मध्यप्रदेश में कक्षा 1 से 8 तक नामांकन 87.2 प्रतिशत रहा, लक्ष्य से 12.8 प्रतिशत कम। नर्मदापुरम पहले, रीवा दूसरे स्थान पर रहा, जबकि इंदौर संभाग का प्रदर्शन सबसे कमजोर पाया गया।
रीवा संभाग में गेहूं उपार्जन की रफ्तार धीमी है, 32 दिन बाद भी केवल 25 प्रतिशत खरीदी हो सकी। किसानों को अव्यवस्था, तौल देरी, बारदाना कमी और भुगतान विलंब जैसी समस्याएं झेलनी पड़ रही हैं।
मध्यप्रदेश शासन के गृह विभाग ने कानून-व्यवस्था सुदृढ़ करने के लिए वरिष्ठ IPS अधिकारियों को संभाग प्रभारी नियुक्त किया है। देखें पूरी सूची और प्रभार।
रीवा संभाग में गेहूं उत्पादन 4.19 लाख एमटी अनुमानित है। सतना और रीवा आगे हैं, जबकि मऊगंज और सिंगरौली पीछे। पंजीकृत किसानों में से केवल आधे ही समर्थन मूल्य पर उपज बेच पाएंगे।
RSS ने शताब्दी वर्ष में सांगठनिक बदलाव करते हुए मध्य प्रदेश के तीन प्रांतों को खत्म कर 9 नए संभाग बनाने का फैसला लिया है। जानें पूरे प्रदेश का नया स्ट्रक्चर और किसे मिलेगी कमान।
रीवा संभाग में मनरेगा के तहत 100 दिन रोजगार की गारंटी कागजों तक सिमटी। मांग के मुकाबले बेहद कम परिवारों को काम मिला, जिससे योजना की प्रभावशीलता और सरकारी दावों पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए।
रीवा संभाग में राजस्व वसूली की समीक्षा बैठक, सिंगरौली को शाबासी, अन्य जिलों को सख्त निर्देश, बकायादारों पर कार्रवाई के आदेश।
संभाग के छह जिलों में खाद्यान्न आवंटन के बाद डिस्पैच और वास्तविक वितरण के आंकड़ों में गंभीर अंतर सामने आया है। जहां 40 से 60 फीसदी तक खाद्यान्न का डिस्पैच दर्ज हुआ, वहीं उचित मूल्य दुकानों तक पहुंचते-पहुंचते यह औसतन 20 से 36 फीसदी रह गया।
रीवा संभाग के छह जिलों में सरकारी योजनाओं से जुड़े हितग्राहियों की ई-केवाईसी प्रक्रिया बेहद धीमी है। 1 लाख 16 हजार से अधिक पात्र लोगों में से केवल 3,652 की ही ई-केवाईसी पूरी हो पाई है। यह स्थिति भविष्य में योजना लाभ रुकने और नाम कटने का खतरा बढ़ा रही है, जिस पर प्रशासनिक कार्रवाई जरूरी है।
नई सरकार के गठन के बाद रीवा संभाग में ऑन रिकॉर्ड गरीबों की संख्या चौंकाने वाली तेजी से बढ़ी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार बीते 756 दिनों में संभाग के छह जिलों में 57 हजार से अधिक नए गरीब दर्ज किए गए हैं। इसमें रीवा जिला पहले और सतना दूसरे स्थान पर है। हर दिन औसतन 76 लोग ऑन रिकॉर्ड गरीब की श्रेणी में जुड़ रहे हैं।






















