सतना जिला अस्पताल में स्ट्रेचर और व्हील चेयर गायब, मरीजों को गोद व कंधों पर ले जाने की मजबूरी, प्रबंधन पर उठे गंभीर सवाल।
रीवा जिला अस्पताल में इनवर्टर की बैट्री चोरी होने से बिजली बैकअप ठप पड़ गया है, जिसके चलते पिछले एक सप्ताह से ऑपरेशन नहीं हो पा रहे हैं। मरीज भर्ती हैं, डॉक्टर मौजूद हैं, लेकिन वैकल्पिक बिजली व्यवस्था न होने से सर्जरी टालनी पड़ रही है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
रीवा के सुपर स्पेशलिटी और संजय गांधी अस्पताल में करोड़ों रुपये की अत्याधुनिक मशीनें समय से पहले खराब हो गईं। सीटी स्कैन की प्रेशर इंजेक्टर मशीन चार महीने से बंद है, वहीं 13 करोड़ की एमआरआई मशीन का एसी सिस्टम बार-बार फेल हो रहा है, जिससे मरीजों की जांच प्रभावित हो रही है।
सतना जिला अस्पताल में मरीजों की स्थिति बदहाल है। टूटी व्हीलचेयर, बिना टायर के स्ट्रेचर और अव्यवस्थित प्रबंधन के कारण मरीजों और परिजनों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। 16 व्हीलचेयर और 24 स्ट्रेचर के दावों के बावजूद अस्पताल में ठीक हालत का एक भी साधन उपलब्ध नहीं मिला। मरम्मत के नाम पर पुराने उपकरण वेल्डिंग होते नजर आए।
कोठी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पूरी तरह अव्यवस्थाओं से जूझ रहा है। अस्पताल परिसर में न साफ-सफाई है, न पर्याप्त पंखे, न पीने का पानी। एकमात्र हैंडपंप से गंदा पानी निकलता है और वाटर कूलर-आरओ मशीनें शोपीस बनकर खड़ी हैं। आवारा जानवरों का जमावड़ा और गंदगी से मरीज और परिजन बेहाल हैं।
सतना जिला अस्पताल में अव्यवस्थाओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। पीकू वार्ड में हंगामे के बीच बच्चे की मौत हो गई, वार्ड नंबर 8 में नवजात की मां से पोंछा लगवाया गया और हाईरिस्क प्रसूता को स्ट्रेचर तक नसीब नहीं हुआ।
लवकुशनगर में झोलाछाप डॉक्टर के गलत इंजेक्शन से मालती पाल की मौत हो गई। पति की पहले ही मौत हो चुकी थी, अब उनके दो छोटे बच्चे अनाथ हो गए हैं। परिजनों ने हंगामा करते हुए डॉक्टर एनके सरकार पर एफआईआर की मांग की।
सतना जिला अस्पताल परिसर में जाम के कारण एंबुलेंस फंस गई, जिससे विषाक्त पदार्थ खाने वाली गंभीर महिला मरीज को परिजनों ने गोद में उठाकर भर्ती कराया। कलेक्टर के निर्देशों के बावजूद यातायात व्यवस्था बदहाल बनी हुई है। अस्पताल की अव्यवस्था से आमजन में आक्रोश।
सतना जिला अस्पताल में वार्डों की हालत चिंताजनक है। गंदे, सड़े हुए गद्दों और बिना चादर के बेड पर मरीजों का इलाज किया जा रहा है। चादर धुलाई के लिए हर माह हजारों खर्च होने के बावजूद मरीजों को बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पा रहीं। जानिए अस्पताल प्रशासन की लापरवाही की पूरी रिपोर्ट।
सतना के जिला अस्पताल में ब्लड बैंक ‘राम’ भरोसे चल रहा है। दलालों की पौ-बारह है और मरीजों की जान आफत में। अधिकारी मौन, जांच सिर्फ चाय तक सीमित। इंजीनियर से लेकर ठेकेदार तक की करतूतों पर ‘बड़े साहब’ का रौद्र रूप देखने को मिला, लेकिन कार्रवाई नदारद। पढ़िए पत्रकार बृजेश पांडे का ब्लॉग।






















