यूजीसी की नई पहल के तहत कॉलेज और विश्वविद्यालय आसपास की आंगनबाड़ियों को गोद लेंगे। विद्यार्थी बच्चों की शिक्षा, पोषण, स्वास्थ्य और टीकाकरण से जुड़कर व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करेंगे तथा सामाजिक जिम्मेदारियां समझेंगे।

हाइलाइट्स
सतना, स्टार समाचार वेब
उच्च शिक्षा अब केवल कक्षाओं और किताबों तक ही सीमित नहीं रहेगी। विद्यार्थियों को समाज की वास्तविक जरूरतों और जमीनी चुनौतियों से जोड़ने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने नई पहल शुरू की है। इसके तहत महाविद्यालय व विश्वविद्यालय अपने आस-पास के लगभग आधा दर्जन आंगनबाड़ी केंद्रों को गोद लेना होगा। इन केंद्रों को विद्यार्थियों के लिए एक तरह की 'फील्ड लैब' के रूप में विकसित किया जाएगा। जहां वे बच्चों की शिक्षा, पोषण और विकास से जुड़े कार्यों को समझेंगे और सहयोग करेंगे। अधिकारियों के मुताबिक शैक्षणिक संस्थानों की जानकारी प्राप्त की जाएगी। उसका अध्ययन कर रिपोर्ट बनाएंगे, जो यूजीसी को भेजी जाएगी। यह पहल नई शिक्षा नीति (एनईपी) के अंतर्गत शुरू की जा रही है, जिसमें इटनीशेप, अप्रेंटिसशिप और फील्ड वर्क को पढ़ाई का हिस्सा माना गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह योजन प्रभावी रूप से लागू होती है तो इससे विद्यार्थियों के कौशल विकास के साथ-साथ आंगनवाडी केंद्रों में बच्चों की शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
स्वास्थ्य से लेकर पोषण तक का रखेंगे ध्यान
विद्यार्थियों की भूमिका सिर्फ पढ़ाई तक सीमित नहीं होगी। वे वच्चों के स्वास्थ्य और पेषण की स्थिति को समझाने में भी सहयोग करेंगे। बच्चों का वजन और लंबाई मापना, उनके विकास की जानकारी तैयार करना व ग्रोथ चार्ट वनाने जैसे कार्यों में मदद करेंगे। इतना ही नहीं कुपोषित बच्चे की पहचान करने में भी आगनवाड़ी कार्यकतार्ओं का सहयोग करेंगे, ताकि समय पर जरूरी कदम उठाए जा सकें।
जुलाई से लागू होगी व्यवस्था
बताया जाता है कि उच्च शिक्षा विभाग द्वारा आंगनबाड़ियों को गोद लेने की व्यवस्था जुलाई सत्र से लागू होंगे। इसका मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को जमीनी हकीकत से परिचित कराना है। शिक्षा, समाजिकार्य, मनोविज्ञान, गृह विज्ञान और अन्य संबंधित विषयों के छात्र आंगनबाड़ी केंद्रों में जाकर बच्चों के साथ काम करेंगे। वे बच्चों के सीखने के स्तर, व्यवहार, स्वास्थ्य और विकास को करीब से समझेंगे। इससे विद्यार्थियों में व्यावहारिक ज्ञान बढ़ेगा और उन्हें समाज की जरूरत को समझने का अक्सर मिलेगा।
टीकाकरण में मिलेगी मदद
विद्यार्थी गर्भवती महिलाओं और बच्चों के टीकाकरण सबंध जानकारी जुटाएंगे। साथ ही उसका रिकार्ड तैयार किय जाएगा। इतना ही नहीं पोषण ट्रैकर जैसे डिजिटल माध्यमों में डेटा अपडेट करने में भी सहयोग करेंगे। इससे आंगनवाडी सेवाओं की निगरानी और योजनाओं का बेहार क्रियान्वयन संभव हो सकेगा।
सिखाएंगे रचनात्मा तरीकों से
इस प्लान के तरह आंगनवाड़ी केंद्रों में 3 से 6 वर्ष आने बच्चों को कॉलेज छात्र कहानी सुनाना, चित्रकारी, खेल गतिविधिय कठपुतली और अन्य रचनात्मा तरीकों का उपयोग करेंगे। बताया जाता है कि इससे बच्चों में सीखने की रुचि बढ़ेगी और स्कूल में प्रवेश के समय उनकी बुनिया तैयारी बेहतर होगी।


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