रायसेन में आयोजित 'उन्नत कृषि महोत्सव 2026' में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों को आधुनिक तकनीक और ई-फॉर्म्स ऐप की सौगात दी। जानें खेती और बोनस से जुड़ी बड़ी खबरें।
रीवा में आयोजित कृषि सम्मेलन में उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने रासायनिक खाद और कीटनाशकों के दुष्प्रभाव बताते हुए प्राकृतिक खेती अपनाने पर जोर दिया, ताकि धरती और आने वाली पीढ़ियां स्वस्थ रह सकें।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल में राज्य स्तरीय पुष्प महोत्सव का उद्घाटन किया। मध्यप्रदेश देश का दूसरा सबसे बड़ा फूल उत्पादक राज्य बना। जानें किसानों के लिए सब्सिडी और गेहूं के बढ़ते दामों पर CM के बड़े ऐलान
मध्यप्रदेश कृषि क्षेत्र में एक और नया इतिहास रचने जा रहा है। किसानों को आत्मनिर्भर और खेती को लाभ का धंधा बनाने मध्यप्रदेश सरकार ने प्रदेश में मखाना खेती को प्रोत्साहित करने का निर्णय लिया है। इसके तहत प्रदेश के चार जिलों नर्मदापुरम, बालाघाट, छिंदवाड़ा और सिवनी में पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस में 100-100 किसानों को प्राकृतिक और जैविक खेती अपनाने, बागवानी बढ़ाने और भावान्तर योजना का लाभ सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। पराली जलाने पर सख्त रोक के भी निर्देश।
रीवा के बसामन मामा गौ अभ्यारण्य में विकसित प्रॉम आर्गेनिक खाद यूरिया और डीएपी का पर्याय बनकर किसानों को उपलब्ध है। यह खाद खेतों की उर्वरता बढ़ाएगी, मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी दूर करेगी और रासायनिक खाद के दुष्प्रभाव से मुक्त शुद्ध अन्न देने में मदद करेगी।
नईगढ़ी क्षेत्र में आवारा मवेशियों ने किसानों की नींद उड़ा दी है। खेतों की फसलें बर्बाद हो रही हैं और लगभग 40% किसान खेती से मुंह मोड़ रहे हैं। सरकार की गौशाला योजना अधर में लटकी है।
सीधी जिले में आवारा पशुओं की बढ़ती समस्या से किसान बुरी तरह परेशान हैं। खरीफ सीजन की फसलें सुरक्षित रखने के लिए किसान दिन-रात खेतों में जागकर रखवाली कर रहे हैं। खेतों में तार और बाड़ा लगाकर सुरक्षा की कोशिशें की जा रही हैं, जिससे खेती की लागत और बढ़ रही है। सरकार से ठोस समाधान की उम्मीद अब भी अधूरी है।
रीवा जिले में खरीफ सीजन के लिए तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस बार कोदौ और मक्का जैसी मोटे अनाज की फसलों को प्रोत्साहित किया जाएगा। धान की खेती के लिए 1.17 लाख हेक्टेयर का रकबा तय किया गया है। साथ ही खाद की पर्याप्त उपलब्धता भी सुनिश्चित की गई है।






















