जबलपुर में CMHO ने नियमों की अनदेखी करने वाले 5 अस्पतालों और 121 क्लीनिकों का पंजीयन रद्द कर संचालन बंद करने के आदेश दिए हैं। जानें किन अस्पतालों पर हुई कार्रवाई।
सतना जिले में 19 अक्टूबर को प्रसूता की मौत के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच रिपोर्ट में सामने आया कि चिकित्सकों ने प्रसूता की प्रसव पूर्व जांच में गंभीर लापरवाही की और कई महत्वपूर्ण तथ्यों को रिपोर्ट से दबाया गया। हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के बावजूद महिला को उचित उपचार नहीं मिला, जिससे प्रसूता और नवजात दोनों की मौत हो गई। सीएमएचओ ने मामले में जिम्मेदार चिकित्सकों से स्पष्टीकरण मांगा है और सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं।
सतना जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के प्रभावित होने की आशंका है। संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी 16 सितम्बर को सामूहिक अवकाश पर रहेंगे। सीएमएचओ को ज्ञापन सौंपकर ई-अटेंडेंस और सेवा समाप्ति का विरोध जताया गया। टीकाकरण दर बढ़ाने के लिए कार्यशाला भी आयोजित हुई।
सतना जिले के नागौद सिविल अस्पताल की अव्यवस्थाओं पर सीएमएचओ ने औचक निरीक्षण के बाद नई गाइडलाइन जारी की। स्टाफ की बायोमेट्रिक उपस्थिति, लेबर रूम में सीसीटीवी, ओपीडी समय पालन, साफ-सफाई और अल्ट्रासोनोग्राफी प्रोटोकॉल सहित 8 बिंदुओं पर बीएमओ को कड़े निर्देश दिए गए।
सतना जिला अस्पताल में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान में गड़बड़ियां सामने आईं। सीएमएचओ ने औचक निरीक्षण में पाया कि गर्भवती महिलाओं का चेकअप बिना स्त्री रोग विशेषज्ञ के हो रहा था और शासन की गाइडलाइन का पालन नहीं किया जा रहा था। सिविल सर्जन व गायनी प्रभारी से चार बिंदुओं पर जवाब मांगा गया।
स्वास्थ्य आयुक्त तरुण राठी ने आदेश जारी किया कि प्रदेश के चिकित्सा विशेषज्ञ और पीजी चिकित्सा अधिकारी अब प्रशासकीय कार्यों से मुक्त होकर केवल क्लीनिकल सेवाएं देंगे। जिलों में विशेषज्ञों की कमी को देखते हुए सीएमएचओ और सिविल सर्जन को पत्र लिखकर स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं।
कोरोना काल में सतना जिले में स्वास्थ्य विभाग द्वारा 2 करोड़ से अधिक की राशि के गबन का आरोप अमरपाटन विधायक और पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र सिंह ने सदन में उठाया है। उन्होंने बीएमओ और तत्कालीन सीएमएचओ की संलिप्तता की बात कही है। फोटोकॉपी सेंटर को दिए गए लाखों के भुगतान ने भ्रष्टाचार की पोल खोल दी है। जांच और ऑडिट की मांग की गई।
सतना जिला अस्पताल में मरीज से पैसे मांगने और अभद्रता करने के आरोप में डॉक्टर लोकेश सोनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। सिविल सर्जन ने 24 घंटे में स्पष्टीकरण मांगा है। वहीं, सीएमएचओ ने स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा में कहा कि 15 दिन में लक्ष्य पूरा न होने पर नो वर्क नो पे के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मैहर जिला बनने के बावजूद यहां का जिला अस्पताल सुविधाओं से वंचित है। दिव्यांग मेडिकल बोर्ड की साप्ताहिक बैठक बंद कर मासिक कर दी गई है, जिससे सैकड़ों दिव्यांगों और छात्रों को योजनाओं व शिक्षा से वंचित होना पड़ रहा है।
सतना जिला अस्पताल की संवेदनहीनता एक बार फिर उजागर हुई है। सीएमएचओ के आदेश के बावजूद नए स्ट्रेचर में दवाइयां ढोई जा रही हैं और मरीजों को जर्जर, कबाड़ स्ट्रेचर मिल रहे हैं। यह लापरवाही मरीजों की जान जोखिम में डाल रही है। अस्पताल प्रशासन की अनदेखी और सिस्टम की खामियां एक बार फिर चर्चा में हैं। पूरा सच जानिए इस रिपोर्ट में।






















