शामिल हैं। जानकारी के अनुसार सतना में बरौंधा और मैहर में गिधैला में इनका बड़ा बसेरा है। यह साल भर में दूसरी गणना होगी।


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