मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने छिंदवाड़ा दौरे पर शिकायतों की अनदेखी करने वाले अधिकारियों पर सख्त एक्शन लिया है। साथ ही 'जन-विश्वास अभियान' और नई भर्तियों को लेकर बड़ी घोषणाएं कीं।
सतना में दस्तक सह स्टॉप डायरिया अभियान की गंभीर लापरवाही उजागर हुई। डीएसएस टूल का उपयोग नहीं होने पर एनएचएम ने सीएमएचओ को कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिन में जवाब मांगा है।
सतना में सीएमएचओ कार्यालय के स्थानांतरण आदेश पर विवाद गहराया। शिकायत में अस्तित्वहीन उप स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थापना, कार्यभार ग्रहण और वेतन भुगतान के आरोप लगाते हुए स्वतंत्र जांच तथा जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग उठी।
जबलपुर में CMHO ने नियमों की अनदेखी करने वाले 5 अस्पतालों और 121 क्लीनिकों का पंजीयन रद्द कर संचालन बंद करने के आदेश दिए हैं। जानें किन अस्पतालों पर हुई कार्रवाई।
सतना जिले में 19 अक्टूबर को प्रसूता की मौत के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच रिपोर्ट में सामने आया कि चिकित्सकों ने प्रसूता की प्रसव पूर्व जांच में गंभीर लापरवाही की और कई महत्वपूर्ण तथ्यों को रिपोर्ट से दबाया गया। हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के बावजूद महिला को उचित उपचार नहीं मिला, जिससे प्रसूता और नवजात दोनों की मौत हो गई। सीएमएचओ ने मामले में जिम्मेदार चिकित्सकों से स्पष्टीकरण मांगा है और सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं।
सतना जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के प्रभावित होने की आशंका है। संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी 16 सितम्बर को सामूहिक अवकाश पर रहेंगे। सीएमएचओ को ज्ञापन सौंपकर ई-अटेंडेंस और सेवा समाप्ति का विरोध जताया गया। टीकाकरण दर बढ़ाने के लिए कार्यशाला भी आयोजित हुई।
सतना जिले के नागौद सिविल अस्पताल की अव्यवस्थाओं पर सीएमएचओ ने औचक निरीक्षण के बाद नई गाइडलाइन जारी की। स्टाफ की बायोमेट्रिक उपस्थिति, लेबर रूम में सीसीटीवी, ओपीडी समय पालन, साफ-सफाई और अल्ट्रासोनोग्राफी प्रोटोकॉल सहित 8 बिंदुओं पर बीएमओ को कड़े निर्देश दिए गए।
सतना जिला अस्पताल में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान में गड़बड़ियां सामने आईं। सीएमएचओ ने औचक निरीक्षण में पाया कि गर्भवती महिलाओं का चेकअप बिना स्त्री रोग विशेषज्ञ के हो रहा था और शासन की गाइडलाइन का पालन नहीं किया जा रहा था। सिविल सर्जन व गायनी प्रभारी से चार बिंदुओं पर जवाब मांगा गया।
स्वास्थ्य आयुक्त तरुण राठी ने आदेश जारी किया कि प्रदेश के चिकित्सा विशेषज्ञ और पीजी चिकित्सा अधिकारी अब प्रशासकीय कार्यों से मुक्त होकर केवल क्लीनिकल सेवाएं देंगे। जिलों में विशेषज्ञों की कमी को देखते हुए सीएमएचओ और सिविल सर्जन को पत्र लिखकर स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं।
कोरोना काल में सतना जिले में स्वास्थ्य विभाग द्वारा 2 करोड़ से अधिक की राशि के गबन का आरोप अमरपाटन विधायक और पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र सिंह ने सदन में उठाया है। उन्होंने बीएमओ और तत्कालीन सीएमएचओ की संलिप्तता की बात कही है। फोटोकॉपी सेंटर को दिए गए लाखों के भुगतान ने भ्रष्टाचार की पोल खोल दी है। जांच और ऑडिट की मांग की गई।






















