सतना-मैहर सिविल अस्पताल निरीक्षण में राज्यस्तरीय टीम ने लेबर रूम स्ट्रक्चर में तकनीकी गड़बड़ी पाई। कुपोषण जांच के दौरान एनआरसी कार्य सराहा गया, वहीं सुधार के निर्देश भी जारी किए गए।
सतना जिले के मझगवां में कुपोषण से मासूम की मौत के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठे हैं। जांच में लापरवाही, एनीमिया और सुविधाओं की कमी सामने आई, जिससे जिम्मेदारी तय करने की मांग तेज हुई।
सतना के सुरांगी गांव में मासूम सुप्रांशी की मौत के बाद प्रशासन हरकत में आया। संयुक्त टीम ने तीन कुपोषित बच्चों की पहचान की, एक को रेफर किया, दो परिवारों ने भर्ती से इंकार किया।
सतना के सुरांगी गांव में कुपोषण से मासूम की मौत के बाद जांच तेज हुई। हेल्थ जेडी ने पहुंचकर बयान दर्ज किए, लापरवाही उजागर हुई, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता पर कार्रवाई भी की गई।
सतना के मझगवां क्षेत्र में चार माह के जुड़वा बच्चे गंभीर कुपोषण का शिकार मिले। इलाज में देरी और सरकारी योजनाओं की कमी पर सवाल उठे, बच्चों को जिला अस्पताल के पीकू वार्ड में भर्ती किया गया।
सतना के मझगवां में मासूम की मौत पर स्वास्थ्य विभाग में मतभेद, सीएमएचओ ने दूध फंसने को कारण बताया, जबकि डीआईओ ने कुपोषण जिम्मेदार ठहराया, जांच में लापरवाही और सरकारी योजनाओं की कमी उजागर हुई।
सतना के मझगवां में मासूम की मौत ने कुपोषण की भयावह स्थिति उजागर कर दी है। प्रशासन और विभागीय दावों के बीच सच्चाई की जांच जारी है, जबकि क्षेत्र में हजारों बच्चे कुपोषण से जूझ रहे हैं।
सतना जिले में कुपोषण गंभीर चुनौती बना हुआ है। 1357 बच्चे अति गंभीर कुपोषण की श्रेणी में हैं, लेकिन पोषण पुनर्वास केंद्रों में बेड खाली पड़े हैं। विभागीय समन्वय की कमी पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सतना जिले में कुपोषण का संकट फिर उजागर हुआ है। नागौद क्षेत्र के पनास आंगनवाड़ी केंद्र में स्वास्थ्य जांच के दौरान 7 बच्चे अति गंभीर कुपोषित पाए गए। चार माह पहले मझगवां क्षेत्र में मासूम रजा हुसैन की मौत के बाद भी जिला प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग से लेकर स्वास्थ्य अमले तक की लापरवाही जारी है। आंकड़े बताते हैं कि सतना के 125 से अधिक आंगनवाड़ी केंद्रों में कुपोषण का स्तर सरकारी मानकों से कई गुना अधिक है। योजनाओं और बजट के बावजूद नतीजे नहीं दिख रहे, जिम्मेदार अधिकारी अब भी मौन हैं।
सिरमौर सिविल अस्पताल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 75वें जन्म दिवस पर आयोजित स्वस्थ नारी सशक्त परिवार अभियान की बैठक में बाल रोग विशेषज्ञ ने चिंता जताई कि क्षेत्र में कुपोषित बच्चों की भरमार है, जबकि पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में बेड खाली पड़े हैं। आगामी कार्यशालाओं में इस समस्या पर जनभागीदारी से काम होगा।






















