RSS प्रमुख मोहन भागवत ने IIMUN के कार्यक्रम में Gen-Z, शिक्षा बजट, महिलाओं की भागीदारी, LGBTQ और पड़ोसी देशों के संबंधों पर खुलकर अपने विचार रखे।

मुंबई। स्टार समाचार वेब
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने मुंबई के नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर में आयोजित 'इंडिया इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस' (IIMUN) के 15वें वर्षगांठ समारोह के दौरान छात्रों और युवाओं से खुलकर संवाद किया। हाल ही में नीट (NEET) पेपर लीक और जंतर-मंतर पर हुए लंबे आंदोलनों के बाद युवाओं के साथ संघ का यह सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण संवाद माना जा रहा है। कार्यक्रम के दौरान भागवत ने Gen-Z, शिक्षा प्रणाली, महिला सशक्तिकरण, LGBTQ समुदाय और पड़ोसी देशों के साथ संबंधों जैसे तमाम अहम मुद्दों पर अपनी राय रखी।
युवाओं की कार्यशैली और सोच पर बात करते हुए संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि आज की नई पीढ़ी यानी जेन-जी (Gen-Z) और जेन-अल्फा (Gen-Alpha) पुरानी पीढ़ी की तुलना में कहीं अधिक देशभक्त और ईमानदार हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हमें उनकी बात सुननी चाहिए और उनके साथ संवादहीनता को दूर करना चाहिए। उनके अनुसार, युवाओं से बातचीत में कमी होने के कारण ही दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलन जैसी स्थितियां उत्पन्न हुईं। उन्होंने स्पष्ट किया कि आंदोलन करने वाले युवा देशविरोधी (एंटी-नेशनल) नहीं हैं, बल्कि उनकी चिंताओं को समझने की आवश्यकता है। साथ ही, उन्होंने सोशल मीडिया के दौर में हिंसा को बढ़ावा देने वाले ट्रेंड्स से बचने और AI के इस युग में फेक कंटेंट से निपटने के लिए वेरिफिकेशन को बेहद जरूरी बताया।
देश की शिक्षा व्यवस्था और बजट को लेकर उठ रहे सवालों पर मोहन भागवत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शिक्षा कोई कमर्शियल बिजनेस (व्यापार) नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह सभी के लिए सुलभ होनी चाहिए और इसके लिए पर्याप्त बुनियादी ढांचा (इंफ्रास्ट्रक्चर) उपलब्ध कराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा बजट बढ़ाने की आवश्यकता का वे समर्थन करते हैं, लेकिन केवल सरकार के भरोसे शिक्षा व्यवस्था को नहीं छोड़ा जा सकता। यह सिर्फ सरकार की नहीं, बल्कि हम सबकी साझा जिम्मेदारी है। समाज के सक्षम लोगों को भी अपने स्तर पर स्कूलों में कंप्यूटर लगवाने और बुनियादी सुविधाएं सुधारने में सहयोग करना चाहिए।
संघ में महिलाओं की भूमिका को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में भागवत ने कहा कि जितने भी संघ के प्रकल्प हैं, उनमें महिलाएं बराबरी के साथ आगे बढ़ रही हैं और उनके लिए अलग विंग भी बनाया गया है। एपेक्स बॉडी के संदर्भ में उन्होंने कहा कि महिलाएं फील्ड में सक्रिय रूप से काम कर रही हैं और उनके विचारों को पूरा महत्व दिया जाता है। वैश्विक परिप्रेक्ष्य में महिलाओं को बराबरी का हक और लीड करने का अवसर मिलने के समर्थन में उन्होंने कहा कि महिलाओं में नेतृत्व करने की पूरी क्षमता है और उन्हें उनके समान अधिकार मिलने ही चाहिए।
समान लिंग विवाह (Same-Sex Marriage) और LGBTQ समुदाय से जुड़े सवाल पर संघ प्रमुख ने कहा कि LGBTQ समुदाय हमारी ही सोसाइटी का एक हिस्सा है और वे व्यवस्था से जुड़े हुए हैं। हालांकि, विवाह के विषय को उन्होंने एक अलग और पारंपरिक संस्था बताया। उन्होंने कहा कि शादी एक ऐसी संस्था है जो परिवार के निर्माण के लिए बनी है, जहां बच्चे के पालन-पोषण के लिए माता और पिता दोनों का होना जरूरी अंग माना गया है। यदि सदियों से चले आ रहे इस सिस्टम को अचानक छेड़ा जाएगा तो दिक्कतें पैदा हो सकती हैं और यदि कोई नई व्यवस्था लानी भी हो, तो उसके लिए पहले समाज को मानसिक रूप से तैयार करना होगा।
चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों के साथ संबंधों और युद्ध की स्थितियों पर चर्चा करते हुए भागवत ने स्पष्ट किया कि जब देश युद्ध जैसी स्थिति का सामना कर रहा हो, तब आतंकवाद और सुरक्षा के मुद्दों को देखते हुए हमें बिना किसी दोमत के अपनी सरकार का पूरी तरह साथ देना चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि युद्ध कभी भी स्थाई समाधान नहीं होता है, इसलिए युद्ध टलने या खत्म होने के बाद हमेशा बातचीत के रास्ते तलाशने चाहिए। राजनीति अपनी जगह है, लेकिन मानवता सबसे ऊपर है।
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