सतना जिला अस्पताल में ऑनलाइन ओपीडी और दवा वितरण व्यवस्था का पायलट प्रोजेक्ट शुरू हुआ। सीएमएचओ और सिविल सर्जन ने खुद प्रक्रिया परखी। पांच संस्थानों में मरीजों का रिकॉर्ड ऑनलाइन होगा, लेकिन पैथोलॉजी जांच सिस्टम अटक रहा है।
सतना जिला अस्पताल की नई ओपीडी में दो छात्राएं ताला लगने से अंदर फंस गईं। शोर मचाने पर कर्मचारियों ने उन्हें बाहर निकाला। घटना ने अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली और मरीजों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए।
सतना की स्वास्थ्य सेवाओं ने प्रभावशाली प्रदर्शन किया है। हर माह लाखों मरीजों का इलाज हो रहा है, लेकिन चिकित्सकों की कमी, समन्वय की समस्या और बढ़ते तनाव जैसी चुनौतियां अब भी बरकरार हैं।
पं. अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल कॉलेज के छात्रों को अस्पताल न खुलने और सुविधाओं के अभाव के कारण ओपीडी कक्षों में मरीजों के बीच खड़े होकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। जिला अस्पताल में क्लीनिकल हॉल न मिलने और कॉलेज से 8 किमी दूर अस्पताल तक रोज़ाना 240 छात्रों की आवाजाही ने समस्याओं को और गंभीर बना दिया है।
सतना में बदलते मौसम के साथ वायरल अटैक ने चिंता बढ़ा दी है। दिवाली अवकाश के बाद खुले जिला अस्पताल में एक ही दिन में 1640 मरीजों ने ओपीडी में इलाज कराया, जिनमें से 140 को भर्ती की सलाह दी गई। डॉक्टरों के अनुसार मरीजों में बुखार, खांसी, श्वसन समस्या, बॉडी पेन और कमजोरी जैसे लक्षण बढ़े हैं। बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतने की अपील की गई है।
सतना जिला अस्पताल में सोमवार को 2250 से ज्यादा मरीजों ने ओपीडी में पंजीयन कराया, जो 2012 के बाद सबसे बड़ी संख्या है। बदलते मौसम में वायरल बुखार, सर्दी-खांसी और पेट दर्द से पीड़ित मरीजों की भीड़ ने अस्पताल की व्यवस्था चरमराई दी। वार्ड फुल हो गए और बच्चों का पीकू वार्ड क्षमता से दोगुना भर गया।
सतना जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल सरदार वल्लभभाई पटेल में चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। सायंकालीन ओपीडी में डॉक्टरों की गैरहाज़िरी और मरीजों की तड़पती लाइनें जिले की स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। पढ़ें इस ग्राउंड रिपोर्ट में डॉक्टरों की लापरवाही और सिस्टम की चुप्पी की पूरी सच्चाई।
भोपाल की शहरी और ग्रामीण स्वास्थ्य संस्थाओं की ओपीडी में देरी से पहुंचने वाले 25 डॉक्टरों और 55 स्वास्थ्यकर्मियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग के 10 अधिकारियों ने मंगलवार सुबह स्वास्थ्य सेवा केन्द्रों का जायजा लिया।
रीवा के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में डॉक्टरों की मनमानी और लापरवाही चरम पर है। सुबह OPD समय पर नहीं पहुंचते डॉक्टर, मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। करोड़ों की लागत से बना अस्पताल और लाखों की सैलरी पाने वाले डॉक्टर अनुबंध के बावजूद निजी प्रैक्टिस में व्यस्त। डीन और अधीक्षक की लापरवाही से बिगड़ी व्यवस्था। जानिए पूरी रिपोर्ट।
रीवा में उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने नशामुक्त भारत अभियान की समीक्षा करते हुए कहा कि नशे के विरुद्ध कार्रवाई संतोषजनक है। साथ ही बिजली व्यवस्था, स्वास्थ्य सुविधा और प्रधानमंत्री आवास योजना की प्रगति की भी समीक्षा की गई।






















