सतना के मझगवां में मासूम की मौत ने कुपोषण की भयावह स्थिति उजागर कर दी है। प्रशासन और विभागीय दावों के बीच सच्चाई की जांच जारी है, जबकि क्षेत्र में हजारों बच्चे कुपोषण से जूझ रहे हैं।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
जिले के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र मझगवां में बीती रात एक मासूम की मौत हो गई। मासूम की मौत को लेकर दो तरह के दावे सामने आ रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि इसकी मौत कुपोषण की वजह से हुई तो वहीं दूसरी ओर विभागीय अमला इसे सामान्य मौत बता रहा है। हालांकि, मासूम की मौत कैसे हुई इसका खुलासा विस्तृत जांच के बाद ही हो पाएगा।
कुपोषण के लिए बदनाम मझगवां में मासूम की मौत के बाद प्रशासनिक स्तर पर हड़कंप मचा हुआ है। मासूम की मौत को लेकर प्रशासन कितना गंभीर है, इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दिन में पंचनामा जारी कर मौत को सामान्य बताने के बाद मझगवां एसडीएम महिपाल सिंह, महिला बाल विकास अधिकारी राजीव सिंह एवं स्वास्थ्य विभाग से सीएमएचओ डॉ. मनोज शुक्ला, डीआईओ डॉ. सुचित्रा अग्रवाल देर शाम मृतक के घर पहुंचे और माता- पिता के बयान दर्ज किए। गौरतलब है कि मझगवां में 1300 से अधिक बच्चे कुपोषित हैं, जबकि 460 बच्चे अति गंभीर कुपोषित हैं।
पीड़ित के घर पहुंचे एसडीएम
मासूम की मौत की जानकारी लगते सुबह से ही स्वास्थ्य विभाग एवं महिला बाल विकास विभाग की जांच टीम रिकार्डों को खंगालने में लगी थी। जानकारी मिलते ही मझगवां एसडीएम महिपाल सिंह गुर्जर, महिला बाल विकास अधिकारी राजीव सिंह एवं सीएमएचओ डा. मनोज शुक्ला डीआईओ डॉ. सुचित्रा अग्रवाल भी पीड़ित परिवार के यहां पहुंचे।
1300 से ज्यादा बच्चे कुपोषित 460 अति गंभीर कुपोषित
मझगवां विकासखंड क्षेत्र में कुपोषण की स्थित भयावह है, यहां कुपोषण के आंकड़े डरावने हैं। आंकड़े बताते हैं कि अभी भी यहां 1300 से अधिक बच्चे कुपोषण की श्रेणी में जी रहे हैं। मझगवां क्षेत्र में घर-घर सर्वे अभियान के तहत 460 बच्चे अति गंभीर कुपोषित मिले थे वहीं 1300 बच्चों में माइल्ड कुपोषण पाया गया था। सभी बच्चों को चिन्हित कर इलाज कराने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी। आश्चर्य की बात यह है कि इतने व्यापक पैमाने पर कुपोषित बच्चों के मिलने के बाद भी महिला बाल विकास और स्वास्थ्य विभाग का मैदानी अमला निष्क्रिय है। कुपोषित बच्चों के इलाज के लिए बनाए गए एनआरसी केन्द्र खाली पड़े हैं।
निजी क्लिीनिक संचालक ने बताया था एनीमिक-कुपोषित
जानकारी के अनुसार मझगवां विकासखंड अन्तर्गत कैमहा महतैन निवासी भारती मवासी पिता राजललन मवासी उम्र 11 माह 21 दिन की मौत रविवार की रात 12 बजे हो गई। पारिवारिक सूत्रों की मानें तो लगभग एक सप्ताह पहले बच्ची के बीमार होने पर उसे निजी क्लीनिक संचालित करने वाले चिकित्सक डॉ. लाल बहादुर गर्ग को दिखाया था, जहां डाक्टर ने उसे एनीमिक और कुपोषित बताया और इलाज के लिए जिला अस्पताल ले जाने की सलाह दी थी। हालांकि बच्ची को लेकर परिजन आगे इलाज के लिए नहीं गए। परिजनों द्वारा बच्ची की मृत्यु के बाद उसका अंतिम संस्कार भी कर दिया गया।
तैयार किया गया पंचनामा
बताया गया कि बच्ची की मौत के बाद मृतका के पिता का बयान दर्ज किया गया एवं जांच समिति की उपस्थिति में पंचनामा भी तैयार किया गया। पंचनामा में उल्लेख है कि बच्ची का जन्म 15 अपै्रल 2025 को सीएचसी मझगवां में हुआ था, जन्म के समय बच्ची का वजन 2.200 ग्राम था। जन्म से लेकर अभी तक कोई बीमारी नहीं थी न ही बच्ची कुपोषण के दायरे में आ रही थी। बच्ची के जन्म के तीन माह बाद माता-पिता पन्ना में निवास कर रहे थे। बीच-बीच में गांव कैमहा आते- जाते थे। बच्ची को 15 अपै्रल को बीसीजी, 16 जून 2025 को पेंटा- 1, 25 अक्टूबर को पेंटा- 2, 24 नवम्बर को पेंटा-3 एवं 10 मार्च 2026 को मीजल्स रुबेला का टीका लगा था। पंचनामा के दौरान बच्ची के माता- पिता, ग्रामवासी, आशा पर्यवेक्षक कल्पना सिंह, भूतपूर्व सरपंच राकेश कुमार यादव, ग्राम आशा गोमती यादव, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता जनकलली, वर्तमान सरपंच अमृता देवी मौजूद रहीं।
बच्ची की मौत स्वाभाविक कारणों से हुई है, बच्ची की मां की उम्र 20 साल है और यह चौथी बच्ची है, बच्ची की मां वर्तमान में गर्भावस्था में है। सप्ताह भर पूर्व बच्ची को सर्दी-बुखार के चलते निजी चिकित्सक को दिखाया गया था। रविवार की रात मां के द्वारा बच्ची को दूध पिलाया गया था, जिसके बाद बच्ची ने कोई हलचल नहीं की। जांच में मौत की पुष्टि हुई। बच्ची को सभी टीके लगे थे, 10 मार्च 2026 को जब टीका लगाया गया था तब बच्ची का वजन 7 किलो 200 ग्राम था।
डॉ. रुपेश सोनी, मझगवां बीएमओ
बच्ची को सूखा रोग था, हमेशा बीमार रहती थी, हालांकि विभाग द्वारा इसे कुपोषण में चिन्हित नहीं किया गया था। बच्ची के जन्म के बाद एक-दो बार आंगनबाड़ी कार्यकर्ता घर आर्इं थीं उसके बाद से मिलना नहीं हुआ।
राजललन मवासी, बच्ची के पिता


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